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खुले में स्नान करने को छात्राएं विवश
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Thu, 05 May 2016 11:24 PM IST
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कस्तूबरा बालिका आवासीय विद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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जिले के सोलह में से चौदह विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय खोले गए हैं लेकिन उनमें बुनियादी सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा सकी हैं। हालत यह है कई विद्यालयों में स्नानागार तक नहीं बने हैं। छात्राओं को खुले में स्नान करना पड़ता है।
गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवार की बालिकाओं को बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की स्थापना की गई है। इन विद्यालयों में कुल सौ सीट निर्धारित है जिसमें 75 प्रतिशत सीट अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा, अल्पसंख्यक एवं 25 प्रतिशत सामान्य वर्ग के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की बालिकाओं को प्रवेश दिया जाता है।
शहर से सटे गंगा विशुनपुर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय सदर की स्थापना हुए तो वर्षों बीत गए लेकिन छात्राओं के लिए अभी भी स्नानागार की सुविधा मुहैया नहीं कराई जा सकी है। इस कारण छात्राएं चादर के घेरे में स्नान करने को बाध्य हैं। डारमेट्री छोटी होने के कारण सोने में छात्राओं को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। परिसर में लगी सोलर लाइट बेकार पड़ी है। इससे शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। विद्यालय में नामांकित सौ छात्राओं के सापेक्ष डेस्क-बेंच की कमी अखरती हैै। वार्डेन वंदना राय ने बताया कि इन समस्याओं की जानकारी विभागीय अधिकारियों को दी गई है।
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मरदह के कस्तूरबा गांधी विद्यालय में भी छात्राएं खुले आसमान के नीचे स्नान करने को विवश हैं। सरोज, कुमकुम, सोनम, अंजली, बबिता, जान्ह्वी, खुश्बू, अंजू, रूबीना, आरती, खुश्बू विश्वकर्मा, पूजा यादव ने बाथरूम बनवाने की मांग की है। इतना ही नहीं छात्राएं एवं अध्यापिकाएं एक ही हाल में सोती हैं, जिसकी फर्श टूटी हुई है। अतिरिक्त कक्ष में ब्लैकबोर्ड नहीं है। जेनरेटर है लेकिन कभी चलता नहीं। वार्डेन प्रेमा सिंह ने बताया कि बार-बार हालात सुधारने के लिए पत्र लिखा जाता है।
जमानिया हेतिमपुर गांव स्थित कस्तूरबा गांधी विद्यालय में लगे 48 पंखे में से 28 पंखे हैं। गंदे पानी की निकासी न होने से जलभराव होता है। इससे परिसर में दुर्गंध फैला है। खिड़की का शीशा टूटा रहने से गर्म हवा के चलते छात्राओं को परेशानी होती है। विद्यालय की वार्डेन संध्या ने बताया कि इस संबंध में अधिकारियों को अवगत कराया गया हैै।
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गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवार की बालिकाओं को बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की स्थापना की गई है। इन विद्यालयों में कुल सौ सीट निर्धारित है जिसमें 75 प्रतिशत सीट अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा, अल्पसंख्यक एवं 25 प्रतिशत सामान्य वर्ग के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की बालिकाओं को प्रवेश दिया जाता है।
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शहर से सटे गंगा विशुनपुर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय सदर की स्थापना हुए तो वर्षों बीत गए लेकिन छात्राओं के लिए अभी भी स्नानागार की सुविधा मुहैया नहीं कराई जा सकी है। इस कारण छात्राएं चादर के घेरे में स्नान करने को बाध्य हैं। डारमेट्री छोटी होने के कारण सोने में छात्राओं को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। परिसर में लगी सोलर लाइट बेकार पड़ी है। इससे शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। विद्यालय में नामांकित सौ छात्राओं के सापेक्ष डेस्क-बेंच की कमी अखरती हैै। वार्डेन वंदना राय ने बताया कि इन समस्याओं की जानकारी विभागीय अधिकारियों को दी गई है।
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मरदह के कस्तूरबा गांधी विद्यालय में भी छात्राएं खुले आसमान के नीचे स्नान करने को विवश हैं। सरोज, कुमकुम, सोनम, अंजली, बबिता, जान्ह्वी, खुश्बू, अंजू, रूबीना, आरती, खुश्बू विश्वकर्मा, पूजा यादव ने बाथरूम बनवाने की मांग की है। इतना ही नहीं छात्राएं एवं अध्यापिकाएं एक ही हाल में सोती हैं, जिसकी फर्श टूटी हुई है। अतिरिक्त कक्ष में ब्लैकबोर्ड नहीं है। जेनरेटर है लेकिन कभी चलता नहीं। वार्डेन प्रेमा सिंह ने बताया कि बार-बार हालात सुधारने के लिए पत्र लिखा जाता है।
जमानिया हेतिमपुर गांव स्थित कस्तूरबा गांधी विद्यालय में लगे 48 पंखे में से 28 पंखे हैं। गंदे पानी की निकासी न होने से जलभराव होता है। इससे परिसर में दुर्गंध फैला है। खिड़की का शीशा टूटा रहने से गर्म हवा के चलते छात्राओं को परेशानी होती है। विद्यालय की वार्डेन संध्या ने बताया कि इस संबंध में अधिकारियों को अवगत कराया गया हैै।