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पहले चरण में ही मिले 12 हजार अतिकुपोषित बच्चे
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2015 11:52 PM IST
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केस- एक
समय- सुबह 10:15 बजे
प्राथमिक विद्यालय रौतावां
पंडरीकृपाल ब्लॉक के रौतावां प्राथमिक विद्यालय में गांव का आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रेखा सिंह एक कमरें में कुछ बच्चों को पढ़ा रही थी। यहां आंगनबाड़ी केंद्र पर न तो तैनात कार्यकर्त्री आयी थी और न ही सहायिका। प्रधानाध्यापिका रेखा सिंह ने बताया कि यहां आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री कभी कभार केंद्र पर आती हैं और दो चार बच्चे रहते हैं। उन्हें भी स्कूलों में पढ़ाया जाता है और एमडीएम दिया जाता है। वजन दिवस पर न कोई पर्यवेक्षक आया और न ही कोई अधिकारी।
केस-दो समय
समय- सुबह 10:45
आंगनबाड़ी केंद्र -महादेवा
आंगनबाड़ी केंद्र महादेवा जूूनियर हाई स्कूल के परिसर में चलता है। यहां आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री रामावती व सहायिका गिरजा तिवारी कुछ बच्चों का एक कमरें में वजन कर रही थीं। उन्होंने बताया कि केंद्र पर 105 बच्चे पंजीकृत हैं, जिसमें आज 40 बच्चे आए थे। उन्होंने बताया कि बच्चों को सुबह दलिया दिया गया है। मुख्य सेविका हजिरा बेगम वेट दिवस पर बच्चों के बारें में जानकारी ले रही थीं।
केस-तीन
समय 11:15 बजे
आंगनबाड़ी केंद्र खरहटिया
आंगनबाड़ी केंद्र खरहटिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में संचालित है। यहां तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री सुशीला देवी व सहायिका फूलमती मुख्य सेविका व स्वास्थ्य टीम के सदस्यों का आने का इंतजार कर रही थीं। कार्यकर्त्री सुशीलादेवी ने बताया कि केंद्र पर 64 बालिका व 72 बालक पंजीकृत हैं। लेकिन मौके पर मात्र 20 बच्चे आये थे। सुशीला देवी ने बताया कि क्षेत्र के सुपरवाइजर का फोन आया था कि आज वेट दिवस है। बच्चों का वेट चेक किया जाएगा।
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सात सितंबर को आयोजित वजन दिवस पर ही जिले में 12 हजार बच्चे अतिकुपोषित निकले। गुरुवार को वजन दिवस के दूसरे चरण में आंगनबाड़ी केंद्रों पर कहीं बच्चे नहीं आए थे तो कहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री व शिक्षक नदारद रहे।
कुपोषण व अतिकुपोषण की रिपोर्ट की बात करें तो आईसीडीएस विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों ने केवल कागजी रिपोर्ट ही तैयार करते रहे। इसकी असलियत अक्तूबर 2011 में शासन को भेजी गई रिपोर्ट से ही पता चलती है। इस रिपोर्ट में पूरे जिले में केवल 112 बच्चे ही अतिकुपोषित निकले थे।
लेकिन वजन दिवस ने इस झूठी रिपोर्ट की पोल खोल दी है। अक्टूबर 2014 में शासन को भेजी गई रिपोर्ट में शून्य से छह वर्ष के कुल बच्चों की संख्या 517455 है। इसमें कुपोषित बच्चों की कुल संख्या एक लाख के करीब है, जबकि अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 112 है।
जिले के 16 विकास खंड में केवल तीन ब्लाक में ही अतिकुपोषित बच्चे हैं और 13 ब्लाक व शहर अतिकुपोषित बच्चों की संख्या शून्य है। इस बार के वजन दिवस में अतिकुपोषित बच्चों की कुल संख्या 20 हजार के पार पहुंच गई है। ऐसे में इससे साफ है कि अब तक जो रिपोर्ट बनती रही वह झूठी थी।
फर्जी रिपोर्टिंग पर होगी कार्रवाई
शासन के निर्देश पर चलाए गए अभियान में कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर अनियमितता मिली है। कई जगह शिक्षक व अन्य लगाए गए कर्मचारी नहीं गए हैं। उन सबके खिलाफ सूची तैयार करायी जा रही है। पूरी रिपोर्ट शुक्रवार तक मिल जाएगी। इसके बाद लापरवाह आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को हटाया जाएगा। गैर जिम्मेेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
-अजय कुमार उपाध्याय, डीएम गोंडा
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प्राथमिक विद्यालय रौतावां
पंडरीकृपाल ब्लॉक के रौतावां प्राथमिक विद्यालय में गांव का आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रेखा सिंह एक कमरें में कुछ बच्चों को पढ़ा रही थी। यहां आंगनबाड़ी केंद्र पर न तो तैनात कार्यकर्त्री आयी थी और न ही सहायिका। प्रधानाध्यापिका रेखा सिंह ने बताया कि यहां आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री कभी कभार केंद्र पर आती हैं और दो चार बच्चे रहते हैं। उन्हें भी स्कूलों में पढ़ाया जाता है और एमडीएम दिया जाता है। वजन दिवस पर न कोई पर्यवेक्षक आया और न ही कोई अधिकारी।
केस-दो समय
समय- सुबह 10:45
आंगनबाड़ी केंद्र -महादेवा
आंगनबाड़ी केंद्र महादेवा जूूनियर हाई स्कूल के परिसर में चलता है। यहां आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री रामावती व सहायिका गिरजा तिवारी कुछ बच्चों का एक कमरें में वजन कर रही थीं। उन्होंने बताया कि केंद्र पर 105 बच्चे पंजीकृत हैं, जिसमें आज 40 बच्चे आए थे। उन्होंने बताया कि बच्चों को सुबह दलिया दिया गया है। मुख्य सेविका हजिरा बेगम वेट दिवस पर बच्चों के बारें में जानकारी ले रही थीं।
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आंगनबाड़ी केंद्र खरहटिया
आंगनबाड़ी केंद्र खरहटिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में संचालित है। यहां तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री सुशीला देवी व सहायिका फूलमती मुख्य सेविका व स्वास्थ्य टीम के सदस्यों का आने का इंतजार कर रही थीं। कार्यकर्त्री सुशीलादेवी ने बताया कि केंद्र पर 64 बालिका व 72 बालक पंजीकृत हैं। लेकिन मौके पर मात्र 20 बच्चे आये थे। सुशीला देवी ने बताया कि क्षेत्र के सुपरवाइजर का फोन आया था कि आज वेट दिवस है। बच्चों का वेट चेक किया जाएगा।
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सात सितंबर को आयोजित वजन दिवस पर ही जिले में 12 हजार बच्चे अतिकुपोषित निकले। गुरुवार को वजन दिवस के दूसरे चरण में आंगनबाड़ी केंद्रों पर कहीं बच्चे नहीं आए थे तो कहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री व शिक्षक नदारद रहे।
कुपोषण व अतिकुपोषण की रिपोर्ट की बात करें तो आईसीडीएस विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों ने केवल कागजी रिपोर्ट ही तैयार करते रहे। इसकी असलियत अक्तूबर 2011 में शासन को भेजी गई रिपोर्ट से ही पता चलती है। इस रिपोर्ट में पूरे जिले में केवल 112 बच्चे ही अतिकुपोषित निकले थे।
लेकिन वजन दिवस ने इस झूठी रिपोर्ट की पोल खोल दी है। अक्टूबर 2014 में शासन को भेजी गई रिपोर्ट में शून्य से छह वर्ष के कुल बच्चों की संख्या 517455 है। इसमें कुपोषित बच्चों की कुल संख्या एक लाख के करीब है, जबकि अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 112 है।
जिले के 16 विकास खंड में केवल तीन ब्लाक में ही अतिकुपोषित बच्चे हैं और 13 ब्लाक व शहर अतिकुपोषित बच्चों की संख्या शून्य है। इस बार के वजन दिवस में अतिकुपोषित बच्चों की कुल संख्या 20 हजार के पार पहुंच गई है। ऐसे में इससे साफ है कि अब तक जो रिपोर्ट बनती रही वह झूठी थी।
फर्जी रिपोर्टिंग पर होगी कार्रवाई
शासन के निर्देश पर चलाए गए अभियान में कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर अनियमितता मिली है। कई जगह शिक्षक व अन्य लगाए गए कर्मचारी नहीं गए हैं। उन सबके खिलाफ सूची तैयार करायी जा रही है। पूरी रिपोर्ट शुक्रवार तक मिल जाएगी। इसके बाद लापरवाह आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को हटाया जाएगा। गैर जिम्मेेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
-अजय कुमार उपाध्याय, डीएम गोंडा