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Ghazipur News: ट्राॅमा सेंटर में तैनात होंगे दो आर्थोपेडिक सर्जन
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गाजीपुर। जिले के दो ट्राॅमा सेंटर बेहतर चिकित्सकीय सुविधाओं से लैस होंगे। शहर और मुहम्मदाबाद ट्राॅमा सेंटर में दो आर्थोपेडिक सर्जन तैनात होंगे। भदौरा में एक गायनेकोलॉजिस्ट की तैनाती होगी।
दुर्घटना में घायल एवं गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को तत्काल उपचार मुहैया कराने के लिए वर्ष 2016 में मुहम्मदाबाद और शहर के गोराबाजार स्थित सीएमओ कार्यालय परिसर में ट्राॅमा सेंटर का निर्माण शुरू हुआ। करीब एक-एक करोड़ की लागत से ट्राॅमा सेंटर बनकर तैयार हो गया। वर्ष 2020 के अक्तूबर में मुहम्मदाबाद ट्राॅमा सेंटर का लोकार्पण हुआ। यहां चिकित्सक के साथ स्वास्थ्यकर्मियों की भी तैनाती हुई लेकिन आर्थोपेडिक सर्जन की तैनाती नहीं हो सकी। ऐसे में दुर्घटना में घायल मरीजों को तत्काल उपचार नहीं मिल पा रहा था। करीब पांच वर्ष बाद गोराबाजार स्थित ट्राॅमा सेंटर सीएमओ डाॅ. एसके पांडेय के प्रयास से गत अप्रैल में संचालित हो गया लेकिन यहां भी आर्थोपेडिक सर्जन की तैनाती नहीं हो पाई थी। दोनों जगहों के लिए एक-एक आर्थोपेडिक सर्जन की तैनाती के लिए शासन ने ठोस कदम उठाए और दो विशेषज्ञों की तैनाती का निर्देश दिया। भदौरा सीएचसी पर लंबे समय से महिला रोग विशेषज्ञ की कमी बनी हुई थी। यहां के लिए भी शासन से गायनेकोलॉजिस्ट की तैनाती की गई है। सीएमओ डॉ. एसके पांडेय ने बताया कि दोनों ट्राॅमा सेंटर के लिए एक-एक आर्थोपेडिक सर्जन और सीएचसी भदौरा पर एक गायनेकोलॉजिस्ट की तैनाती की गई है। इनके आने से चिकित्सकीय सुविधाएं सुदृढ़ होंगी।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भदौरा में गायनेकोलॉजिस्ट की तैनाती होने से करीब 30 हजार आबादी को लाभ होगा। एक सीएचसी पर एक लाख की आबादी के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में महिला रोग से संबंधित मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा। दोनों ट्राॅमा सेंटरों पर आर्थोंपेडिक सर्जन की तैनाती से प्रतिदिन घायल और गंभीर मरीजों को लाभ मिलेगा।
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दुर्घटना में घायल एवं गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को तत्काल उपचार मुहैया कराने के लिए वर्ष 2016 में मुहम्मदाबाद और शहर के गोराबाजार स्थित सीएमओ कार्यालय परिसर में ट्राॅमा सेंटर का निर्माण शुरू हुआ। करीब एक-एक करोड़ की लागत से ट्राॅमा सेंटर बनकर तैयार हो गया। वर्ष 2020 के अक्तूबर में मुहम्मदाबाद ट्राॅमा सेंटर का लोकार्पण हुआ। यहां चिकित्सक के साथ स्वास्थ्यकर्मियों की भी तैनाती हुई लेकिन आर्थोपेडिक सर्जन की तैनाती नहीं हो सकी। ऐसे में दुर्घटना में घायल मरीजों को तत्काल उपचार नहीं मिल पा रहा था। करीब पांच वर्ष बाद गोराबाजार स्थित ट्राॅमा सेंटर सीएमओ डाॅ. एसके पांडेय के प्रयास से गत अप्रैल में संचालित हो गया लेकिन यहां भी आर्थोपेडिक सर्जन की तैनाती नहीं हो पाई थी। दोनों जगहों के लिए एक-एक आर्थोपेडिक सर्जन की तैनाती के लिए शासन ने ठोस कदम उठाए और दो विशेषज्ञों की तैनाती का निर्देश दिया। भदौरा सीएचसी पर लंबे समय से महिला रोग विशेषज्ञ की कमी बनी हुई थी। यहां के लिए भी शासन से गायनेकोलॉजिस्ट की तैनाती की गई है। सीएमओ डॉ. एसके पांडेय ने बताया कि दोनों ट्राॅमा सेंटर के लिए एक-एक आर्थोपेडिक सर्जन और सीएचसी भदौरा पर एक गायनेकोलॉजिस्ट की तैनाती की गई है। इनके आने से चिकित्सकीय सुविधाएं सुदृढ़ होंगी।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भदौरा में गायनेकोलॉजिस्ट की तैनाती होने से करीब 30 हजार आबादी को लाभ होगा। एक सीएचसी पर एक लाख की आबादी के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में महिला रोग से संबंधित मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा। दोनों ट्राॅमा सेंटरों पर आर्थोंपेडिक सर्जन की तैनाती से प्रतिदिन घायल और गंभीर मरीजों को लाभ मिलेगा।
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