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धान खरीद ठप, 10 हजार किसान बेबस

Wed, 28 Dec 2016 10:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 28 Dec 2016 10:57 PM IST
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10 thousand farmers helpless
चावल - फोटो : AmarUjala
सरकारी एजेंसियों ने धान खरीद लगभग ठप कर दी है। कारण, राइस मिलर्स ने लागत न निकलने का बहाना कर धान की कुटाई करने से हाथ खड़े कर दिये हैं। ऐसे में क्रय केंद्रों पर धान डंप पड़ा है। राइस मिलर्स के धान न लेने पर उसकी उठान नहीं हो रही है।
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इसके कारण क्रय केंद्रों पर धान खरीद लगभग ठप हो गई है। जिले में धान खरीद एजेंसियों को लगभग 50 हजार मीट्रिक टन खरीद लक्ष्य मिला है। इसके सापेक्ष अब तक सिर्फ करीब 600 मीट्रिक टन ही खरीद हो सकी है। 10 हजार किसान धान बेचने के लिए क्रय केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं।
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मजबूरी में वे बिचौलियों को औनेपौने दाम में धान बेच रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से मंडी परिसर में धान खरीद के लिए तीन सरकारी केंद्र खोले गये हैं। एक केंद्र खाद्य रसद विभाग, दूसरा भारतीय खाद्य निगम व तीसरा पीसीएफ का है। सभी एजेन्सियों के क्रय केंद्र पर सन्नाटा है।
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राइस मिलर्स व शासन प्रशासन की रार में किसान धान को बेचने में लुट गये। राइस मिलर्स ने परता न आने के बहाने सरकारी काम करने से हाथ खड़े कर दिये, जिससे खरीद केंद्रों पर धान डंप होने से क्रय एजेन्सियों को धान न खरीदने का बहाना मिल गया। राइस मिलर्स व जिला प्रशासन की नूराकुश्ती का फायदा बिचौलिये उठा रहे हैं। 

लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 1.20 फीसदी हुई खरीद       
क्रय एजेन्सियां          क्रय केंद्र          खरीद लक्ष्य          खरीद                  
खाद्य विभाग             08                   15000                  304.64           
पीसीएफ                 52                  29000                    150.62             
यूपी एग्रो                 01                    4000                     16.70            
एफसीआई              01                     1600                    125.48              
कुल -                        62                   49600                    597.44          
नोट - धान खरीद व लक्ष्य की मात्रा मीट्रिक टन में है। सभी एजेंसियों की ओर से मिलर्स को डिलवरी शून्य है।      

‘बिचौलियों को धान न बेचे तो क्या करें’
धान की उचित मूल्य पर बिक्री न होने से किसान काफी नाराज हैं। मंडी में धान बेचने आये किसान राम कुमार दूबे का कहना है कि इस समय एक-एक पैसे को तरस रहे हैं। ऐसे में उन्होंने अपना धान व्यापारी को 900 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेच दिया है। ग्राम भदुआतरहर के किसान शत्रोहन यादव ने बताया कि पैसे की जरूरत थी इसलिए उन्होंने अपना आठ क्विंटल धान व्यापारी को 1000 रुपये प्रति क्विंटल के रेट में बेच दिया। किसान सुभाष सिंह ने बताया कि बिचौलियों को धान न बेचे तो क्या करें।     

परता न आने पर कुटाई का कार्य प्रभावित
राइस मिलर्स ने इस साल धान कुटाई के सरकारी काम को ठेंगा दिखा दिया है। सूत्रों की माने तो प्राइवेट धान कुटाई कर अच्छा लाभ काम गया लेकिन इस बाबत कोई भी राइस मिलर्स बोलने को तैयार नहीं है। एक कारोबारी का कहना था कि परता न आने से सरकारी धान की कुटाई नहीं की जा रही है। एक क्विंटल धान में 67 प्रतिशत चावल की मात्रा नहीं निकल पा रही है।


राइस मिलर्स कर रहे छूट का इंतजार
क्रय केंद्रों पर खरीदा गया धान डंप पड़ा है। राइस मिलर्स की ओर से बैंक गारंटी आज तक नहीं दी गई है। जिला प्रशासन की ओर से सभी राइस मिलर्स को नोटिस जारी कर कार्रवाई की चेतावनी दी जा चुकी है। राइस मिलर्स धान कुटाई में परता न आने की बात कह कर शासन की ओर से सीएमआर की गुणवत्ता में कुछ छूट मिलने का इंतजार कर रहे हैं।       
- विक्रम सिंह, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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