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Gonda News: बिना कोविशील्ड कैसे मिले पांच लाख को बूस्टर डोज
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गोंडा के जिला अस्पताल में खाली पड़ा कोविड हेल्प डेस्क। -संवाद
- फोटो : GONDA
गोंडा। कोरोना संक्रमण की आशंका के बीच वैक्सीन का टोटा सभी की परेशानी बढ़ा रहा है। बीते तीन माह से जिले में कोविशील्ड वैक्सीन का टोटा है। इससे संक्रमण से बचाव के लिए पांच लाख लोग बूस्टर डोज की चाह में भटक रहे हैं। वैक्सीन की बूस्टर डोज के लिए सरकारी व निजी अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद भी बुजुर्गों से लेकर युवा तक को निराश होना पड़ रहा है। जिले में कोविशील्ड व कोवैक्स का स्टॉक पूरी तरह खत्म है। कोवैक्सीन की भी मात्र 3840 डोज ही टीकाकरण के लिए वर्तमान में उपलब्ध हैं।
शनिवार को संक्रमण बढ़ने की आशंका के बीच इटियाथोक के दूबेपुरवा निवासी शंभूनाथ दूबे सीएमओ कार्यालय पर बने कोविड टीकाकरण काउंटर पर कोविशील्ड वैक्सीन की बूस्टर डोज लगवाने पहुंचे। वैक्सीन की उपलब्धता पूछने पर काउंटर पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि दादा पूरे प्रदेश में वैक्सीन की डोज नहीं है। काउंटर पर बूस्टर डोज लगवाने के लिए पहुंचे ऐसे ही तमाम जरूरतमंदों को वैक्सीन न होने के कारण हताश निराश वापस लौटना पड़ा।
जिला अस्पताल के साथ ही कई सीएचसी व पीएचसी पर तो लोगों की पूछताछ से परेशान स्वास्थ्य कर्मियों ने अब कोविड टीकाकरण केंद्र का बैनर तक हटा दिया है। उनका कहना है कि बीते तीन माह से कोविड टीकाकरण में इस्तेमाल होने वाली कोविशील्ड व कोवैक्स वैक्सीन का स्टॉक पूरी तरह खत्म पड़ा है। ऐसे में संक्रमण से बचाव के लिए बूस्टर डोज अथवा छूटी हुई दूसरी डोज की खुराक लेने पहुंच रहे लोगों की पूछताछ से परेशान होकर ही टीकाकरण का बैनर हटाना पड़ा है।
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पांच लाख के इतर सिर्फ 3840 डोज
कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका से भयभीत लोग अब फिर से बचाव के लिए वैक्सीन की बूस्टर डोज लगवाने की कवायद में जुटने लगे हैं। जिले में 18 साल से अधिक आयु वाले 6,70,682 लोगों को बूस्टर डोज लगना थी लेकिन अभी तक मात्र 1,65,166 लोगों को ही वैक्सीन की बूस्टर डोज लग पाई है।
इसके बावजूद जिले में कोविशील्ड व कोवैक्स का स्टाक शून्य है जबकि कोवैक्सीन की मात्र 3840 डोज बची है। ऐसे में करीब पांच लाख लोग वैक्सीन की बूस्टर व छूटी हुई डोज लगवाने के लिए अस्पतालों की खाक छानने को विवश बने हैं। इसी लिए सीएमओ कार्यालय को छोड़कर अधिकांश टीकाकरण केंद्रों से अब टीकाकरण केंद्र का बैनर तक हटा लिया गया है।
अस्पतालों में हेल्प डेस्क व प्रोटोकॉल दोनों गायब
कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे की आशंका के बाद भी इसकी रोकथाम में जुटे स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अस्पतालों में ही सतर्कता पूरी तरह हाशिए पर है। इसके चलते ही कोविड प्रोटोकाल के बावजूद जिला अस्पताल से सीएचसी व पीएचसी में हेल्थ डेस्क के साथ मास्क लगाने व सोशल डिस्टेंसिंग कायम सभी कुछ नदारद है। काउंटर के बाहर बैनर लटकाकर कोविड हेल्प डेस्क की खानापूर्ति तो कर दी गई लेकिन वहां तापमान की जांच करने व कोरोना नियमों की जानकारी देने वाला कर्मचारी मौजूद नहीं दिखता।
शासन से ही मांग के अनुरूप टीकाकरण के लिए वैक्सीन की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। वैक्सीन मिलते ही टीकाकरण केंद्रों पर भेज कर जरूरतमंदों को वैक्सीन की बूस्टर डोज देने के लिए टीकाकरण कार्य शुरू कराया जाएगा।
डॉ. जयगोविंद, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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शनिवार को संक्रमण बढ़ने की आशंका के बीच इटियाथोक के दूबेपुरवा निवासी शंभूनाथ दूबे सीएमओ कार्यालय पर बने कोविड टीकाकरण काउंटर पर कोविशील्ड वैक्सीन की बूस्टर डोज लगवाने पहुंचे। वैक्सीन की उपलब्धता पूछने पर काउंटर पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि दादा पूरे प्रदेश में वैक्सीन की डोज नहीं है। काउंटर पर बूस्टर डोज लगवाने के लिए पहुंचे ऐसे ही तमाम जरूरतमंदों को वैक्सीन न होने के कारण हताश निराश वापस लौटना पड़ा।
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जिला अस्पताल के साथ ही कई सीएचसी व पीएचसी पर तो लोगों की पूछताछ से परेशान स्वास्थ्य कर्मियों ने अब कोविड टीकाकरण केंद्र का बैनर तक हटा दिया है। उनका कहना है कि बीते तीन माह से कोविड टीकाकरण में इस्तेमाल होने वाली कोविशील्ड व कोवैक्स वैक्सीन का स्टॉक पूरी तरह खत्म पड़ा है। ऐसे में संक्रमण से बचाव के लिए बूस्टर डोज अथवा छूटी हुई दूसरी डोज की खुराक लेने पहुंच रहे लोगों की पूछताछ से परेशान होकर ही टीकाकरण का बैनर हटाना पड़ा है।
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पांच लाख के इतर सिर्फ 3840 डोज
कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका से भयभीत लोग अब फिर से बचाव के लिए वैक्सीन की बूस्टर डोज लगवाने की कवायद में जुटने लगे हैं। जिले में 18 साल से अधिक आयु वाले 6,70,682 लोगों को बूस्टर डोज लगना थी लेकिन अभी तक मात्र 1,65,166 लोगों को ही वैक्सीन की बूस्टर डोज लग पाई है।
इसके बावजूद जिले में कोविशील्ड व कोवैक्स का स्टाक शून्य है जबकि कोवैक्सीन की मात्र 3840 डोज बची है। ऐसे में करीब पांच लाख लोग वैक्सीन की बूस्टर व छूटी हुई डोज लगवाने के लिए अस्पतालों की खाक छानने को विवश बने हैं। इसी लिए सीएमओ कार्यालय को छोड़कर अधिकांश टीकाकरण केंद्रों से अब टीकाकरण केंद्र का बैनर तक हटा लिया गया है।
अस्पतालों में हेल्प डेस्क व प्रोटोकॉल दोनों गायब
कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे की आशंका के बाद भी इसकी रोकथाम में जुटे स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अस्पतालों में ही सतर्कता पूरी तरह हाशिए पर है। इसके चलते ही कोविड प्रोटोकाल के बावजूद जिला अस्पताल से सीएचसी व पीएचसी में हेल्थ डेस्क के साथ मास्क लगाने व सोशल डिस्टेंसिंग कायम सभी कुछ नदारद है। काउंटर के बाहर बैनर लटकाकर कोविड हेल्प डेस्क की खानापूर्ति तो कर दी गई लेकिन वहां तापमान की जांच करने व कोरोना नियमों की जानकारी देने वाला कर्मचारी मौजूद नहीं दिखता।
शासन से ही मांग के अनुरूप टीकाकरण के लिए वैक्सीन की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। वैक्सीन मिलते ही टीकाकरण केंद्रों पर भेज कर जरूरतमंदों को वैक्सीन की बूस्टर डोज देने के लिए टीकाकरण कार्य शुरू कराया जाएगा।
डॉ. जयगोविंद, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी