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खतरे के निशान को पार करने को बेताब सरयू, गावों में हलचल

Mon, 19 Jul 2021 08:06 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 19 Jul 2021 08:06 PM IST
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Saryu desperate to cross the danger mark
गोंडा। सरयू नदी खतरे के निशान को छूने को बेताब है। लगातार हो रही बारिश ने जलस्तर बढ़ने की संभावना से ग्रामीणों की धड़कने बढ़ने लगी हैं। मानसूनी बरसात व विभिन्न बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी के बीच सरयू नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान को छूने के लिए बेताब है।
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करनैलगंज के एक दर्जन से अधिक गावों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वहां के लोगों में हलचल मची है, वहीं प्रशासन ने भी तैयारियां तेज कर दी है। संभावित गावों में राजस्व कर्मियों की निगरानी बढ़ा दी है।
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केंद्रीय जल आयोग के एल्गिन ब्रिज से सोमवार के आंकड़ों के अनुसार नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 105.576 मीटर दर्ज किया गया। जो चेतावनी विंदु से कुछ ही सेंटीमीटर नीचे बह रही है। रविवार को शारदा, गिरजा व सरयू बैराजों से छोड़ा गया था।
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कुल डिस्चार्ज एक लाख 43 हजार चार सौ 43 क्यूसेक था। वहीं सोमवार को वैराजों का कुल डिस्चार्ज दो लाख 69 हजार आठ सौ 49 दर्ज किया गया। मौसम विभाग द्वारा जारी भारी बरसात अलर्ट के बीच बैराजों से भी दुगनी गति से छोड़े जा रहे पानी के बीच बढ़ते जलस्तर से तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
सरयू नदी की उफनाती लहरें हर साल बाढ़ की भयावह तस्वीर पेश करती हैं। सैकड़ों लोगों की गृहस्थी व हजारों एकड़ फसल पानी के सैलाब में बह जाती है। इस बार भी मानसून ने दस्तक दे दी है।
तहसील प्रशासन ने स्थापित बाढ़ चौकियों के माध्यम से बचाव के नाम पर कछार इलाकों में नौकाओं को लगा दिया जाता है। लेखपालों से निगरानी करा रहे हैं। इसके अतिरिक्त उनके खाने पीने के लिए लाई, चना, नमक, चावल, माचिस, सरसों का तेल बांटने की तैयारी है लेकिन अभी किसी को कुछ मिला नही है।
नदी में आने वाली बाढ़ से मांझा रायपुर, नैपुरा, परसावल, काशीपुर, तपेसिपा समेत 12 से अधिक गांव प्रभावित होते हैं। इन गावों में बढ़ते जलस्तर से खतरे की संभावना बढ़ गई है। सबसे बद्तर स्थिति नकहरा, बेहटा व नैपुरा की है। यहां के सभी 12 मजरे पूरी तरह जलमग्न होने के कगार पर हैं।

अधिकांश परिवार गांव से पलायन कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेते हैं या फिर स्थानीय प्रशासन द्वारा स्थापित बाढ़ चौकियों पर रहने को विवश होते हैं। नैपुरा के जगन्नाथ व मांझा रायपुर के रामलाल कहते हैं कि बाढ़ की तबाही का दंश झेलना तो हमारी मजबूरी है।
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