Umesh Pal Murder Case: सदाकत खान का गाजीपुर कनेक्शन आया सामने, ग्रामीण बोले- यकीन ही नहीं हो रहा
सूबे की सरकार में कोहराम मचा देने वाले प्रयागराज दोहरे हत्याकांड में सदाकत खान की गिरफ्तारी से उसके गाजीपुर स्थित गांव में हलचल है। सदाकत आखिर अपराधियों के संपर्क में कैसे आया इस सवाल को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
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प्रयागराज में बीते दिनों उमेश पाल हत्याकांड की प्लानिंग करने में गाजीपर के बारा गांव निवासी युवक सदाकत खान की गोरखपुर से हुई गिरफ्तारी के बाद गांव में सनसनी फैल गई है। दरअसल, सदाकत इलाहबाद हाईकोर्ट में वकालत करता है। वो प्रयागराज स्थित मुस्लिम हॉस्टल के कमरे में रहता था।
यूपी पुलिस एसटीएफ प्रमुख और अपर पुलिस महानिदेशक, आईपीएस अमिताभ यश ने इसकी पुष्टि की कि उमेश हत्याकांड की योजना को अंतिम रूप दिए जाने की अहम बैठकें सदाकत के कमरे पर ही हुई थीं। सूबे की सरकार में कोहराम मचा देने वाले प्रयागराज दोहरे हत्याकांड में सदाकत खान की गिरफ्तारी से उसके गांव में हलचल है।
सदाकत के पिता दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड
सदाकत आखिर अपराधियों के संपर्क में कैसे आया इस सवाल को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। गांव में सदाकत की किसी से कभी कोई विवाद तक नहीं हुआ और ना ही उस पर कोई मुकदमा है। सदाकत संपन्न और शरीफ परिवार से है। ऐसे में ग्रामीणों को यकीन ही नहीं हो रहा कि सदाकत का कैसे उमेश पाल डबल मर्डर से लिंक हो सकेगा।
सदाकत के पिता शमशाद खान दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। सदाकत इलाहबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ का नेता भी रह चुका है। इस संबंध में गहमर कोतवाल पवन कुमार उपाध्याय ने बताया कि सदाकत की गिरफ्तारी के संबंध में फिलहाल कोतवाली में कोई जानकारी नहीं आई है। जानकारी आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पूछताछ में सदाकत ने उगले राज!
भले ही इस डबल मर्डर की प्लानिंग क्यों न जेल में बनी हो। मगर उसके बाद उमेश पाल को कत्ल करने के अंतिम रूप दिए जाने वाली बैठकों में से अधिकांश बैठकें इसी सदाकत के प्रयागराज स्थित मुस्लिम हॉस्टल वाले कमरे में हुई थीं। इस बात को गिरफ्तारी के बाद खुद सदाकत ने ही कबूला है।
उमेश पाल की हत्या के विरोध में वकीलों ने रखा मौन
गाजीपुर में बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सोमवार को उमेश पाल की हत्या के विरोध में शोकसभा का आयोजन कर मृत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित पत्रक तहसीलदार को सौंपा। एसोसिएशन के अध्यक्ष गोरखनाथ सिंह ने कहा कि अधिवक्ता श्रीकृष्ण कुमार पाल उर्फ उमेश पाल की दिन दहाड़े गोली मारकर नृशंस हत्या उनके घर पर कर दी गई।
इस हत्याकांड में उनके साथ-साथ उनके सुरक्षा कर्मी की भी हत्या कर दी गई। इस घटना से न केवल पुलिस एवं प्रशासन की लापरवाही दृष्टिगत होती है, बल्कि अधिवक्ताओं और आम जन के बीच शासन की छवि भी धूमिल हो रही है। उन्होंने मांग किया कि प्रदेश में जघन्य हत्या के शिकार अधिवक्ताओं के परिवार को सुरक्षा मुहैया कराते हुए परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी एवं उनके परिवार को कम से कम 20 लाख की आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए।