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Gonda News: रावण के अत्याचार से मची त्राहि-त्राहि
Tue, 07 Oct 2025 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 07 Oct 2025 12:01 AM IST
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कटरा शिवदयालगंज में रामलीला प्रस्तुत करते कलाकार। -स्रोत: सोशल मीडिया
नवाबगंज। कटरा शिवदयालगंज में चल रही रामलीला में रविवार को रावण अत्याचार और भगवान श्रीराम के जन्म की लीला का मंचन किया गया। मंचन की शुरुआत भगवान विष्णु की आकर्षक झांकी से हुई, जिसके बाद पूजन-अर्चन और आरती सम्पन्न हुई।
रामलीला में दिखाया गया कि रावण अपने तप के अहंकार में चूर होकर धरती पर आतंक मचाता है। उसके आदेश पर राक्षस साधु-संतों का वध कर उनके यज्ञ को नष्ट कर देते हैं। रावण खुद को ईश्वर घोषित कर देता है, जिससे त्रस्त देवता और ऋषि-मुनि ब्रह्मा, भोलेनाथ और श्री विष्णु का आह्वान करते हैं। आकाशवाणी होती है कि अयोध्या में राजा दशरथ के यहां भगवान श्रीराम अवतरित होंगे।
उधर अयोध्या में राजा दशरथ पुत्र प्राप्ति की चिंता प्रकट करते हैं। गुरु वशिष्ठ के मार्गदर्शन में शृंगि ऋषि के सानिध्य में पुत्रेष्ठि यज्ञ कराया जाता है। यज्ञ से प्राप्त प्रसाद तीनों रानियों को बांटा जाता है, जिसके फलस्वरूप राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म होता है। नामकरण के बाद विश्वामित्र दरबार में पहुंचकर अपने यज्ञ की रक्षा हेतु राम और लक्ष्मण को साथ ले जाने का आग्रह करते हैं।
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मंचन में रावण की भूमिका महेंद्र कसौधन, राजा दशरथ की परमानंद गुप्ता, गुरु वशिष्ठ की बसंतलाल गुप्ता और विश्वामित्र की ओमप्रकाश गुप्ता ने निभाई। भगवान विष्णु की भूमिका राजेंद्र गुप्ता और शंकर जी की अनूप गुप्ता पॉपुलर ने निभाई। निर्देशन विनोद गुप्ता एवं संचालन शुभम गुप्ता ने किया। प्रत्येक दृश्य पर श्रीराम के जयकारों से पंडाल गूंज उठा।
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रामलीला में दिखाया गया कि रावण अपने तप के अहंकार में चूर होकर धरती पर आतंक मचाता है। उसके आदेश पर राक्षस साधु-संतों का वध कर उनके यज्ञ को नष्ट कर देते हैं। रावण खुद को ईश्वर घोषित कर देता है, जिससे त्रस्त देवता और ऋषि-मुनि ब्रह्मा, भोलेनाथ और श्री विष्णु का आह्वान करते हैं। आकाशवाणी होती है कि अयोध्या में राजा दशरथ के यहां भगवान श्रीराम अवतरित होंगे।
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उधर अयोध्या में राजा दशरथ पुत्र प्राप्ति की चिंता प्रकट करते हैं। गुरु वशिष्ठ के मार्गदर्शन में शृंगि ऋषि के सानिध्य में पुत्रेष्ठि यज्ञ कराया जाता है। यज्ञ से प्राप्त प्रसाद तीनों रानियों को बांटा जाता है, जिसके फलस्वरूप राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म होता है। नामकरण के बाद विश्वामित्र दरबार में पहुंचकर अपने यज्ञ की रक्षा हेतु राम और लक्ष्मण को साथ ले जाने का आग्रह करते हैं।
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मंचन में रावण की भूमिका महेंद्र कसौधन, राजा दशरथ की परमानंद गुप्ता, गुरु वशिष्ठ की बसंतलाल गुप्ता और विश्वामित्र की ओमप्रकाश गुप्ता ने निभाई। भगवान विष्णु की भूमिका राजेंद्र गुप्ता और शंकर जी की अनूप गुप्ता पॉपुलर ने निभाई। निर्देशन विनोद गुप्ता एवं संचालन शुभम गुप्ता ने किया। प्रत्येक दृश्य पर श्रीराम के जयकारों से पंडाल गूंज उठा।