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जेल में हुआ कवि सम्मेलन
अमर उजाला/गोंडा
Updated Sat, 30 Jul 2016 10:38 PM IST
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रचनाएं पढ़ते कवि
- फोटो : अमर उजाला
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जिला कारागार में शनिवार को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें देश के दूरदराज से आए कवियों ने अपनी रचनाएं पढ़ीं। जेल अधीक्षक आरके त्रिपाठी ने बताया कि अपर पुलिस अधीक्षक आरके सिंह की मौजूदगी में चिकित्सक डॉ. राजेश पांडेय के सहयोग से जिला कारागार में कवि सम्मेलन आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन का संचालन रामकिशोर तिवारी ने किया।
सम्मेलन में कवि अशोक टाटंबरी ने पढ़ा-इंसानियत नहीं है तो इंसान बुरा है, डिग जाए अगर तनिक तो ईमान बुरा है। पनपा है भेदभाव सियासत की खाद से, न हिंदू बुरा है न मुसलमान बुरा है। अली सईद मशमूम फैजाबादी ने पढ़ा- अपने देश की खातिर शहीद हो जाऊं, ये आरजू है कि अब्दुल हमीद हो जाऊं। जो मेरे मुल्क से गद्दारी कर रहा मशमूम, मैं उसकी जान का दुश्मन शहीद हो जाऊं।
बाराबंकी से आए प्रियांशु गजेंद्र ने पढ़ा- इतने निर्मोही कैसे सजन हो गए, किसकी बाहों में जाकर मग्न हो गए। लौट करके न आए फिर परदेश से, आदमी न हुए कालाधन हो गए। गोरखपुर से आई डॉ. चेतना पांडेय ने पढ़ा- जिंदगानी में कुछ नया क्या है, इस कहानी में कुछ नया क्या है। सिर्फ झंडे का रंग बदला है, राजधानी में कुछ नया क्या है।
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जमुना प्रसाद उपाध्याय ने पढ़ा- यहां की बात निराली है, यह अयोध्या है, यहां के लोग बडे़ सशानास होते हैं। मिसाल यह कि हाशिम मियां की मैयत में पनीली आंख लिए ज्ञानदास होते हैं। बाराबंकी से आए विकास बौखल ने पढ़ा- इस महंगाई में कन्हैया यदि आए कहीं, सच कहता हूं रोटी-दाल मार डालेगी। दो-दो सिम वाले हैं मोबाइल गोपियों के हाथ, पूरी-पूरी रात मिसकाल मार डालेगी।
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सम्मेलन में कवि अशोक टाटंबरी ने पढ़ा-इंसानियत नहीं है तो इंसान बुरा है, डिग जाए अगर तनिक तो ईमान बुरा है। पनपा है भेदभाव सियासत की खाद से, न हिंदू बुरा है न मुसलमान बुरा है। अली सईद मशमूम फैजाबादी ने पढ़ा- अपने देश की खातिर शहीद हो जाऊं, ये आरजू है कि अब्दुल हमीद हो जाऊं। जो मेरे मुल्क से गद्दारी कर रहा मशमूम, मैं उसकी जान का दुश्मन शहीद हो जाऊं।
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बाराबंकी से आए प्रियांशु गजेंद्र ने पढ़ा- इतने निर्मोही कैसे सजन हो गए, किसकी बाहों में जाकर मग्न हो गए। लौट करके न आए फिर परदेश से, आदमी न हुए कालाधन हो गए। गोरखपुर से आई डॉ. चेतना पांडेय ने पढ़ा- जिंदगानी में कुछ नया क्या है, इस कहानी में कुछ नया क्या है। सिर्फ झंडे का रंग बदला है, राजधानी में कुछ नया क्या है।
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जमुना प्रसाद उपाध्याय ने पढ़ा- यहां की बात निराली है, यह अयोध्या है, यहां के लोग बडे़ सशानास होते हैं। मिसाल यह कि हाशिम मियां की मैयत में पनीली आंख लिए ज्ञानदास होते हैं। बाराबंकी से आए विकास बौखल ने पढ़ा- इस महंगाई में कन्हैया यदि आए कहीं, सच कहता हूं रोटी-दाल मार डालेगी। दो-दो सिम वाले हैं मोबाइल गोपियों के हाथ, पूरी-पूरी रात मिसकाल मार डालेगी।