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पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष सहित तीन को उम्रकैद
अमर उजाला ब्यूरो /गाजीपुर
Updated Mon, 13 Feb 2017 10:09 PM IST
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तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश गैंगेस्टर एक्ट क्षीतिज कुमार श्रीवास्तव की अदालत में सोमवार को सुनवाई के बाद सादात मेें हुए सत्येंद्र यादव हत्याकांड के मामले में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष सहित तीन लोगों को आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई गई। जबकि साक्ष्य के अभाव में पांच आरोपियों को बरी कर दिया गया।
सादात थाना क्षेत्र के कस्बा सादात वार्ड नंबर नौ निवासी धर्मेंद्र यादव पुत्र श्याम बिहारी यादव ने एक दिसंबर 2012 को तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह विनय कुमार यादव पुत्र अमरदेव यादव निवासी भीमापार एवं सत्येंद्र यादव उर्फ रिंकू के साथ सुबह नौ बजे कृपाकर यादव के घर के सामने कुर्सी पर बैठे थे। रिंकू यादव पास की दूकान पर जलेबी लाने गया था। वह दूकान के पास पहुंचा ही था कि अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी। मुड़ कर देखे तो सत्येंद्र यादव जहां बैठे थे, वहीं गोली चल रही थी। श्रवण कुमार यादव, प्रदीप यादव और पूर्व चेयरमैन राजनाथ यादव ने गोली मारी थी और एक आदमी काली पल्सर पर सवार होकर फरार हो गया। जिसको पहचाना नहीं जा सका। राजनाथ यादव चिल्लाते हुए कहने लगा कि पिछली बार की तरह बचने न पाए। इसी बीच प्रदीप यादव ने हम लोगों की तरफ फायर करते हुए असलहा तान दिया। हम लोग डर कर पीछे हट गए, तो देखा कि सत्येंद्र की लाइसेंसी पिस्टल हमलावर लूट लिए और उनको गोली मार दी।
तहरीर के आधार पर श्रवण कुमार यादव, प्रदीप कुमार यादव और राजनाथ यादव पुत्रगण परमा यादव एवं एक अज्ञात के विरूद्ध भादवि की धारा 302 एवं 394 के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज की गई है। विवेचना के दौरान उपरोक्त अभियुक्तों के अलावा अमन कुमार सिंह पुत्र हृदय नरायन सिंह, जितेंद्र जायसवाल पुत्र सुबास जायसवाल निवासी सैदपुर तथा वाराणसी निवासी आशुतोष त्रिपाठी पुत्र ओमप्रकाश, संतोष यादव पुत्र विक्रमा यादव एवं रोहित उर्फ शनी सिंह पुत्र अशोक सिंह का नाम प्रकाश में आया। शनि सिंह की वाराणसी में पुलिस से मुठभेड़ के दौरान इनकाउंटर हो गया। शेष आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया है।
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विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह यादव दस गवाह पेश किए। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष का तर्क सुनने के बाद अदालत ने अनूप कुमार सिंह, जितेंद्र जायसवाल, रोशन गुप्ता, आशुतोष त्रिपाठी और संतोष यादव पर आरोप साबित न होने के कारण उन्हें सभी आरोपों से दोष मुक्त कर दिया गया। जबकि श्रवण कुमार यादव, प्रदीप यादव और पूर्व चेयरमैन राजनाथ यादव को धारा 302 में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड, धारा 404 के अंतर्गत श्रवण यादव को दो वर्ष का कारावास और 2000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। श्रवण कुमार यादव और प्रदीप यादव को आयुद्ध अधीनियम के तहत तीन-तीन साल का सश्रम कारावास और तीन-तीन हजार रुपये का अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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सादात थाना क्षेत्र के कस्बा सादात वार्ड नंबर नौ निवासी धर्मेंद्र यादव पुत्र श्याम बिहारी यादव ने एक दिसंबर 2012 को तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह विनय कुमार यादव पुत्र अमरदेव यादव निवासी भीमापार एवं सत्येंद्र यादव उर्फ रिंकू के साथ सुबह नौ बजे कृपाकर यादव के घर के सामने कुर्सी पर बैठे थे। रिंकू यादव पास की दूकान पर जलेबी लाने गया था। वह दूकान के पास पहुंचा ही था कि अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी। मुड़ कर देखे तो सत्येंद्र यादव जहां बैठे थे, वहीं गोली चल रही थी। श्रवण कुमार यादव, प्रदीप यादव और पूर्व चेयरमैन राजनाथ यादव ने गोली मारी थी और एक आदमी काली पल्सर पर सवार होकर फरार हो गया। जिसको पहचाना नहीं जा सका। राजनाथ यादव चिल्लाते हुए कहने लगा कि पिछली बार की तरह बचने न पाए। इसी बीच प्रदीप यादव ने हम लोगों की तरफ फायर करते हुए असलहा तान दिया। हम लोग डर कर पीछे हट गए, तो देखा कि सत्येंद्र की लाइसेंसी पिस्टल हमलावर लूट लिए और उनको गोली मार दी।
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तहरीर के आधार पर श्रवण कुमार यादव, प्रदीप कुमार यादव और राजनाथ यादव पुत्रगण परमा यादव एवं एक अज्ञात के विरूद्ध भादवि की धारा 302 एवं 394 के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज की गई है। विवेचना के दौरान उपरोक्त अभियुक्तों के अलावा अमन कुमार सिंह पुत्र हृदय नरायन सिंह, जितेंद्र जायसवाल पुत्र सुबास जायसवाल निवासी सैदपुर तथा वाराणसी निवासी आशुतोष त्रिपाठी पुत्र ओमप्रकाश, संतोष यादव पुत्र विक्रमा यादव एवं रोहित उर्फ शनी सिंह पुत्र अशोक सिंह का नाम प्रकाश में आया। शनि सिंह की वाराणसी में पुलिस से मुठभेड़ के दौरान इनकाउंटर हो गया। शेष आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया है।
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विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह यादव दस गवाह पेश किए। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष का तर्क सुनने के बाद अदालत ने अनूप कुमार सिंह, जितेंद्र जायसवाल, रोशन गुप्ता, आशुतोष त्रिपाठी और संतोष यादव पर आरोप साबित न होने के कारण उन्हें सभी आरोपों से दोष मुक्त कर दिया गया। जबकि श्रवण कुमार यादव, प्रदीप यादव और पूर्व चेयरमैन राजनाथ यादव को धारा 302 में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड, धारा 404 के अंतर्गत श्रवण यादव को दो वर्ष का कारावास और 2000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। श्रवण कुमार यादव और प्रदीप यादव को आयुद्ध अधीनियम के तहत तीन-तीन साल का सश्रम कारावास और तीन-तीन हजार रुपये का अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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