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Ghazipur News: वजीफा पाकर वारविक विश्वविद्यालय, लंदन चलीं तृप्ति
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दो करोड़ 50 लाख की मिली प्रोत्साहन राशि, परिवार में हर्ष का माहौल
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। भांवरकोल ब्लाॅक के कुंडेसर गांव की बेटी तृप्ति सिंह ने अपने सपने की उड़ान भरते हुए लंदन के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय वारविक में प्रशिक्षण पाने के लिए आयोजित छात्रवृत्ति परीक्षा पास की है। अब वह छात्रवृत्ति की प्रोत्साहन राशि दो करोड़ 50 लाख रुपये से डॉक्टरेट प्रोग्राम का प्रशिक्षण लेंगी। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के बाद उनके परिवार में हर्ष का माहौल है।
बृजेश नरेन सिंह और अलका सिंह की पुत्री तृप्ति ने अपनी प्रतिभा और समर्पण के बल पर एक वैश्विक प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त की है। सोशियोलॉजी के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाली तृप्ति ने स्वच्छंद विकास के क्षेत्र में सात साल से अधिक का अनुभव प्राप्त किया है। जबकि उन्होंने केंद्रीय नीति अनुसंधान के साथ और एक वर्ष तक दिल्ली में यूनिसेफ के साथ काम किया है।
समाजशास्त्र में पूर्ण समर्पण ने क्षेत्र में उनकी पहचान छोड़ दी है। तृप्ति ने अपनी पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई मुंबई विश्वविद्यालय से कर गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। वहीं स्नातक की पढ़ाई से मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय से उन्हें विशिष्टता मिली है।
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तृप्ति की उपलब्धियां अन्य लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी है। कुंडेसर गांव और जिले की एकमात्र नागरिक के रूप में, तृप्ति की सफलता उनके साथियों के लिए आशा और आकांक्षा का प्रतीक है। उनकी स्थानीय समुदाय में उनकी यह उपलब्धि उम्मीद की किरण और प्रेरणा के रूप में चमक रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। भांवरकोल ब्लाॅक के कुंडेसर गांव की बेटी तृप्ति सिंह ने अपने सपने की उड़ान भरते हुए लंदन के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय वारविक में प्रशिक्षण पाने के लिए आयोजित छात्रवृत्ति परीक्षा पास की है। अब वह छात्रवृत्ति की प्रोत्साहन राशि दो करोड़ 50 लाख रुपये से डॉक्टरेट प्रोग्राम का प्रशिक्षण लेंगी। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के बाद उनके परिवार में हर्ष का माहौल है।
बृजेश नरेन सिंह और अलका सिंह की पुत्री तृप्ति ने अपनी प्रतिभा और समर्पण के बल पर एक वैश्विक प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त की है। सोशियोलॉजी के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाली तृप्ति ने स्वच्छंद विकास के क्षेत्र में सात साल से अधिक का अनुभव प्राप्त किया है। जबकि उन्होंने केंद्रीय नीति अनुसंधान के साथ और एक वर्ष तक दिल्ली में यूनिसेफ के साथ काम किया है।
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समाजशास्त्र में पूर्ण समर्पण ने क्षेत्र में उनकी पहचान छोड़ दी है। तृप्ति ने अपनी पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई मुंबई विश्वविद्यालय से कर गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। वहीं स्नातक की पढ़ाई से मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय से उन्हें विशिष्टता मिली है।
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तृप्ति की उपलब्धियां अन्य लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी है। कुंडेसर गांव और जिले की एकमात्र नागरिक के रूप में, तृप्ति की सफलता उनके साथियों के लिए आशा और आकांक्षा का प्रतीक है। उनकी स्थानीय समुदाय में उनकी यह उपलब्धि उम्मीद की किरण और प्रेरणा के रूप में चमक रही है।