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Gonda News: शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट में किया प्रदर्शन
Tue, 16 Sep 2025 11:38 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 16 Sep 2025 11:38 PM IST
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कलेक्ट्रेट में अतिरिक्त मजिस्ट्रेट यशवंत राव को ज्ञापन सौंपते शिक्षक, मौजूद एसडीएम सदर अशोक कु
गोंडा। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में टीईटी मामले को लेकर प्रदर्शन किया। टीईटी की अनिवार्यता को समाप्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट यशवंत राव को सौंपा गया।
जिलाध्यक्ष आनंद कुमार त्रिपाठी ने कहा कि भारत सरकार के 25 अगस्त 2010 एवं उत्तर प्रदेश में 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) लागू करने का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय, जो राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के शपथ-पत्र पर आधारित था, उचित नहीं है। कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने 2010 में शिक्षक पात्रता परीक्षा को शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य किया। इससे पहले के आदेशों में कभी यह उल्लेख नहीं था कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर यह नियम लागू होगा। फिर भी, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र प्रस्तुत कर यह भ्रामक दावा किया कि टीईटी पूर्व से ही अनिवार्य था। यह शपथपत्र न केवल पूर्व आदेशों के विरुद्ध है, बल्कि इसने सुप्रीम कोर्ट को भी गुमराह करने का प्रयास किया। ऐसे में यह निर्णय उचित नहीं है।
संयुक्त मंत्री व मीडिया प्रभारी वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि यह निर्णय उचित नहीं है। जिला मंत्री विजय नारायण पांडेय ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के शपथपत्र की सत्यता और अंतर्विरोधों की गहन जांच हो। इस मौके पर दिनेश कुमार सिंह, अफसर हसन, मनोज मिश्र, कौशल किशोर ओझा, पवन शुक्ल, बृजेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
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वहीं, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ के प्रांतीय संयुक्त मंत्री डॉ. विजय प्रकाश त्रिपाठी, मंडल अध्यक्ष परवेज अकरम के निर्देशन में जिलाध्यक्ष किरन सिंह, मंडलीय मंत्री मोहित प्रकाश सिंह, आनंद शंकर त्रिपाठी, ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य ने भी टीईटी की अनिवार्यता को लेकर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। बाद में मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को दिया।
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जिलाध्यक्ष आनंद कुमार त्रिपाठी ने कहा कि भारत सरकार के 25 अगस्त 2010 एवं उत्तर प्रदेश में 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) लागू करने का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय, जो राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के शपथ-पत्र पर आधारित था, उचित नहीं है। कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने 2010 में शिक्षक पात्रता परीक्षा को शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य किया। इससे पहले के आदेशों में कभी यह उल्लेख नहीं था कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर यह नियम लागू होगा। फिर भी, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र प्रस्तुत कर यह भ्रामक दावा किया कि टीईटी पूर्व से ही अनिवार्य था। यह शपथपत्र न केवल पूर्व आदेशों के विरुद्ध है, बल्कि इसने सुप्रीम कोर्ट को भी गुमराह करने का प्रयास किया। ऐसे में यह निर्णय उचित नहीं है।
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संयुक्त मंत्री व मीडिया प्रभारी वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि यह निर्णय उचित नहीं है। जिला मंत्री विजय नारायण पांडेय ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के शपथपत्र की सत्यता और अंतर्विरोधों की गहन जांच हो। इस मौके पर दिनेश कुमार सिंह, अफसर हसन, मनोज मिश्र, कौशल किशोर ओझा, पवन शुक्ल, बृजेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
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वहीं, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ के प्रांतीय संयुक्त मंत्री डॉ. विजय प्रकाश त्रिपाठी, मंडल अध्यक्ष परवेज अकरम के निर्देशन में जिलाध्यक्ष किरन सिंह, मंडलीय मंत्री मोहित प्रकाश सिंह, आनंद शंकर त्रिपाठी, ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य ने भी टीईटी की अनिवार्यता को लेकर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। बाद में मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को दिया।