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सरयू नदी से अवैध खनन की जांच पर फेरा पानी
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गोंडा। अवैध खनन और भंडारण में तरबगंज तहसील सूबे में चर्चित रही है। दो सौ करोड़ से अधिक का जुर्माना खनन माफियों पर लग चुका है और यहां के अवैध खनन से खनन निदेशालय पूरी तरह वाकिफ है। इसी कड़ी में रविवार को अचानक अवैध खनन और भंडारण की पड़ताल करने एसडीएम पूरे दल बल के साथ सोनौली मोहम्मदपुर पहुंचे, लेकिन नदी के बढ़े जलस्तर से अवैध खनन का राज नहीं खुल सका। उन्होंने माना कि जलस्तर होने से खनन ठप है। वहां की स्थितियों को देखा है और रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजेंगे।
तरबगंज तहसील में अवैध खनन का मामला नया नहीं है, यहां के कई गांवों में अवैध खनन की गूंज शासन तक पहुंच चुकी है। कई बड़ों के नाम भी खनन से जुड़ चुके हैं। बीते साल 2018 में तो बड़े पैमाने पर खनन का मामला सामने आया था और नवाबगंज के एक खनन माफिया के खिलाफ दो सौ करोड़ से अधिक जुर्माना भी लग चुका है। इसके अलावा दुर्गागंज में खनन निदेशक डॉ. रोशन जैकब का छापा भी चर्चित रहा है। उन्होंने न सिर्फ खनन के तरीकों पर नाराजगी जताई थी, बल्कि अवैध तरीके बालू डंप किए जाने पर भी सवाल उठाया था। इसके बाद से तरबगंज में खनन के कई मामलों की जांच हुई।
शासन में अभी भी खनन के खेल की जानकारी है। जिसके कारण रविवार को एसडीएम तरबगंज कुलदीप सिंह उमरीबेगमगंज थाने के सोनौली मोहम्मदपुर में खनन की पड़ताल करने गए। उन्होंने देखा कि खनन के स्थल पर पानी भरा है। ऐसे में यह माना कि यहां पर खनन बंद है। वहीं पंप से बालू निकालने के सूचना की पुष्टि भी नहीं हो पाई है। वहीं स्थानीय लोगों की मानें अगर खनन बंद है तो बाराही देवी मंदिर के आगे बनुआ मार्ग पर एक सरकारी स्थान पर बड़े पैमाने पर बालू का भंडारण है। अधिकारियों को वहां के बालू कहां से आए हैं और उसकी अनुमति है या नहीं। इसकी भी जांच करनी चाहिए। वैसे एसडीएम ने मौजूदा समय में खनन होने की स्थिति से इंकार करते हुए, कहा कि वह रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजेंगे।
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कमाई का सबसे बड़ा साधन बालू खनन
तरबगंज के कई गांवों में बालू की खान है। इसमें एक स्थान का ठेका लेकर लंबे दायरे में खनन करने का खेल सालों से चल रहा है। जिसमें सफेदपोश भी हाथ की सफाई करते हैं। कई बार ठेके से बाहर में खनन का मामला सामने भी आ चुका है। तहसील के कल्याणपुर, दुर्गागंज, सोनौलीमोहम्मदपुर आदि ऐसे क्षेत्र हैं, जो नदी के तटवर्ती गांव हैं और वहां पर बालू होता है। ऐसे में छोटे स्थल का ठेका कराया जाता है और फिर आसपास लंबी दूरी तक बालू खनन किया जाता है। इसमें तहसील के अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ चुकी है।
खनन स्थल पर व्यवस्था का मानक नहीं होता पूरा
खनन के लिए जिस स्थल का ठेका होता है, वहां पर कई तरह की व्यवस्था किए जाने के निर्देश हैं। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में खनन होना है। इसके अलावा खनन में पंप का प्रयोग नहीं होना है। इसके बाद खनन में पंप का प्रयोग होता है और पूर्व में चोरी से खनन करने में पंप के प्रयोग का मामला भी सामने आ चुका है। दरअसल पंप का प्रयोग कर जमीन के अंदर से बालू खींचकर निकालते हैं और ऊपर मिट्टी दिखाई देती रहती है। इससे उस स्थल का स्थल नीचे से खोखला होता रहता है। जांच के समय खनन की पुष्टि नहीं हो पाती है। इस तरह के खेल पर कई बार सवाल उठ चुका है।
अधिकारियों के निर्देश पर सोनौली मोहम्मदपुर में खनन की जांच किया गया है। नदी का जलस्तर बढ़ा था, इसलिए खनन की पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट भेजी जा रही है। कुलदीप सिंह, एसडीएम तरबगंज
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तरबगंज तहसील में अवैध खनन का मामला नया नहीं है, यहां के कई गांवों में अवैध खनन की गूंज शासन तक पहुंच चुकी है। कई बड़ों के नाम भी खनन से जुड़ चुके हैं। बीते साल 2018 में तो बड़े पैमाने पर खनन का मामला सामने आया था और नवाबगंज के एक खनन माफिया के खिलाफ दो सौ करोड़ से अधिक जुर्माना भी लग चुका है। इसके अलावा दुर्गागंज में खनन निदेशक डॉ. रोशन जैकब का छापा भी चर्चित रहा है। उन्होंने न सिर्फ खनन के तरीकों पर नाराजगी जताई थी, बल्कि अवैध तरीके बालू डंप किए जाने पर भी सवाल उठाया था। इसके बाद से तरबगंज में खनन के कई मामलों की जांच हुई।
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शासन में अभी भी खनन के खेल की जानकारी है। जिसके कारण रविवार को एसडीएम तरबगंज कुलदीप सिंह उमरीबेगमगंज थाने के सोनौली मोहम्मदपुर में खनन की पड़ताल करने गए। उन्होंने देखा कि खनन के स्थल पर पानी भरा है। ऐसे में यह माना कि यहां पर खनन बंद है। वहीं पंप से बालू निकालने के सूचना की पुष्टि भी नहीं हो पाई है। वहीं स्थानीय लोगों की मानें अगर खनन बंद है तो बाराही देवी मंदिर के आगे बनुआ मार्ग पर एक सरकारी स्थान पर बड़े पैमाने पर बालू का भंडारण है। अधिकारियों को वहां के बालू कहां से आए हैं और उसकी अनुमति है या नहीं। इसकी भी जांच करनी चाहिए। वैसे एसडीएम ने मौजूदा समय में खनन होने की स्थिति से इंकार करते हुए, कहा कि वह रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजेंगे।
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कमाई का सबसे बड़ा साधन बालू खनन
तरबगंज के कई गांवों में बालू की खान है। इसमें एक स्थान का ठेका लेकर लंबे दायरे में खनन करने का खेल सालों से चल रहा है। जिसमें सफेदपोश भी हाथ की सफाई करते हैं। कई बार ठेके से बाहर में खनन का मामला सामने भी आ चुका है। तहसील के कल्याणपुर, दुर्गागंज, सोनौलीमोहम्मदपुर आदि ऐसे क्षेत्र हैं, जो नदी के तटवर्ती गांव हैं और वहां पर बालू होता है। ऐसे में छोटे स्थल का ठेका कराया जाता है और फिर आसपास लंबी दूरी तक बालू खनन किया जाता है। इसमें तहसील के अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ चुकी है।
खनन स्थल पर व्यवस्था का मानक नहीं होता पूरा
खनन के लिए जिस स्थल का ठेका होता है, वहां पर कई तरह की व्यवस्था किए जाने के निर्देश हैं। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में खनन होना है। इसके अलावा खनन में पंप का प्रयोग नहीं होना है। इसके बाद खनन में पंप का प्रयोग होता है और पूर्व में चोरी से खनन करने में पंप के प्रयोग का मामला भी सामने आ चुका है। दरअसल पंप का प्रयोग कर जमीन के अंदर से बालू खींचकर निकालते हैं और ऊपर मिट्टी दिखाई देती रहती है। इससे उस स्थल का स्थल नीचे से खोखला होता रहता है। जांच के समय खनन की पुष्टि नहीं हो पाती है। इस तरह के खेल पर कई बार सवाल उठ चुका है।
अधिकारियों के निर्देश पर सोनौली मोहम्मदपुर में खनन की जांच किया गया है। नदी का जलस्तर बढ़ा था, इसलिए खनन की पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट भेजी जा रही है। कुलदीप सिंह, एसडीएम तरबगंज