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राज्य पुरस्कार में शिक्षकों ने दिखाई बेरुखी, जिले से एक भी आवेदन नहीं
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कोटो-18-गोंडा के प्राथमिक विद्यालय डड़वा कानूनगो में मौजूद शिक्षक। -संवाद
- फोटो : GONDA
गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों को राज्य पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए आवेदन मांगे जा रहे हैं। इसकी शुरुआत भी 16 अप्रैल से हो गई गई है। 31 मई आखिरी तिथि तय है। अब तक जिले से एक भी शिक्षक ने आवेदन नहीं किया है। जिले में आठ हजार शिक्षक परिषदीय स्कूलों में कार्यरत हैं। इसमें दो सौ से अधिक शिक्षक तो अपने कार्य के लिए कई स्तरों पर सम्मानित हो चुके हैं। राज्य पुरस्कार हर शिक्षक के लिए गौरव की बात है, इसके बाद भी शिक्षकों ने योजना से मुंह फेर रखा है।
राज्य अध्यापक पुरस्कार 2021 के लिए आवेदन में मात्र एक दिन का समय बचा है। मंडल के बहराइच जिले से एक भी आवेदन नहीं हुआ है। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के चयन के लिए प्रेरणा वेब पोर्टल पर आवेदन मांगा गया है। 23 मई को निदेशक की ओर समीक्षा की गई तो यह तथ्य सामने आए कि पुरस्कार के लिए शिक्षकों ने आवेदन ही नहीं किया है। बीएसए को भेजे पत्र में निदेशक ने चिंता जताई है।
प्रदेश के 28 जिलों से किसी भी शिक्षक ने आवेदन नहीं किया है, जिसमें गोंडा भी शामिल है। मंडल के बहराइच जिले से भी कोई आवेदन नहीं हुए हैं। निदेशक ने बीएसए व सहायक शिक्षा निदेशक को पत्र भेजकर जिले के शिक्षकों से आवेदन कराने के निर्देश दिए हैं। हर जिले से कम से कम तीन- तीन शिक्षकों के आवेदन होने जरूरी हैं।
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आवेदन न होने से बिगड़ेगी विभाग की छवि
राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए शिक्षकों के आवेदन न होने से विभाग को अपनी छवि बिगड़ने की चिंता सता रही है। प्रदेश स्तर पर मिलने वाले पुरस्कार में जिले से एक भी पुरस्कार तय होने पर विभाग की ओर से बदल रही तस्वीर पेश करने में रुकावट आ सकती है। इसके लिए आवेदन पर जोर दिया जा रहा है। जिले से एक भी आवेदन न होना चौंकाने वाला भी है। शिक्षक नेता विनय तिवारी कहते हैं कि शिक्षकों पर काम बोझ बढ़ता जा रहा है। बेवजह के काम लिए जाते हैं। छोटी- छोटी बातों पर कार्रवाई कर दी जाती है। ऐसे में पुरस्कर लेकर कल को कोई कमी पर कार्रवाई हो जाए तो पुरस्कार की बदनामी होगी। इन सब कारणों से भी शिक्षक आवेदन नहीं करना चाहता है।
पुरस्कार के लिए आवेदन करने पर शुरू होती पुलिस जांच
राज्य अध्यापक पुरस्कार में अब पुलिस की रिपोर्ट भी लगती है। आवेदन करने के बाद विभागीय जांचों के साथ ही पुलिस की जांच का भी सामना करना पड़ता है। बीते दो सालों से यह जांच शुरू हुई है। इसके पहले विभाग के अधिकारी हर बिंदु की जांच करके रिपोर्ट दे देते थे। अब पुलिस से अलग रिपोर्ट मांगी जाती है। शिक्षकों का मन नहीं हो रहा है कि वह आवेदन करें। इससे भी आवेदनों में कमी आ रही है, लेकिन एक भी आवेदन न होने से विभाग की चिंता बढ़ी हुई है।
वर्जन-
राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए अच्छे शिक्षकों से आवेदन करने के लिए कहा गया है। अभी 31 मई तक का समय है। आवेदन हो जाएंगे। तीन आवेदन होना जरूरी है, जिससे योग्य का चुनाव हो सके।
- डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह, बीएसए
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राज्य अध्यापक पुरस्कार 2021 के लिए आवेदन में मात्र एक दिन का समय बचा है। मंडल के बहराइच जिले से एक भी आवेदन नहीं हुआ है। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के चयन के लिए प्रेरणा वेब पोर्टल पर आवेदन मांगा गया है। 23 मई को निदेशक की ओर समीक्षा की गई तो यह तथ्य सामने आए कि पुरस्कार के लिए शिक्षकों ने आवेदन ही नहीं किया है। बीएसए को भेजे पत्र में निदेशक ने चिंता जताई है।
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प्रदेश के 28 जिलों से किसी भी शिक्षक ने आवेदन नहीं किया है, जिसमें गोंडा भी शामिल है। मंडल के बहराइच जिले से भी कोई आवेदन नहीं हुए हैं। निदेशक ने बीएसए व सहायक शिक्षा निदेशक को पत्र भेजकर जिले के शिक्षकों से आवेदन कराने के निर्देश दिए हैं। हर जिले से कम से कम तीन- तीन शिक्षकों के आवेदन होने जरूरी हैं।
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आवेदन न होने से बिगड़ेगी विभाग की छवि
राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए शिक्षकों के आवेदन न होने से विभाग को अपनी छवि बिगड़ने की चिंता सता रही है। प्रदेश स्तर पर मिलने वाले पुरस्कार में जिले से एक भी पुरस्कार तय होने पर विभाग की ओर से बदल रही तस्वीर पेश करने में रुकावट आ सकती है। इसके लिए आवेदन पर जोर दिया जा रहा है। जिले से एक भी आवेदन न होना चौंकाने वाला भी है। शिक्षक नेता विनय तिवारी कहते हैं कि शिक्षकों पर काम बोझ बढ़ता जा रहा है। बेवजह के काम लिए जाते हैं। छोटी- छोटी बातों पर कार्रवाई कर दी जाती है। ऐसे में पुरस्कर लेकर कल को कोई कमी पर कार्रवाई हो जाए तो पुरस्कार की बदनामी होगी। इन सब कारणों से भी शिक्षक आवेदन नहीं करना चाहता है।
पुरस्कार के लिए आवेदन करने पर शुरू होती पुलिस जांच
राज्य अध्यापक पुरस्कार में अब पुलिस की रिपोर्ट भी लगती है। आवेदन करने के बाद विभागीय जांचों के साथ ही पुलिस की जांच का भी सामना करना पड़ता है। बीते दो सालों से यह जांच शुरू हुई है। इसके पहले विभाग के अधिकारी हर बिंदु की जांच करके रिपोर्ट दे देते थे। अब पुलिस से अलग रिपोर्ट मांगी जाती है। शिक्षकों का मन नहीं हो रहा है कि वह आवेदन करें। इससे भी आवेदनों में कमी आ रही है, लेकिन एक भी आवेदन न होने से विभाग की चिंता बढ़ी हुई है।
वर्जन-
राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए अच्छे शिक्षकों से आवेदन करने के लिए कहा गया है। अभी 31 मई तक का समय है। आवेदन हो जाएंगे। तीन आवेदन होना जरूरी है, जिससे योग्य का चुनाव हो सके।
- डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह, बीएसए