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पुण्यतिथि पर याद किए गए जनेश्वर मिश्र
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Thu, 22 Jan 2015 11:25 PM IST
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समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र की पांचवी पुण्यतिथि पार्टी कार्यालय समता भवन पर गुरुवार को जिलाध्यक्ष राजेश कुशवाहा की अध्यक्षता में मनाई गई। इस मौके सपा के जिलाध्यक्ष राजेश कुशवाहा ने कहा कि जनेश्वर मिश्र ने हमेशा व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई लड़ी। वह एक महान समाजवादी नेता थे। उनके आदर्शों पर चलकर ही समाजवाद की जड़ों को मजबूत करना होगा।
उन्होंने कहा कि जनेश्वर जी के मन में बचपन से ही सामाजिक व्यवस्था में व्याप्त विसंगतियों के प्रति विद्रोह की भावना थी। उन्होंने छुआछूत के विरुद्ध जीवन पर्यन्त लड़ाई लड़ी और आंदोलन किया। कई बार केंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री रहने के बाद भी उनका रहन-सहन सामान्य रहा। आम लोगों से वह बगैर किसी बिना भेदभाव के मिलते-जुलते थे। सत्ता के लिए अपने उसूलों और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
वरिष्ठ नेता योगेंद्र राय ने स्व. मिश्र को समाजवाद की चलती-फिरती पाठशाला बताया। उनकी सोच हमेशा जमीनी हकीकत से जुड़ी रही। वह लोहिया के प्रबल समर्थक थे। कार्यक्रम की शुरुआत से पूर्व मौजूद नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए समाजवादी आंदोलन को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया। इस मौके पर पूर्व जिलाध्यक्ष रामधारी यादव, रामवृक्ष यादव, गुलाम कादिर राईनी, सूरजराम बागी, अरुण कुमार श्रीवास्तव, देवनाथ आदि उपस्थित थे।
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उन्होंने कहा कि जनेश्वर जी के मन में बचपन से ही सामाजिक व्यवस्था में व्याप्त विसंगतियों के प्रति विद्रोह की भावना थी। उन्होंने छुआछूत के विरुद्ध जीवन पर्यन्त लड़ाई लड़ी और आंदोलन किया। कई बार केंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री रहने के बाद भी उनका रहन-सहन सामान्य रहा। आम लोगों से वह बगैर किसी बिना भेदभाव के मिलते-जुलते थे। सत्ता के लिए अपने उसूलों और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
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वरिष्ठ नेता योगेंद्र राय ने स्व. मिश्र को समाजवाद की चलती-फिरती पाठशाला बताया। उनकी सोच हमेशा जमीनी हकीकत से जुड़ी रही। वह लोहिया के प्रबल समर्थक थे। कार्यक्रम की शुरुआत से पूर्व मौजूद नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए समाजवादी आंदोलन को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया। इस मौके पर पूर्व जिलाध्यक्ष रामधारी यादव, रामवृक्ष यादव, गुलाम कादिर राईनी, सूरजराम बागी, अरुण कुमार श्रीवास्तव, देवनाथ आदि उपस्थित थे।
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