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हजरत अली को याद किया
अमर उजाला ब्यूरो/ गाजीपुर
Updated Sun, 18 Jun 2017 11:17 PM IST
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हजरत अली के शहादत दिवस पर जुलूस निकालते मुस्लिम समुदाय के लोग।
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शहर के नखास स्थित इमामबाड़ा मीर अली हुसैन साहब से प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी 21 रमजान का प्राचीन जुलूस निकाला गया। सोजख्वानी जनाब अंसार हुसैन ने अपने विशेष अंदाज में हजरत अली के ऊपर पड़ी मुसीबतों का व्याख्यान किया। इसके बाद मुहम्मद अब्बास नकवी अमरोहा तथा तूषा गाजीपुरी ने कलाम पेश कर हजरत अली को याद किया।
जौनपुर से आए मौलाना फजले मुमताज खान ने मजलिस पढ़ते हुए हजरत अली के बारे में बताया कि न तो दूर से देखो, न ही गुरुर से देखो वरना अगर किसी को उपरोक्त कथन के साथ देखोगे तो हमेशा वह तुम्हे छोटा दिखाई देगा। कहा कि हजरत अली के उपरोक्त कथन से यह साबित होता है कि उन्होंने हमेशा दुनिया को समानता, एकरसता का उद्देश्य दिया।
उनके कहे हुए कथनों का संकलन नहजुल बलागा को सभी को पढ़ना चाहिए। दूसरी मजलिस जोहर की नमाज के बाद शुरू हुई। इसके बाद लखनऊ से आए मौलाना सैयद ऊरुजुल हसन मसीस ने मजलिस को पढ़ते हुए बताया कि हजरत अली को चाहने वाले 1400 साल से हजरत अली का गम मनाकर जुलूस निकालकर दुनिया को यह बताते हैं कि जुल्म का विरोध करो नहीं तो जुल्म और भी बढ़ता जाएगा।
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मजलिस के बाद ताबूत हजरत अली बरामद हुआ। अंजुमन मोहम्मदिया मोहम्मदपुर के साहबे नयाज बादशाह राही ने विशेष अंदाज में नौहा पढ़कर सभा को गमगीन बना दिया। तीसरी तकरीर क्रमश: मौलाना सैयद मुहम्मद रजा तथा शिया धर्म गुरु मौलाना तनवीरुल हसन जैनबी ने किया।
चौथी और पांचवी तकरीर शाहगंज से आए मौलाना अमीर हसन खान ने अली को एक उसूल वाला जंग करने वाला बताया। आखिरी और अंतिम तकरीर को मौलाना जाबिर अली जंगीपुरी ने किया। और बताया कि अली की शहादत से उनके बच्चे हसन, हुसैन, जैनब, अब्बास यतीम हो गए। पूरा शहर शोक में डूब गया।
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जौनपुर से आए मौलाना फजले मुमताज खान ने मजलिस पढ़ते हुए हजरत अली के बारे में बताया कि न तो दूर से देखो, न ही गुरुर से देखो वरना अगर किसी को उपरोक्त कथन के साथ देखोगे तो हमेशा वह तुम्हे छोटा दिखाई देगा। कहा कि हजरत अली के उपरोक्त कथन से यह साबित होता है कि उन्होंने हमेशा दुनिया को समानता, एकरसता का उद्देश्य दिया।
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उनके कहे हुए कथनों का संकलन नहजुल बलागा को सभी को पढ़ना चाहिए। दूसरी मजलिस जोहर की नमाज के बाद शुरू हुई। इसके बाद लखनऊ से आए मौलाना सैयद ऊरुजुल हसन मसीस ने मजलिस को पढ़ते हुए बताया कि हजरत अली को चाहने वाले 1400 साल से हजरत अली का गम मनाकर जुलूस निकालकर दुनिया को यह बताते हैं कि जुल्म का विरोध करो नहीं तो जुल्म और भी बढ़ता जाएगा।
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मजलिस के बाद ताबूत हजरत अली बरामद हुआ। अंजुमन मोहम्मदिया मोहम्मदपुर के साहबे नयाज बादशाह राही ने विशेष अंदाज में नौहा पढ़कर सभा को गमगीन बना दिया। तीसरी तकरीर क्रमश: मौलाना सैयद मुहम्मद रजा तथा शिया धर्म गुरु मौलाना तनवीरुल हसन जैनबी ने किया।
चौथी और पांचवी तकरीर शाहगंज से आए मौलाना अमीर हसन खान ने अली को एक उसूल वाला जंग करने वाला बताया। आखिरी और अंतिम तकरीर को मौलाना जाबिर अली जंगीपुरी ने किया। और बताया कि अली की शहादत से उनके बच्चे हसन, हुसैन, जैनब, अब्बास यतीम हो गए। पूरा शहर शोक में डूब गया।