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Gonda News: अब फर्जी नियुक्ति मामले में विवेचना करेगी एसटीएफ
Wed, 10 Sep 2025 11:49 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 10 Sep 2025 11:49 PM IST
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गोंडा। शिक्षा विभाग में हुए फर्जीवाड़ा और करोड़ों रुपये बंदरबांट के मामले में दर्ज केस की विवेचना अब एसटीएफ करेगी। हाईकोर्ट ने आरोपी अनामिका शुक्ला की गिरफ्तारी पर 27 अक्तूबर तक रोक लगा दी है। एसटीएफ को जांच सौंपने के निर्णय से हलचल बढ़ गई है।
केस दर्ज होने के बाद शिकंजा कसते देख अनामिका शुक्ला ने हाईकोर्ट की शरण ली। बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने मामले के तथ्य, परिस्थितियों और गंभीरता को देखते हुए प्रकरण की विवेचना एसटीएफ को सौंपने का आदेश दिया। इसमें 24 अगस्त 2025 को अनामिका के खिलाफ दर्ज मुकदमे व वर्ष 2020 में अनामिका की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे की जांच होनी है।
अदालत ने कहा कि वास्तविक अनामिका शुक्ला कौन है, इसका पता लगाना जरूरी है। न्यायमूर्ति ने एसपी गोंडा को सभी अभिलेख एसटीएफ को स्थानांतरित करने और एसटीएफ के एसपी को तेजी से विवेचना व स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई तिथि 27 अक्तूबर तक अनामिका शुक्ला की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए विवेचना में सहयोग करने का भी आदेश दिया है।
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इस आरोप में दर्ज हुआ था मुकदमा
आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रदीप कुमार पांडेय ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अतुल तिवारी, पटल लिपिक सुधीर सिंह, वित्त एवं लेखा अधिकारी सिद्धार्थ दीक्षित, पटल लिपिक अनुपम पांडे, भैया चंद्रभान दत्त स्मारक टेंगरहा के प्रबंधक दिग्विजयनाथ पांडे, प्रधानाचार्य व अन्य अज्ञात को पक्षकार बनाते हुए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग में एक सिंडिकेट का गिरोह कार्य कर रहा है।
आरोप है कि खरगूपुर के ग्राम भुलईडीह निवासी अनामिका शुक्ला के शैक्षिक अभिलेखों का दुरुपयोग कर शिक्षा विभाग के सिंडिकेट ने कई लोगों की नियुक्ति की और करोड़ों रुपये सरकारी धन का बंदरबांट किया। अनामिका शुक्ला ने विभाग में आकर कहा कि वह नौकरी नहीं कर रही है। कहा कि 2017 में उसने कस्तूरबा गांधी विद्यालय में आवेदन किया था। 2020 में अनामिका ने कोतवाली नगर में केस भी दर्ज कराया।
प्रदीप का आरोप है कि वर्ष 2020 में ही अनामिका शुक्ला की नियुक्ति सहायता प्राप्त विद्यालय भैया चंद्रभान दत्त स्मारक लघु माध्यमिक विद्यालय रामपुर टेंगरहा तरबगंज के प्राइमरी अनुभाग में कर दी गई। लेकिन बाद में पता चला कि वह साल 2017 से ही विद्यालय में सेवारत है। नौ जनवरी 2025 को भी विभाग द्वारा अनामिका के खाते में वेतन भेजा गया है। जबकि वित्त एवं लेखाधिकारी का कहना है कि यह वेतन संशोधन पत्र व अगस्त 2024 को मिलने वाले वेतन के आधार पर निर्गत किया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने भी बताया कि शिक्षिका अनामिका शुक्ला के वेतन के संबंध में कोई प्रस्ताव अथवा बिल वित्त एवं लेखाधिकारी को नहीं भेजा गया है। उन्होंने कहा है कि कार्यालय में मौजूद डिस्पैच रजिस्टर में शिक्षिका अनामिका शुक्ला के विज्ञापन के अनुमति व अनुमोदन के संबंध में भी तत्कालीन बीएसए द्वारा कोई अंकना नहीं की गई है। इस पर 18 अगस्त 2025 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एफआइआर का आदेश दिया था। जिस पर पुलिस ने 24 अगस्त को मुकदमा दर्ज कर लिया था।
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केस दर्ज होने के बाद शिकंजा कसते देख अनामिका शुक्ला ने हाईकोर्ट की शरण ली। बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने मामले के तथ्य, परिस्थितियों और गंभीरता को देखते हुए प्रकरण की विवेचना एसटीएफ को सौंपने का आदेश दिया। इसमें 24 अगस्त 2025 को अनामिका के खिलाफ दर्ज मुकदमे व वर्ष 2020 में अनामिका की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे की जांच होनी है।
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अदालत ने कहा कि वास्तविक अनामिका शुक्ला कौन है, इसका पता लगाना जरूरी है। न्यायमूर्ति ने एसपी गोंडा को सभी अभिलेख एसटीएफ को स्थानांतरित करने और एसटीएफ के एसपी को तेजी से विवेचना व स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई तिथि 27 अक्तूबर तक अनामिका शुक्ला की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए विवेचना में सहयोग करने का भी आदेश दिया है।
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इस आरोप में दर्ज हुआ था मुकदमा
आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रदीप कुमार पांडेय ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अतुल तिवारी, पटल लिपिक सुधीर सिंह, वित्त एवं लेखा अधिकारी सिद्धार्थ दीक्षित, पटल लिपिक अनुपम पांडे, भैया चंद्रभान दत्त स्मारक टेंगरहा के प्रबंधक दिग्विजयनाथ पांडे, प्रधानाचार्य व अन्य अज्ञात को पक्षकार बनाते हुए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग में एक सिंडिकेट का गिरोह कार्य कर रहा है।
आरोप है कि खरगूपुर के ग्राम भुलईडीह निवासी अनामिका शुक्ला के शैक्षिक अभिलेखों का दुरुपयोग कर शिक्षा विभाग के सिंडिकेट ने कई लोगों की नियुक्ति की और करोड़ों रुपये सरकारी धन का बंदरबांट किया। अनामिका शुक्ला ने विभाग में आकर कहा कि वह नौकरी नहीं कर रही है। कहा कि 2017 में उसने कस्तूरबा गांधी विद्यालय में आवेदन किया था। 2020 में अनामिका ने कोतवाली नगर में केस भी दर्ज कराया।
प्रदीप का आरोप है कि वर्ष 2020 में ही अनामिका शुक्ला की नियुक्ति सहायता प्राप्त विद्यालय भैया चंद्रभान दत्त स्मारक लघु माध्यमिक विद्यालय रामपुर टेंगरहा तरबगंज के प्राइमरी अनुभाग में कर दी गई। लेकिन बाद में पता चला कि वह साल 2017 से ही विद्यालय में सेवारत है। नौ जनवरी 2025 को भी विभाग द्वारा अनामिका के खाते में वेतन भेजा गया है। जबकि वित्त एवं लेखाधिकारी का कहना है कि यह वेतन संशोधन पत्र व अगस्त 2024 को मिलने वाले वेतन के आधार पर निर्गत किया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने भी बताया कि शिक्षिका अनामिका शुक्ला के वेतन के संबंध में कोई प्रस्ताव अथवा बिल वित्त एवं लेखाधिकारी को नहीं भेजा गया है। उन्होंने कहा है कि कार्यालय में मौजूद डिस्पैच रजिस्टर में शिक्षिका अनामिका शुक्ला के विज्ञापन के अनुमति व अनुमोदन के संबंध में भी तत्कालीन बीएसए द्वारा कोई अंकना नहीं की गई है। इस पर 18 अगस्त 2025 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एफआइआर का आदेश दिया था। जिस पर पुलिस ने 24 अगस्त को मुकदमा दर्ज कर लिया था।