{"_id":"5eff549f8ebc3ea07017f4ad","slug":"operation-kayakalp-will-change-the-appearance-of-government-schools-gonda-news-lko529000112","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपरेशन कायाकल्प से अब शहर के सरकारी स्कूल भी संवरेंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपरेशन कायाकल्प से अब शहर के सरकारी स्कूल भी संवरेंगे
विज्ञापन
गोंडा। जिले के शहरी क्षेत्रों में बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों की स्थिति बद से बदतर है। स्कूल भवन काफी जर्जर हो चुके हैं। पहली बार प्रदेश सरकार ने शहरी स्कूलों के कायाकल्प का फैसला लिया है। एक स्कूल पर 18 लाख रुपये खर्च किए जाने का प्राविधान किया है जो स्थिति के अनुसार घट बढ़ भी सकती है।
जिले में 47 स्कूल शहरी क्षेत्र में हैं जिसमें 4,682 बच्चे पढ़ रहे हैं, भवनों की स्थिति इतनी खराब है कि वहां बच्चे आने से डरते हैं। यहां तक की 10 साल पहले बने शहर में खोले गए कंपोजिट स्कूलों की छत भी टपक रही है और फर्श खराब हो गई है। अब नगर विकास विभाग की ओर से ऑपरेशन कायाकल्प में स्कूलों को शामिल किए जाने से भवनों के जीर्णोद्धार की उम्मीद जगी है।
प्रदेेश सरकार दो सालों से ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को संवारने के लिए पंचायतों के बजट से ऑपरेशन कायाकल्प कर रहा है। इससे जिले के दो हजार के करीब स्कूलों में कार्य कराए गए हैं और लगातार कार्य हो रहे हैं। अब इसी तरह नगर क्षेत्र के स्कूलों को संवारने की मुहिम भी शुरू होगी। जिले में तीन नगर क्षेत्रों में 47 स्कूल हैं जिसमें तीन स्कूल तो किराए के भवनों में संचालित हैं और 5 कंपोजिट स्कूल हैं। इस तरह कंपोजिट स्कूलों को लेकर 44 स्कूलों को कायाकल्प की जरूरत है। बेसिक शिक्षा विभाग स्कूलों में संसाधनों की कमी का ब्यौरा तैयार कर रहा है।
विज्ञापन
नगर पालिकाएं संवारेंगी स्कूलों के भवन को
नगर क्षेत्र के स्कूलों को नगर पालिका परिषदों के बजट से संवारने की मुहिम इस साल शुरू होगी। पहली जुलाई को शासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि नगर निकाय को मिलने वाले बजट से अब स्कूलों को संवारने का कार्य होगा। नगर पालिका को केन्द्रीय वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, स्मार्ट सिटी फंड, निकाय निधि, अवस्थापना निधि से बजट मिलता है। इस बजट का प्रयोग अब स्कूलों के कायाकल्प के लिए हो सकेगा। जिससे शहर के कॉन्वेंट स्कूलों को सरकारी स्कूल टक्कर दे सकें।
हर स्कूल को संसाधनों से करना होगा लैस
हर स्कूल में बच्चों और सुरक्षा को ध्यान में रखकर कार्य योजना तैयार की जाएगी। इसके लिए एक मॉडल भी जारी कर खर्च की सीमा 18.61 लाख रखी गई है। हर स्कूल में बालक व बालिकाओं के लिए मूत्रालय एक लाख 86 हजार रूपए, पेयजल पर 82 हजार रुपये, मल्टीपल हैंडवॉश सिस्टम 19 हजार, प्राथमिक विद्यालय के भवन मरम्मत पर दो लाख 26 हजार और जूनियर हाईस्कूल पर 4.15 लाख रुपये खर्च हो सकेंगे। इसके अलावा दीवार पर टाइल्स 807.84 रूपए प्रति वर्ग मीटर, बिजली पर 36 हजार से अधिक, फर्नीचर पर प्राइमरी में 2.55 लाख, जूनियर हाईस्कूल के लिए दो लाख 15 हजार रूपए, चाहरदिवारी पर 2500 रूपए प्रति रनिंग मीटर व गेट के लिए 20 हजार रुपये, इंटरलॉकिंग पर 1050 प्रति वर्ग मीटर, अतिरिक्त कक्षा-कक्ष पर 4.70 लाख रुपये, श्याम पट के लिए 24 हजार रूपए प्रति श्यामपट पर खर्च हो सकेंगे। बजट में स्कूल की स्थिति के आधार पर कार्य योजना तैयार होनी है।
नगरीय स्कूलों की स्थिति में सुधार के आपरेशन कायाकल्प काफी कारगर साबित होगा। जल्द ही नगर निकायों के साथ समन्वय स्थापित करके विकास के कार्य कराए जाएंगे। शासन से निर्देश जारी हुए हैं।
- डॉ. इन्द्रजीत प्रजापति, बीएसए
विज्ञापन
जिले में 47 स्कूल शहरी क्षेत्र में हैं जिसमें 4,682 बच्चे पढ़ रहे हैं, भवनों की स्थिति इतनी खराब है कि वहां बच्चे आने से डरते हैं। यहां तक की 10 साल पहले बने शहर में खोले गए कंपोजिट स्कूलों की छत भी टपक रही है और फर्श खराब हो गई है। अब नगर विकास विभाग की ओर से ऑपरेशन कायाकल्प में स्कूलों को शामिल किए जाने से भवनों के जीर्णोद्धार की उम्मीद जगी है।
विज्ञापन
प्रदेेश सरकार दो सालों से ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को संवारने के लिए पंचायतों के बजट से ऑपरेशन कायाकल्प कर रहा है। इससे जिले के दो हजार के करीब स्कूलों में कार्य कराए गए हैं और लगातार कार्य हो रहे हैं। अब इसी तरह नगर क्षेत्र के स्कूलों को संवारने की मुहिम भी शुरू होगी। जिले में तीन नगर क्षेत्रों में 47 स्कूल हैं जिसमें तीन स्कूल तो किराए के भवनों में संचालित हैं और 5 कंपोजिट स्कूल हैं। इस तरह कंपोजिट स्कूलों को लेकर 44 स्कूलों को कायाकल्प की जरूरत है। बेसिक शिक्षा विभाग स्कूलों में संसाधनों की कमी का ब्यौरा तैयार कर रहा है।
विज्ञापन
नगर पालिकाएं संवारेंगी स्कूलों के भवन को
नगर क्षेत्र के स्कूलों को नगर पालिका परिषदों के बजट से संवारने की मुहिम इस साल शुरू होगी। पहली जुलाई को शासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि नगर निकाय को मिलने वाले बजट से अब स्कूलों को संवारने का कार्य होगा। नगर पालिका को केन्द्रीय वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, स्मार्ट सिटी फंड, निकाय निधि, अवस्थापना निधि से बजट मिलता है। इस बजट का प्रयोग अब स्कूलों के कायाकल्प के लिए हो सकेगा। जिससे शहर के कॉन्वेंट स्कूलों को सरकारी स्कूल टक्कर दे सकें।
हर स्कूल को संसाधनों से करना होगा लैस
हर स्कूल में बच्चों और सुरक्षा को ध्यान में रखकर कार्य योजना तैयार की जाएगी। इसके लिए एक मॉडल भी जारी कर खर्च की सीमा 18.61 लाख रखी गई है। हर स्कूल में बालक व बालिकाओं के लिए मूत्रालय एक लाख 86 हजार रूपए, पेयजल पर 82 हजार रुपये, मल्टीपल हैंडवॉश सिस्टम 19 हजार, प्राथमिक विद्यालय के भवन मरम्मत पर दो लाख 26 हजार और जूनियर हाईस्कूल पर 4.15 लाख रुपये खर्च हो सकेंगे। इसके अलावा दीवार पर टाइल्स 807.84 रूपए प्रति वर्ग मीटर, बिजली पर 36 हजार से अधिक, फर्नीचर पर प्राइमरी में 2.55 लाख, जूनियर हाईस्कूल के लिए दो लाख 15 हजार रूपए, चाहरदिवारी पर 2500 रूपए प्रति रनिंग मीटर व गेट के लिए 20 हजार रुपये, इंटरलॉकिंग पर 1050 प्रति वर्ग मीटर, अतिरिक्त कक्षा-कक्ष पर 4.70 लाख रुपये, श्याम पट के लिए 24 हजार रूपए प्रति श्यामपट पर खर्च हो सकेंगे। बजट में स्कूल की स्थिति के आधार पर कार्य योजना तैयार होनी है।
नगरीय स्कूलों की स्थिति में सुधार के आपरेशन कायाकल्प काफी कारगर साबित होगा। जल्द ही नगर निकायों के साथ समन्वय स्थापित करके विकास के कार्य कराए जाएंगे। शासन से निर्देश जारी हुए हैं।
- डॉ. इन्द्रजीत प्रजापति, बीएसए