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Gonda News: घटते जलस्तर से कटान तेज, 200 बीघा जमीन समाई
Wed, 10 Sep 2025 11:38 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 10 Sep 2025 11:38 PM IST
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कटान करती सरयू नदी।
करनैलगंज/विश्नोहरपुर। सरयू नदी के लगातार घट रहे जलस्तर से कटान तेजी हो रही है। मैदानी इलाकों में कटान से खेत व खाली पड़ी जमीन नदी में समा रही है। ग्राम बहुवन मदार मांझा, मांझा रायपुर, बेहटा, पारा, घरकुइयां के सामने कटान तेज है। नवाबगंज के साकीपुर चहलावा, शुक्लपुरवा व बाड़ी माझा में कटान ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
सरयू नदी के बारे में कहा जाता है कि घटते समय कटान शुरू होता है। राम सहाय, धुनई, मुंशीलाल आदि का कहना है कि करीब छह किलोमीटर की लंबाई और पांच सौ मीटर की चौड़ाई में कटान से सैकड़ों किसानों की 200 बीघे से अधिक जमीन काटकर नदी ने दो दिनों में अपनी धारा में परिवर्तित कर दिया है। सबसे अधिक कटान पारा व बेहटा के पास है। उसके बाद बहुवन मदार मांझा के पास भी खेत कट चुका है।
नदी का जलस्तर बुधवार को खतरे के निशान से 24 सेंटीमीटर नीचे और डिस्चार्ज करीब 2 लाख 87 हजार क्यूसेक रहा है। अभी जलस्तर घटने का अनुमान बताया गया है। सरयू का जलस्तर घटने से माझा क्षेत्र के गांवों में आवागमन सामान्य हो चुका है लेकिन ब्योंदा माझा गांव अब भी प्रभावित है। गांव पूरी तरह बाढ़ की जद में है। लोगों के घर सुरक्षित हैं लेकिन, कई मजरे पानी की चपेट में हैं। मुख्य मार्ग पर अब भी पानी भरा हुआ है। लोग नाव से आवागमन कर गुजर बसर कर रहे हैं।
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बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज कुमार आर्य का कहना है कि बांध के आसपास कटान रोकने के सारे उपाय किए गए हैं। मैदानी इलाकों में कटान को नहीं रोका जा सकता है। जलस्तर घट रहा है।
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सरयू नदी के बारे में कहा जाता है कि घटते समय कटान शुरू होता है। राम सहाय, धुनई, मुंशीलाल आदि का कहना है कि करीब छह किलोमीटर की लंबाई और पांच सौ मीटर की चौड़ाई में कटान से सैकड़ों किसानों की 200 बीघे से अधिक जमीन काटकर नदी ने दो दिनों में अपनी धारा में परिवर्तित कर दिया है। सबसे अधिक कटान पारा व बेहटा के पास है। उसके बाद बहुवन मदार मांझा के पास भी खेत कट चुका है।
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नदी का जलस्तर बुधवार को खतरे के निशान से 24 सेंटीमीटर नीचे और डिस्चार्ज करीब 2 लाख 87 हजार क्यूसेक रहा है। अभी जलस्तर घटने का अनुमान बताया गया है। सरयू का जलस्तर घटने से माझा क्षेत्र के गांवों में आवागमन सामान्य हो चुका है लेकिन ब्योंदा माझा गांव अब भी प्रभावित है। गांव पूरी तरह बाढ़ की जद में है। लोगों के घर सुरक्षित हैं लेकिन, कई मजरे पानी की चपेट में हैं। मुख्य मार्ग पर अब भी पानी भरा हुआ है। लोग नाव से आवागमन कर गुजर बसर कर रहे हैं।
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बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज कुमार आर्य का कहना है कि बांध के आसपास कटान रोकने के सारे उपाय किए गए हैं। मैदानी इलाकों में कटान को नहीं रोका जा सकता है। जलस्तर घट रहा है।