फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   senseless mother after missing two sons

कहवां हेराइ गइलें हमार ललवा.....

Fri, 05 Dec 2014 11:42 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर Updated Fri, 05 Dec 2014 11:42 PM IST
विज्ञापन
senseless mother after missing two sons
बहादुरगंज। 
विज्ञापन
मऊ के मानवरहित रेलवे क्रासिंग पर गुरुवार को तमसा पैसेंजर और स्कूल मैजिक से टक्कर में दो सगे भाइयों सुंदरम और कृष्णा की मौत से महिपालपुर गांव में गम की चादर तन गई है।

एक झटके में दो बच्चों को गंवाने वाली सुनीता देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। बिलखती मां हर किसी से कहवां हेराइ गइलें हमार ललवा..का सवाल दाग रही है। हादसे में गंभीर रूप से घायल उसका तीसरा बेटा शिवम अभी भी वाराणसी के बीएचयू में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। मुंबई में होने की वजह से पिता कमलेश यादव अपने दोनों बेटों को अंतिम बार देख भी नहीं सका।
कासिमाबाद विकास खंड के महिपालपुर गांव निवासी कमलेश यादव मुंबई में रहकर पावरलूम चलाता है। उसके तीन पुत्रों में सबसे बड़ा शिवम (8) दूसरे नंबर पर सुंदरम तथा कृष्णा (5) सबसे छोटा था। शिवम खुरहट स्थित एक स्कूल में कक्षा दो तथा उसका भाई सुंदरम कक्षा 1 में पढ़ता था।

दोनों स्कूल की मैजिक से ही आते-जाते थे। गुुरुवार को दोनों मैजिक पर सवार होकर हंसी-खुशी स्कूल के लिए निकले थे। इस दौरान छोटा भाई कृष्णा भी मैजिक पर सवार हो गया। लाख कोशिश के बावजूद वह नहीं उतरा। मां सुनीता को क्या पता था कि काल ही उसे खींच कर ले जा रही है।

 स्कूल पहुंचने के पहले ही मानवरहित रेलवे क्रासिंग पर बच्चों से भरी मैजिक-तमसा पैसेंजर से टकरा गई। इसमें छह मासूमों की जान चली गई जिसमें सुंदरम और कृष्णा की मौके पर ही मौत हो गई जबकि बड़ा भाई शिवम गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे इलाज के लिए बीएचयू में भर्ती कराया गया है।

मौत की खबर जैसे ही मां सुनीता को मिली, वह बेसुध हो गई। वह अपने कलेजे के टुकड़े सुंदरम और कृष्णा के लिए जहां बेहाल है वहीं तीसरे पुत्र शिवम की सलामती के लिए ऊपर वाले से दुआ कर रही है। मृतक बच्चों की बूढ़ी दादी लचिया देवी तथा दादा झगरू यादव को मानो काठ मार गया है।

वह कभी बिलखने लगते हैं तो कभी गुमसुम हो जा रहे हैं। गुुरुवार की रात में दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसके चलते पिता कमलेश अपने पुत्रों का अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाया। घटना की सूचना पर पिता कमलेश मुंबई से चल चुका है। परिवारीजनों को देर रात तक उसके घर पहुंचने की उम्मीद है।
इनसेट
ननिहाल में रह कर करते थे पढ़ाई
बहादुरगंज। महिपालपुर गांव निवासी कमलेश यादव की पत्नी अपने मायके रानीपुर विकासखंड के महासो गांव में रहकर अपने दोनों बच्चों सुंदरम और शिवम को पढ़ा रही थी। महासो गांव से ही दोनों स्कूल की मैजिक पर सवार हुए थे। दो पुत्रों की  मौत के बाद मां की आंखों में बुने सुनहरे सपने चकनाचूर हो गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed