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शादी के गीतों की जगह गूंजे रुदन के स्वर
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Mon, 21 Nov 2016 12:24 AM IST
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करंडा के ब्राह्मणपुरा सहित कई गांवों में खुशियों की बारात बदली आंसुओं की धार में
- फोटो : ghazipur
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किसी के सिर सेहरा सजने वाला था, तो कोई ननिहाल में पड़ी शादी की खुशियों में शामिल होने जा रहा था। हंसी और चुहलबाजियों के बीच इंदौर पटना एक्सप्रेस के यात्री रात में खाने के बाद सो गए थे कि रविवार को भोर में कानपुर देहात क्षेत्र के पुखरायां के पास कानफाडू आवाज के साथ सबकी नींद खुल गई।
बोगियां हिंडोले की तरह हिलीं। लगा जैसे भूचाल आ गया। चारों तरफ चीख पुकार मच गई। टूटी बोगियों में लोग पिस-से गए। सबकुछ उलट पलट गया। ट्रेन की बोगियां पटरी से दूर पड़ी थीं। इस हादसे जिले के आठ लोग काल कवलित हो गए । इसमें शादी के लिए आ रहे राकेश वर्मा समेत उनके परिवार के छह लोगों की मौत हो गई।
इंदौर में रह रहे राकेश वर्मा (22) की तिलक 26 नवंबर को और शादी तीन दिसंबर को होनी थी। 19 नवंबर को अपने गांव ब्राह्मणपुरा आने के लिए राकेश अपनी मां कौशल्या देवी, भाभी हेमवंती, भतीजी पूजा व आरोही और प्रतिमा वर्मा के साथ इंदौर-पटना एक्सप्रेस से रवाना हुआ था। पर किसे मालूम था कि वह वर यात्रा के लिए नहीं अंतिम यात्रा के लिए निकला है।
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हादसे की सूचना जैसे ही राकेश के गांव ब्राह्मणपुरा पहुंची। सभी स्तब्ध रह गए। उस घर में जहां कल रात तक नाच-गाना हो रहा था, वहां रुदन के स्वर फूटने लगे। जिस घर से बारात जाने वाली थी, जहां परिवारीजनों के आंखों में खुशी थी। हादसे के बाद उनकी आंखों से आंसुओं की धार बह रही थी। गांव में सन्नाटा पसर गया। जिसने भी सुना आह करके रह गया। उसके कदम बरबस राकेश के घर की ओर उठ गए।
इसी तरह रेवतीपुर थाना क्षेत्र के तिलवा गांव स्थित ननिहाल मेें पड़ी शादी में शामिल होने के लिए मुहम्मदाबाद कोतवाली के परसा गांव निवासी सौरभ राय, पिता कृपाशंकर राय, माता लक्ष्मी राय और बुआ इंद्रावती राय के साथ आ रहा था। मां-बाप का इकलौता पुत्र सौरभ राय को इंदौर से चलने पर पता नहीं था कि उसका यह अंतिम सफर होगा।
मध्यप्रदेश के पुलिस विभाग से दरोगा के पद से सेवानिवृत बहिरयाबाद थाना क्षेत्र के हिंगनपुर गांव निवासी शिवपूजन यादव पत्नी शांती देवी और परिवार के दो अन्य सदस्यों के साथ अपने बड़े भाई की पुत्री के शादी में शामिल होने घर आ रहे थे। लेकिन काल ने उनकी पत्नी शांति देवी को उनसे छीन लिया।
ट्रेन हादसे में जिले के आठ लोगों के मरने की जानकारी होते ही सभी की जुबा खामोश होकर इनके परिजनों पर पड़े दर्द की कल्पना करते हुए सिहर उठ रहे थे।
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बोगियां हिंडोले की तरह हिलीं। लगा जैसे भूचाल आ गया। चारों तरफ चीख पुकार मच गई। टूटी बोगियों में लोग पिस-से गए। सबकुछ उलट पलट गया। ट्रेन की बोगियां पटरी से दूर पड़ी थीं। इस हादसे जिले के आठ लोग काल कवलित हो गए । इसमें शादी के लिए आ रहे राकेश वर्मा समेत उनके परिवार के छह लोगों की मौत हो गई।
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इंदौर में रह रहे राकेश वर्मा (22) की तिलक 26 नवंबर को और शादी तीन दिसंबर को होनी थी। 19 नवंबर को अपने गांव ब्राह्मणपुरा आने के लिए राकेश अपनी मां कौशल्या देवी, भाभी हेमवंती, भतीजी पूजा व आरोही और प्रतिमा वर्मा के साथ इंदौर-पटना एक्सप्रेस से रवाना हुआ था। पर किसे मालूम था कि वह वर यात्रा के लिए नहीं अंतिम यात्रा के लिए निकला है।
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हादसे की सूचना जैसे ही राकेश के गांव ब्राह्मणपुरा पहुंची। सभी स्तब्ध रह गए। उस घर में जहां कल रात तक नाच-गाना हो रहा था, वहां रुदन के स्वर फूटने लगे। जिस घर से बारात जाने वाली थी, जहां परिवारीजनों के आंखों में खुशी थी। हादसे के बाद उनकी आंखों से आंसुओं की धार बह रही थी। गांव में सन्नाटा पसर गया। जिसने भी सुना आह करके रह गया। उसके कदम बरबस राकेश के घर की ओर उठ गए।
इसी तरह रेवतीपुर थाना क्षेत्र के तिलवा गांव स्थित ननिहाल मेें पड़ी शादी में शामिल होने के लिए मुहम्मदाबाद कोतवाली के परसा गांव निवासी सौरभ राय, पिता कृपाशंकर राय, माता लक्ष्मी राय और बुआ इंद्रावती राय के साथ आ रहा था। मां-बाप का इकलौता पुत्र सौरभ राय को इंदौर से चलने पर पता नहीं था कि उसका यह अंतिम सफर होगा।
मध्यप्रदेश के पुलिस विभाग से दरोगा के पद से सेवानिवृत बहिरयाबाद थाना क्षेत्र के हिंगनपुर गांव निवासी शिवपूजन यादव पत्नी शांती देवी और परिवार के दो अन्य सदस्यों के साथ अपने बड़े भाई की पुत्री के शादी में शामिल होने घर आ रहे थे। लेकिन काल ने उनकी पत्नी शांति देवी को उनसे छीन लिया।
ट्रेन हादसे में जिले के आठ लोगों के मरने की जानकारी होते ही सभी की जुबा खामोश होकर इनके परिजनों पर पड़े दर्द की कल्पना करते हुए सिहर उठ रहे थे।