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बहू-बेटे से परेशान मां-बाप ने लगाई इच्छामृत्यु की गुहार
Updated Wed, 26 Jul 2017 11:48 PM IST
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बहू-बेटे से परेशान मां-बाप ने लगाई इच्छा मृत्यु की गुहार
ढाई साल पहले तत्कालीन डीएम ने किया था मामले का निस्तारण
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। अपने सबसे छोटे बेटे और उसकी बहू की प्रताडना से आजिज आकर एक दंपती ने जिला अधिकारी को शिकायतीपत्र देकर इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है। इस मामला का निस्तारण एक बार पहले तत्कालीन जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय कर चुके हैं। लेकिन तत्कालीन डीएम के फैसले से नाखुश परिवार ने एक बार फिर से इस मामले की गुहार जिलाधिकारी जेबी सिंह के जनता दर्शन में की है।
मामला शहर के स्टेशन रोड स्थित मोहल्ला छेदीपुरवा का है। यहां रहने वाले श्याम बिहारी मिश्र (76) व उनकी पत्नी शांती देवी (70) ने एक लिखित शिकायत जिलाधिकारी जेबी सिंह के जनता दर्शन में की है। श्याम बिहारी के मुताबिक उनका छोटा बेटा और बहू आरती वर्मा उन्हें आए दिन प्रताड़ित करते हैं। छेदीपुरवा मोहल्ले में उसका खुद का बनाया गया 400 वर्गफिट का एक मकान है। जिसमें उसका छोटा बेटा और बहू रहते हैं। वर्ष 2014 से लगातार उनकी बहू उनके बेटे के सहयोग से उन्हें प्रताड़ित करती आ रही है। जिसकी गुहार उन्होंने जिला प्रशासन में लगाई। लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर वह हाईकोर्ट भी गए। जहां से जिलाधिकारी को मामले के निस्तारण के लिए निर्देशित किया गया। लेकिन जिला प्रशासन की ओर से उनके मामले में कोई ऐसी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे कि उनके बहू-बेटे की हरकतों पर अंकुश लग सके।
साल भर पहले उसकी ओर से वरिष्ठ नागरिक के तौर पर मामले की शिकायत वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण अधिनियम में भी की गई। लेकिन कुछ नहीं हुआ। जिसके बाद पीड़ित दम्पत्ति ने शासन-प्रशासन को उसकी शिकायत के निस्तारण में अक्षम मानते हुए डीएम के जनता दर्शन में शिकायतीपत्र देकर इच्छामृत्यु की गुहार लगाई है। गौरतलब है कि वर्ष 2014 में तत्कालीन डीएम अजय कुमार उपाध्याय ने उपजिलाधिकारी सदर की जांच रिपोर्ट के आधार पर जिस तरह से पूरे मामले का निस्तारण किया था। उसमें पूरे मामले को आपसी मुनमुटाव के कारण आर्थिक रूप से विपन्न पुत्र रामसुहावन व उसकी पत्नी आरती को मकान से बेदखल करने की बात थी। जिसे क्षेत्राधिकार से बाहर की बात होना बताकर शिकायतकर्ता को बेदखली के लिए सक्षम न्यायालय में जाने के लिए कहा गया था।
ढाई साल पहले तत्कालीन डीएम ने किया था मामले का निस्तारण
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। अपने सबसे छोटे बेटे और उसकी बहू की प्रताडना से आजिज आकर एक दंपती ने जिला अधिकारी को शिकायतीपत्र देकर इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है। इस मामला का निस्तारण एक बार पहले तत्कालीन जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय कर चुके हैं। लेकिन तत्कालीन डीएम के फैसले से नाखुश परिवार ने एक बार फिर से इस मामले की गुहार जिलाधिकारी जेबी सिंह के जनता दर्शन में की है।
मामला शहर के स्टेशन रोड स्थित मोहल्ला छेदीपुरवा का है। यहां रहने वाले श्याम बिहारी मिश्र (76) व उनकी पत्नी शांती देवी (70) ने एक लिखित शिकायत जिलाधिकारी जेबी सिंह के जनता दर्शन में की है। श्याम बिहारी के मुताबिक उनका छोटा बेटा और बहू आरती वर्मा उन्हें आए दिन प्रताड़ित करते हैं। छेदीपुरवा मोहल्ले में उसका खुद का बनाया गया 400 वर्गफिट का एक मकान है। जिसमें उसका छोटा बेटा और बहू रहते हैं। वर्ष 2014 से लगातार उनकी बहू उनके बेटे के सहयोग से उन्हें प्रताड़ित करती आ रही है। जिसकी गुहार उन्होंने जिला प्रशासन में लगाई। लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर वह हाईकोर्ट भी गए। जहां से जिलाधिकारी को मामले के निस्तारण के लिए निर्देशित किया गया। लेकिन जिला प्रशासन की ओर से उनके मामले में कोई ऐसी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे कि उनके बहू-बेटे की हरकतों पर अंकुश लग सके।
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साल भर पहले उसकी ओर से वरिष्ठ नागरिक के तौर पर मामले की शिकायत वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण अधिनियम में भी की गई। लेकिन कुछ नहीं हुआ। जिसके बाद पीड़ित दम्पत्ति ने शासन-प्रशासन को उसकी शिकायत के निस्तारण में अक्षम मानते हुए डीएम के जनता दर्शन में शिकायतीपत्र देकर इच्छामृत्यु की गुहार लगाई है। गौरतलब है कि वर्ष 2014 में तत्कालीन डीएम अजय कुमार उपाध्याय ने उपजिलाधिकारी सदर की जांच रिपोर्ट के आधार पर जिस तरह से पूरे मामले का निस्तारण किया था। उसमें पूरे मामले को आपसी मुनमुटाव के कारण आर्थिक रूप से विपन्न पुत्र रामसुहावन व उसकी पत्नी आरती को मकान से बेदखल करने की बात थी। जिसे क्षेत्राधिकार से बाहर की बात होना बताकर शिकायतकर्ता को बेदखली के लिए सक्षम न्यायालय में जाने के लिए कहा गया था।
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