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Ghazipur News: प्रशिक्षक नहीं, खेल अनुदेशक करा रहे योग, उत्साह सिर्फ एक दिन

Sun, 21 Jun 2026 12:25 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2026 12:25 AM IST
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Sports instructors, not trainers, are providing yoga, enthusiasm only for one day
गाजीपुर। 21 जून को विश्व योग दिवस के मौके पर जिले भर में योग का उत्साह देखने लायक होता है। पार्कों, स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर हजारों लोग एक साथ योगाभ्यास करते हैं। जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी और आमजन योग के महत्व का संदेश देते नजर आते हैं। लेकिन यह उत्साह अक्सर एक दिन तक ही सीमित रह जाता है। योग दिवस बीतते ही अधिकांश स्थानों पर योग करने वालों की संख्या तेजी से घट जाती है और नियमित योग संस्कृति का अभाव साफ दिखाई देता है। इसकी बड़ी वजह प्रशिक्षित योग शिक्षकों की कमी और स्थायी व्यवस्थाओं का अभाव है। योग प्रशिक्षकों की जगह स्कूलों में तैनात खेल अनुदेशक ही योगाभ्यास कराते हैं। इनकी संख्या भी काफी कम है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश स्थानों पर नियमित योग केंद्र नहीं हैं, जबकि शहरों में भी योगाभ्यास के लिए व्यवस्थित और निरंतर कार्यक्रमों की कमी महसूस की जाती है।
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2266 परिषदीय विद्यालयों में महज 173 में ही खेल अनुदेशक
स्थिति का अंदाजा शिक्षा विभाग के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। जिले के 2266 परिषदीय विद्यालयों में केवल 173 स्कूलों में ही खेल अनुदेशक तैनात हैं। इन्हीं के माध्यम से समय-समय पर बच्चों को योग का प्रशिक्षण दिया जाता है। ऐसे में करीब 2.20 लाख छात्र-छात्राएं नियमित योग प्रशिक्षण से वंचित हैं। वहीं 28 राजकीय और 96 सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में 15,386 छात्र-छात्राओं के सापेक्ष केवल 15 खेल शिक्षक तैनात हैं। शहर के प्रमुख पार्कों में प्रतिदिन हजारों लोग सुबह टहलने पहुंचते हैं, लेकिन नियमित योगाभ्यास करने वालों की संख्या अपेक्षाकृत कम रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों की रुचि तो बढ़ी है, मगर प्रशिक्षित मार्गदर्शकों और सुविधाओं के अभाव में यह रुचि निरंतर अभ्यास में नहीं बदल पा रही है।
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क्यों नहीं बन पा रही नियमित योग संस्कृति
ब्लॉक और ग्राम स्तर पर योग केंद्रों का अभाव
प्रशिक्षित योग शिक्षकों की कमी
स्कूलों में नियमित योग सत्र नहीं
व्यस्त जीवनशैली और समय का अभाव
योग को आदत बनाने के लिए निरंतर प्रेरणा की कमी
योग दिवस के बाद जागरूकता कार्यक्रमों का ठहर जाना
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नियमित योग से ही मिलता है लाभ
गंगौली निवासी योग प्रशिक्षक सैय्यद सलमान का कहना है कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संतुलन का माध्यम है। प्रतिदिन 30 से 45 मिनट का योग तनाव कम करने, रक्तचाप नियंत्रित रखने, शरीर को लचीला बनाने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है। नियमित अभ्यास से जीवनशैली से जुड़ी कई बीमारियों के खतरे को भी कम किया जा सकता है।
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स्कूलों में नियमित तौर पर योगाभ्यास कराया जाता है। जिन स्कूलों में खेल अनुदेशक नहीं है, वहां इसकी जिम्मेदारी शिक्षकों को दी गई है।
-उपासना रानी वर्मा, बीएसए।

खेल शिक्षक सकूलों में नियमति तौर पर बच्चों को योग सिखाते है, जहां खेल शिक्षक नहीं है, वहां शिक्षकों के माध्यम से यह कार्य कराया जाता है।
--प्रकाश सिंह, डीआईओएस।
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