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Gonda News: गन्ने की पौध तैयार कर महिलाओं के लिए मिसाल बनीं मंजू
Tue, 06 Oct 2026 11:30 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 06 Oct 2026 11:30 PM IST
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करनीपुर शिवबख्श पुरवा में नर्सरी में सिंचाई करतीं व अपने मेडल दिखातीं मंजू पांडेय। - संवाद
तरबगंज। करनीपुर के शिवबख्श पुरवा निवासी मंजू पांडेय गन्ने की पौध तैयार कर इलाके में महिला सशक्तीकरण की मिसाल बन गई हैं। उन्होंने प्रेरणा महिला स्वयं सहायता समूह बनाकर खुद के साथ 14 अन्य महिलाओं को भी स्वावलंबी बनाया है।
जून 2020 में गठित इस समूह की अध्यक्ष मंजू ने किसानों को लाभ दिलाने के लिए आधुनिक तरीके से खेती करने का निर्णय लिया। उन्होंने गन्ना विकास परिषद के माध्यम से उन्नतशील प्रजाति हासिल कर नर्सरी शुरू की। शुरुआत में पॉलिथिन में पौध तैयार करती थीं। उसकी हैंडलिंग में बहुत दुश्वारी होती थी। बाद में गन्ना विभाग ने उन्हें ट्रे उपलब्ध कराई। पौध तैयार होने के बाद उसकी विपणन बड़ी समस्या थी। क्षेत्र के किसान उनकी बात को गंभीरता से लेते ही नहीं थे। इसके लिए विभाग ने गोष्ठियां करवाकर मंजू को अपनी बात रखने में मदद की।
मंजू हर साल करीब तीन लाख पौध तैयार करती हैं। किसानों को यह एक रुपये 30 पैसे प्रति पौध की दर से दी जाती है। आठ से 10 दिन के अंतराल पर आठ बैच में पौध तैयार होती है। बीजरोपण के 25 से 30 दिन बाद पौध रोपने योग्य हो जाती है। गन्ना विभाग से समूह को बड कटर मशीन भी मिली है। लागत निकालकर नर्सरी से समूह को हर साल लगभग तीन लाख रुपये की आय हो रही है। व्यवसाय से होने वाला लाभांश सभी महिलाओं में बराबर बांटा जाता है। (संवाद)
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मुख्यमंत्री से मिला महिला कृषक सम्मान
मंजू पांडेय को महिला कृषक के रूप में उत्कृष्ट कार्यों के लिए मुख्यमंत्री सम्मानित कर चुके हैं। वर्ष 2021-22 और 2022-23 में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें लखनऊ में यह सम्मान मिला। मंजू ने बताया कि मुख्यमंत्री से सम्मान मिलना गौरव की बात है। समूह के माध्यम से 14 महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है। सभी महिलाएं सामूहिक रूप से अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।
पौधरोपण से होती है अधिक पैदावार
मंजू पांडेय ने बताया कि उन्नतशील प्रजाति की पौध से तैयार फसल ऊंचे दाम पर बिकती है। सामान्य बोआई से अंकुरण में समस्या आ सकती है लेकिन पौधरोपण से शत-प्रतिशत पौध तैयार होती है और कल्ले अधिक निकलते हैं। प्रति एकड़ 10 हजार पौध लगती है, जबकि बोआई में करीब 30 क्विंटल गन्ना लगता है। पौधरोपण से पिछड़ रही बोआई को भी संभाला जा सकता है।
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जून 2020 में गठित इस समूह की अध्यक्ष मंजू ने किसानों को लाभ दिलाने के लिए आधुनिक तरीके से खेती करने का निर्णय लिया। उन्होंने गन्ना विकास परिषद के माध्यम से उन्नतशील प्रजाति हासिल कर नर्सरी शुरू की। शुरुआत में पॉलिथिन में पौध तैयार करती थीं। उसकी हैंडलिंग में बहुत दुश्वारी होती थी। बाद में गन्ना विभाग ने उन्हें ट्रे उपलब्ध कराई। पौध तैयार होने के बाद उसकी विपणन बड़ी समस्या थी। क्षेत्र के किसान उनकी बात को गंभीरता से लेते ही नहीं थे। इसके लिए विभाग ने गोष्ठियां करवाकर मंजू को अपनी बात रखने में मदद की।
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मंजू हर साल करीब तीन लाख पौध तैयार करती हैं। किसानों को यह एक रुपये 30 पैसे प्रति पौध की दर से दी जाती है। आठ से 10 दिन के अंतराल पर आठ बैच में पौध तैयार होती है। बीजरोपण के 25 से 30 दिन बाद पौध रोपने योग्य हो जाती है। गन्ना विभाग से समूह को बड कटर मशीन भी मिली है। लागत निकालकर नर्सरी से समूह को हर साल लगभग तीन लाख रुपये की आय हो रही है। व्यवसाय से होने वाला लाभांश सभी महिलाओं में बराबर बांटा जाता है। (संवाद)
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मुख्यमंत्री से मिला महिला कृषक सम्मान
मंजू पांडेय को महिला कृषक के रूप में उत्कृष्ट कार्यों के लिए मुख्यमंत्री सम्मानित कर चुके हैं। वर्ष 2021-22 और 2022-23 में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें लखनऊ में यह सम्मान मिला। मंजू ने बताया कि मुख्यमंत्री से सम्मान मिलना गौरव की बात है। समूह के माध्यम से 14 महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है। सभी महिलाएं सामूहिक रूप से अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।
पौधरोपण से होती है अधिक पैदावार
मंजू पांडेय ने बताया कि उन्नतशील प्रजाति की पौध से तैयार फसल ऊंचे दाम पर बिकती है। सामान्य बोआई से अंकुरण में समस्या आ सकती है लेकिन पौधरोपण से शत-प्रतिशत पौध तैयार होती है और कल्ले अधिक निकलते हैं। प्रति एकड़ 10 हजार पौध लगती है, जबकि बोआई में करीब 30 क्विंटल गन्ना लगता है। पौधरोपण से पिछड़ रही बोआई को भी संभाला जा सकता है।

करनीपुर शिवबख्श पुरवा में नर्सरी में सिंचाई करतीं व अपने मेडल दिखातीं मंजू पांडेय। - संवाद