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Gonda News: इमारतें शिखर पर, व्यवस्थाएं गर्त में
Sun, 22 Feb 2026 12:17 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 22 Feb 2026 12:17 AM IST
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गोंडा। करीब 283 करोड़ रुपये की लागत से बने मेडिकल कॉलेज की इमारतें भले भव्य-नव्य हों, लेकिन व्यवस्थाएं गर्त में हैं। ओपीडी में लंबी कतारें, वार्ड में दवाओं का संकट और बाहर की महंगी दवाओं का बोझ, यह सब मिलकर मरीजों के जख्मों पर नमक छिड़क रहा है।
मेडिकल वार्ड में भर्ती जुगुनू को सांस लेने में तकलीफ है।
18 फरवरी से 21 फरवरी के बीच इलाज में 4,950 रुपये खर्च हो गए। तीमारदार ने कराहते हुए कहा, 5,000 रुपये लेकर आया था, अब सिर्फ 50 रुपये बचे हैं। अधिकांश दवाएं और इंजेक्शन बाहर से खरीदनी पड़ी हैं। सरकारी अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद दवाओं के लिए मेडिकल स्टोर की दौड़ ने परिवार की कमर तोड़ दी है। इसी वार्ड में भर्ती राममनोहर यादव के बेटे रमेश यादव ने कहा कि अभी तो भर्ती किए हैं, इलाज शुरू भी नहीं हुआ। 550 रुपये की दवाएं बाहर से लानी पड़ीं।
मुफ्त दवाओं पर भी सुविधा शुल्क का आरोप : मरीज सुनील के तीमारदार गिरधारी ने आरोप लगाया कि 24 घंटे के भीतर 830 रुपये की दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ीं। इतना ही नहीं, सरकारी दवाएं दिलाने के नाम पर दो बार 300-300 रुपये सुविधा शुल्क भी देना पड़ा।
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मेडिकल वार्ड में भर्ती जुगुनू को सांस लेने में तकलीफ है।
18 फरवरी से 21 फरवरी के बीच इलाज में 4,950 रुपये खर्च हो गए। तीमारदार ने कराहते हुए कहा, 5,000 रुपये लेकर आया था, अब सिर्फ 50 रुपये बचे हैं। अधिकांश दवाएं और इंजेक्शन बाहर से खरीदनी पड़ी हैं। सरकारी अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद दवाओं के लिए मेडिकल स्टोर की दौड़ ने परिवार की कमर तोड़ दी है। इसी वार्ड में भर्ती राममनोहर यादव के बेटे रमेश यादव ने कहा कि अभी तो भर्ती किए हैं, इलाज शुरू भी नहीं हुआ। 550 रुपये की दवाएं बाहर से लानी पड़ीं।
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मुफ्त दवाओं पर भी सुविधा शुल्क का आरोप : मरीज सुनील के तीमारदार गिरधारी ने आरोप लगाया कि 24 घंटे के भीतर 830 रुपये की दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ीं। इतना ही नहीं, सरकारी दवाएं दिलाने के नाम पर दो बार 300-300 रुपये सुविधा शुल्क भी देना पड़ा।
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