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Gonda News: सूची में नाम गलत, अब मुफ्त इलाज को तरस रहे पांच हजार लाभार्थी
Fri, 03 Feb 2023 09:28 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 03 Feb 2023 09:28 AM IST
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किसानों ने जाम की सड़क।
गोंडा। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के करीब पांच हजार लाभार्थी सूची में नाम गलत होने का खामियाजा भुगत रहे हैं। पात्रता सूची में होने के बावजूद इनका गोल्डन कार्ड नहीं बन पा रहा रहा। बीमार पड़ने पर पीड़ित नाम में संशोधन के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे। उधर, अधिकारी भी संशोधन का विकल्प न होने की बात कहकर प्रार्थना पत्र लेकर वापस कर देते।
केस एक: नाम गलत होने पर नहीं बना गोल्डन कार्ड
- शहर के राधाकुंड निवासी सहनाज आयुष्मान योजना की लाभार्थी हैं। इनका लाभार्थी सूची में नाम सहराज लिख गया। जिससे योजना के तहत मुफ्त इलाज से वंचित हैं। उन्होंने प्रमाणित सूची के साथ सीएमओ को प्रार्थना पत्र दिया। संशोधन का विकल्प न होने के कारण पत्र लेकर वापस कर दिया गया।
केस दो: जन्मतिथि में गलती से नहीं मिल रहा इलाज
- नागरा बुजुर्ग निवासी राजेंद्र प्रसाद आयुष्मान योजना के लाभार्थी है। गोल्डन कार्ड बन गया, लेकिन कार्ड में जन्म तिथि का वर्ष 1960 लिखा गया है, जबकि उनका वास्तविक जन्म तिथि 1991 है। गलत जन्म तिथि के कारण इलाज नहीं मिल पाया। सीएमओ कार्यालय पर जन्मतिथि संशोधन के लिए प्रार्थना पत्र दिया। संशोधन नहीं हो सका।
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अभिषेक की जगह पर अनुराग लिख गया नाम
-रुपईडीह के कुरसहा निवासी अभिषेक तिवारी आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी हैं। योजना की पात्रता सूची में नाम अनुराग तिवारी पुत्र शिवकुमार तिवारी लिखा है। नाम गलत होने से गोल्डन कार्ड नहीं बन पा रहा है। गंभीर बीमारी से पीड़ित होकर निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। गोल्डन कार्ड होने के बावजूद पैसा देकर इलाज कराना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले के 282857 परिवार के करीब 12 लाख सदस्यों को मुफ्त इलाज की सुविधा दिया जाना है। योजना के तहत लाभार्थियों का गोल्डन कार्ड बनाकर प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज होना था।
वर्ष 2011 के आर्थिक जनगणना के अनुसार लाभार्थियों की सूची तैयार की गई। जनगणना के समय परिवार के कुछ सदस्यों का नाम गलत अंकित हो गया, जिसका खामियाजा आज उन्हें गोल्डन कार्ड बनवाने में भुगतना पड़ रहा है। गोल्डन कार्ड बनवाने केंद्र पर जाते तो सूची में नाम तथा आधार कार्ड में नाम भिन्न रहता है। जिससे उनका कार्ड नहीं बन पाता, वे मुफ्त इलाज से वंचित हो जाते।
जिला अस्पताल महिला अस्पताल व सीएमओ कार्यालय पर इस तरह हर रोज करीब 20 शिकायतें आ रही हैं। आयुष्मान भारत योजना के समन्वयक भी प्रार्थना पत्र लेकर लाभार्थियों को वापस कर देते।
आयुष्मान भारत योजना की फैक्ट फाइल
कुल लाभार्थी परिवार- 282857
कुल लाभार्थी सदस्य- 12,02,154
परिवारों के गोल्डन कार्ड बने- 1,59,910
गोल्डन कार्ड पर इलाज मिला- 30,811
उच्च अधिकारियों को दी गई जानकारी
आयुष्मान योजना के लाभार्थी सूची में तथा आधार कार्ड में नाम भिन्न होने पर इलाज नहीं मिल पाता। हर रोज कई शिकायतें मिल रही हैं। पोर्टल पर नाम संशोधन का विकल्प न होने से समस्या का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। योजना से जुड़े उच्च अधिकारियों को जानकारी दी गई है।
डॉ. संदीप, जिला कार्यक्रम समन्वयक
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केस एक: नाम गलत होने पर नहीं बना गोल्डन कार्ड
- शहर के राधाकुंड निवासी सहनाज आयुष्मान योजना की लाभार्थी हैं। इनका लाभार्थी सूची में नाम सहराज लिख गया। जिससे योजना के तहत मुफ्त इलाज से वंचित हैं। उन्होंने प्रमाणित सूची के साथ सीएमओ को प्रार्थना पत्र दिया। संशोधन का विकल्प न होने के कारण पत्र लेकर वापस कर दिया गया।
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केस दो: जन्मतिथि में गलती से नहीं मिल रहा इलाज
- नागरा बुजुर्ग निवासी राजेंद्र प्रसाद आयुष्मान योजना के लाभार्थी है। गोल्डन कार्ड बन गया, लेकिन कार्ड में जन्म तिथि का वर्ष 1960 लिखा गया है, जबकि उनका वास्तविक जन्म तिथि 1991 है। गलत जन्म तिथि के कारण इलाज नहीं मिल पाया। सीएमओ कार्यालय पर जन्मतिथि संशोधन के लिए प्रार्थना पत्र दिया। संशोधन नहीं हो सका।
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अभिषेक की जगह पर अनुराग लिख गया नाम
-रुपईडीह के कुरसहा निवासी अभिषेक तिवारी आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी हैं। योजना की पात्रता सूची में नाम अनुराग तिवारी पुत्र शिवकुमार तिवारी लिखा है। नाम गलत होने से गोल्डन कार्ड नहीं बन पा रहा है। गंभीर बीमारी से पीड़ित होकर निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। गोल्डन कार्ड होने के बावजूद पैसा देकर इलाज कराना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले के 282857 परिवार के करीब 12 लाख सदस्यों को मुफ्त इलाज की सुविधा दिया जाना है। योजना के तहत लाभार्थियों का गोल्डन कार्ड बनाकर प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज होना था।
वर्ष 2011 के आर्थिक जनगणना के अनुसार लाभार्थियों की सूची तैयार की गई। जनगणना के समय परिवार के कुछ सदस्यों का नाम गलत अंकित हो गया, जिसका खामियाजा आज उन्हें गोल्डन कार्ड बनवाने में भुगतना पड़ रहा है। गोल्डन कार्ड बनवाने केंद्र पर जाते तो सूची में नाम तथा आधार कार्ड में नाम भिन्न रहता है। जिससे उनका कार्ड नहीं बन पाता, वे मुफ्त इलाज से वंचित हो जाते।
जिला अस्पताल महिला अस्पताल व सीएमओ कार्यालय पर इस तरह हर रोज करीब 20 शिकायतें आ रही हैं। आयुष्मान भारत योजना के समन्वयक भी प्रार्थना पत्र लेकर लाभार्थियों को वापस कर देते।
आयुष्मान भारत योजना की फैक्ट फाइल
कुल लाभार्थी परिवार- 282857
कुल लाभार्थी सदस्य- 12,02,154
परिवारों के गोल्डन कार्ड बने- 1,59,910
गोल्डन कार्ड पर इलाज मिला- 30,811
उच्च अधिकारियों को दी गई जानकारी
आयुष्मान योजना के लाभार्थी सूची में तथा आधार कार्ड में नाम भिन्न होने पर इलाज नहीं मिल पाता। हर रोज कई शिकायतें मिल रही हैं। पोर्टल पर नाम संशोधन का विकल्प न होने से समस्या का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। योजना से जुड़े उच्च अधिकारियों को जानकारी दी गई है।
डॉ. संदीप, जिला कार्यक्रम समन्वयक