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आजादी के 73 साल बाद भी नही मिला रास्ता
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गोंडा। सदर तहसील के पंडरी कृपाल भंडहा के कोरियन पुरवा मजरे में चकमार्ग पर आजादी के 75 साल बाद भी दबंगों का कब्जा है। गांव के करीब 25-30 अनुसूचित जाति के परिवारों को आज तक रास्ता नही मिल सका है।
इस गांव से नहर से गांव तक खड़ंजा निर्माण होना था जो गांव के 300 मीटर पहले ही रोक दिया गया है। गांव के प्रधान ने भी सड़क निर्माण की कोशिश किया, लेकिन वह भी दबंगों के आगे लाचार रहे। जिससे गांव तक सड़क नही पहुंच पाई है। जिसके कारण गांव में कोई चार पहिया या दो पहिया वाहन बारिश में नही पहुच सकती है। सड़क न होने के कारण यहां घुटने भर पानी भरा रहता है।
इस वर्ष कुछ लोगों के प्रयास से मुख्य विकास अधिकारी के अनुमति से विकास खंड से सड़क पास तो हो गई, लेकिन निर्माण पूरा नही हो सका है। गांव के उत्तर दिशा से करीब डेढ़ सौ मीटर सड़क की पटाई भी हुई और जब गांव के दक्षिण तरफ लगभग 300 मीटर सड़क पटने की लेखपाल ने नाप जोख कर चकरोड अलग कर दिया तो दबंगों ने लेखपाल पर ही आरोप लगाकर निर्माण रोकवा दिया।
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परेशान ग्रामीणों ने 26 जुलाई को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर चकरोड खाली कराने, ग्रामसभा की भूमि में लगे कीमती पेड़ ग्राम सभा की सम्पत्ति घोषित करने, श्मशान घाट की भूमि खाली कराने की मांग की है।
जिलाधिकारी ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को टीम बना कर अतिक्रमित चकरोड को मुक्त कराने का निर्देश दिया है। पीड़ितों ने पत्र में कहा है कि दबंगों के चकरोड कब्जा कर लेने से हम लोगो के घर चार पहिया वाहन तक नही आ सकता है, लड़की की विदाई हो या दुल्हन को विदाई कर घर लाना हो, किसी बीमार को अस्पताल ले जाना हो तो गोंडा बलरामपुर लाइन को पैदल चारपाई पर लाद कर सात आठ सौ मीटर दूर ले जाना पड़ता है। एंबुलेंस व अन्य वाहनों का गांव में आने का कोई रास्ता नही है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सूरज पटेल ने कहा कि मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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इस गांव से नहर से गांव तक खड़ंजा निर्माण होना था जो गांव के 300 मीटर पहले ही रोक दिया गया है। गांव के प्रधान ने भी सड़क निर्माण की कोशिश किया, लेकिन वह भी दबंगों के आगे लाचार रहे। जिससे गांव तक सड़क नही पहुंच पाई है। जिसके कारण गांव में कोई चार पहिया या दो पहिया वाहन बारिश में नही पहुच सकती है। सड़क न होने के कारण यहां घुटने भर पानी भरा रहता है।
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इस वर्ष कुछ लोगों के प्रयास से मुख्य विकास अधिकारी के अनुमति से विकास खंड से सड़क पास तो हो गई, लेकिन निर्माण पूरा नही हो सका है। गांव के उत्तर दिशा से करीब डेढ़ सौ मीटर सड़क की पटाई भी हुई और जब गांव के दक्षिण तरफ लगभग 300 मीटर सड़क पटने की लेखपाल ने नाप जोख कर चकरोड अलग कर दिया तो दबंगों ने लेखपाल पर ही आरोप लगाकर निर्माण रोकवा दिया।
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परेशान ग्रामीणों ने 26 जुलाई को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर चकरोड खाली कराने, ग्रामसभा की भूमि में लगे कीमती पेड़ ग्राम सभा की सम्पत्ति घोषित करने, श्मशान घाट की भूमि खाली कराने की मांग की है।
जिलाधिकारी ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को टीम बना कर अतिक्रमित चकरोड को मुक्त कराने का निर्देश दिया है। पीड़ितों ने पत्र में कहा है कि दबंगों के चकरोड कब्जा कर लेने से हम लोगो के घर चार पहिया वाहन तक नही आ सकता है, लड़की की विदाई हो या दुल्हन को विदाई कर घर लाना हो, किसी बीमार को अस्पताल ले जाना हो तो गोंडा बलरामपुर लाइन को पैदल चारपाई पर लाद कर सात आठ सौ मीटर दूर ले जाना पड़ता है। एंबुलेंस व अन्य वाहनों का गांव में आने का कोई रास्ता नही है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सूरज पटेल ने कहा कि मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।