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महिला रसोइयों ने बीएसए कार्यालय का किया घेराव
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Wed, 21 Sep 2016 11:51 PM IST
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रसोइया संघ के बैनर तले बुधवार को मिड-डे मील योजना में कार्यरत महिला रसोइयों ने अपनी 13 सूत्रीय मांगों के समर्थन में जिला बेसिक कार्यालय का घेराव किया। इस मौके पर पूर्व ब्लॉक प्रमुख और संरक्षिका चंदा यादव ने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारी महिला रसोइयों के धैर्य की परीक्षा न ले। उन्होंने अधिकारियों पर महिलाओं के उत्पीड़न और शोषण का आरोप लगाते कहा कि महिलाओं के हितों के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों की शिकायत मुख्यमंत्री से की जाएगी।
उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से रसोईयों का मानदेय एक हजार से बढ़ाकर आठ हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग की। कहा कि सरकार मिड-डे-मिल में कार्यरत महिलाओं के साथ भेद-भाव कर रही है। शिक्षा विभाग 30 रुपये प्रतिदिन अनियमित भुगतान कर महिलाओं के साथ बंधुआ मजदूर जैसा व्यवहार कर रही है। जिलाध्यक्ष सुगंती कुशवाहा ने कहा कि रसोइयों की प्रति वर्ष नियुक्ति प्रथा एवं नवीनीकरण के नाम पर महिलाओं का मानसिक शोषण किया जा रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकांश अध्यापक मिड-डे मील के हेराफेरी में व्यस्त है।
कर्तव्यों के प्रति जवाबदेह नहीं है। इसके कारण दिन पर दिन विद्यालय में बच्चों की संख्या कम हो रही है। जिसका ठिकरा महिला रसोईयों के उपर फोड़ कर रसोईयों को निष्कासित करने का कुचक्र रचा जा रहा है। जिसे रसोइया संघ बर्दाश्त नहीं करेगा। महासचिव ललिता देवी ने कहा कि यदि महिलाओं की समस्याओं का समाधान शिक्षा विभाग नहीं निकालेगा तो आगे की निर्णायक लड़ाई को महिलाएं मजबूर होगी। कहा कि मिड-डे मील में अधिकांश महिलाएं दलित तबके की है। शिक्षा विभाग इन महिलाओं के समस्याओं के समाधान संवेदनशील नहीं है।
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इस मौके पर मालती देवी, पुष्पा देवी, कुसुम, माया, धीरजा, बुचिया, सुभावती, धरमशीला, पुनम, ऊषा, तैमूननिशा, लिलावती, इमीरती, आशा, सावित्री, मीरा, दयमंती, सुमित्रा, अतवारी, कौशल्या, पुनम, कमली, निर्मला, उमरावती, रेखा, परवीन, नजमा आदि मौजूद रहीं। संचालन मुन्नी खातुन ने किया।
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उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से रसोईयों का मानदेय एक हजार से बढ़ाकर आठ हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग की। कहा कि सरकार मिड-डे-मिल में कार्यरत महिलाओं के साथ भेद-भाव कर रही है। शिक्षा विभाग 30 रुपये प्रतिदिन अनियमित भुगतान कर महिलाओं के साथ बंधुआ मजदूर जैसा व्यवहार कर रही है। जिलाध्यक्ष सुगंती कुशवाहा ने कहा कि रसोइयों की प्रति वर्ष नियुक्ति प्रथा एवं नवीनीकरण के नाम पर महिलाओं का मानसिक शोषण किया जा रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकांश अध्यापक मिड-डे मील के हेराफेरी में व्यस्त है।
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कर्तव्यों के प्रति जवाबदेह नहीं है। इसके कारण दिन पर दिन विद्यालय में बच्चों की संख्या कम हो रही है। जिसका ठिकरा महिला रसोईयों के उपर फोड़ कर रसोईयों को निष्कासित करने का कुचक्र रचा जा रहा है। जिसे रसोइया संघ बर्दाश्त नहीं करेगा। महासचिव ललिता देवी ने कहा कि यदि महिलाओं की समस्याओं का समाधान शिक्षा विभाग नहीं निकालेगा तो आगे की निर्णायक लड़ाई को महिलाएं मजबूर होगी। कहा कि मिड-डे मील में अधिकांश महिलाएं दलित तबके की है। शिक्षा विभाग इन महिलाओं के समस्याओं के समाधान संवेदनशील नहीं है।
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इस मौके पर मालती देवी, पुष्पा देवी, कुसुम, माया, धीरजा, बुचिया, सुभावती, धरमशीला, पुनम, ऊषा, तैमूननिशा, लिलावती, इमीरती, आशा, सावित्री, मीरा, दयमंती, सुमित्रा, अतवारी, कौशल्या, पुनम, कमली, निर्मला, उमरावती, रेखा, परवीन, नजमा आदि मौजूद रहीं। संचालन मुन्नी खातुन ने किया।