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Gonda News: घट रही सरयू ने तेज की कटान
Wed, 27 Aug 2025 11:24 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 27 Aug 2025 11:24 PM IST
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खेतों को निगलती सरयू नदी।
करनैलगंज (गोंडा)। सरयू नदी के घटने का सिलसिला शुरू हो गया है। नदी में पानी घटने के साथ ही कटान तेज होने लगी है। इससे लोगों की चिंता बढ़ गई है।
बुधवार को सरयू नदी खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गई। वहीं जलस्तर का डिस्चार्ज भी घटकर पौने तीन लाख के आसपास पहुंच गया है। उधर, नदी का जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा है। बुधवार शाम को जारी आंकड़ों के अनुसार सरयू नदी खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 105.0870 मीटर पर पहुंच गई है। लगातार नदी में पानी कम हो रहा है। जबकि दो लाख 76 हजार 982 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा था।
नदी के घटते जलस्तर ने स्वभाव के अनुसार कटान को तेज कर दिया है। मैदानी इलाकों में खेतों और खाली पड़ी जमीन कट रही है। रेता पुरवा, बेहटा, पारा, मांझा रायपुर, बहुवन मदार मांझा, घरकुइयां के सामने नदी ने इस तरह कटान किया है जिसे देखकर किसान परेशान हो गए हैं। इस वर्ष की बाढ़ में सर्वाधिक कटान अब देखने को मिल रही है। नदी का जलस्तर अब जमीन की सतह से नीचे पहुंच गया है, इससे कटान का असर बड़े पैमाने पर दिखाई दे रहा है। ए
क तरफ किसानों की फसल चौपट हुई तो बचा खेत भी नदी की धारा में समाहित हो रहा है। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज आर्य का कहना है कि ग्राम बहुवन मदार मांझा व चंदापुर किटौली के पास बनाए गए स्पर और ठोकर के पास कटान नहीं हो पाई है। मैदानी इलाकों की कटान को रोक पाना मुश्किल है। बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
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बुधवार को सरयू नदी खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गई। वहीं जलस्तर का डिस्चार्ज भी घटकर पौने तीन लाख के आसपास पहुंच गया है। उधर, नदी का जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा है। बुधवार शाम को जारी आंकड़ों के अनुसार सरयू नदी खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 105.0870 मीटर पर पहुंच गई है। लगातार नदी में पानी कम हो रहा है। जबकि दो लाख 76 हजार 982 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा था।
नदी के घटते जलस्तर ने स्वभाव के अनुसार कटान को तेज कर दिया है। मैदानी इलाकों में खेतों और खाली पड़ी जमीन कट रही है। रेता पुरवा, बेहटा, पारा, मांझा रायपुर, बहुवन मदार मांझा, घरकुइयां के सामने नदी ने इस तरह कटान किया है जिसे देखकर किसान परेशान हो गए हैं। इस वर्ष की बाढ़ में सर्वाधिक कटान अब देखने को मिल रही है। नदी का जलस्तर अब जमीन की सतह से नीचे पहुंच गया है, इससे कटान का असर बड़े पैमाने पर दिखाई दे रहा है। ए
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क तरफ किसानों की फसल चौपट हुई तो बचा खेत भी नदी की धारा में समाहित हो रहा है। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज आर्य का कहना है कि ग्राम बहुवन मदार मांझा व चंदापुर किटौली के पास बनाए गए स्पर और ठोकर के पास कटान नहीं हो पाई है। मैदानी इलाकों की कटान को रोक पाना मुश्किल है। बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
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