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मालिनी अवस्थी ने गरीब फूला को लिया गोद
संवाददाता, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Tue, 09 Dec 2014 11:27 PM IST
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सात साल की छोटी उम्र में फूला ने क्या खोया,
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क्या पाया ये शायद उतना मायने नहीं रखता है जितना कि ये कि अब उसकी दुनिया
सतरंगी होगी। पैदा होते ही मां को तथा बाद में बाप को खो देने वाली फूला
इसी छोटी सी उम्र में बेचे जाने का दर्द भी झेल चुकी है।
ऐसे में ‘उदयन’ के संस्थापक अजीत सिंह के प्रयासों से ईंट-भट्ठे से वापस लाई गई फूला को मंगलवार को प्रख्यात लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने नया नाम देते हुए गोद लिया।
इसे वक्त की करवट या सामाजिक सोच और सरोकार का बेहतर नमूना कह लें कि मुसहर वर्ग में पैदा होने और मां-बाप को खोने के बाद भी फूला पहले अजीत के अजेय विचारों सा धर्मपिता और अब मालिनी की मानसी बनकर ‘उदयन’ में खिलखिला रही है।
लगभग दो माह पहले ईंट-भट्ठे पर नन्हें-नन्हें हाथों से ईंट ढोती, दुबली सी फूला (मुसहर बच्ची) ने अपने हाथों की लकीरों को नहीं देखा था। न ही उसे जानने वाले ही समझ पाए होंगे कि महज कुछ ही दिनों बाद उसकी तकदीर बदलने वाली है। मूलत: जौनपुर जिले के कुकड़हा गांव की रहने वाली
फूला की मां की उसके पैदा होने के कुछ दिनों बाद मौत हो गई। लगभग छह माह बाद पिता भी लापता हो गया। फूला को दूर के रिश्तेदारों ने पाला-पोसा। गरीबी और अभावों की वजह से फूला के पालकों ने उसे एक ईंट-भट्ठे पर बेच दिया। ऐसे में मुसहर बच्चों के
उत्थान के लिए चलने वाले ‘उदयन’ के संस्थापक अजीत सिंह को फूला के बारे में जानकारी मिली। उसके पालकों और भट्ठा मालिक से अनुरोध कर लगभग एक पखवाड़े पहले वे फूला
को माहपुर स्थित ‘उदयन’ ले आए। ऐसे में सोशल साइट के जरिए जब मालिनी अवस्थी को इसका पता चला तो उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का फैसला लिया और
अजीत सिंह से फूला के सभी खर्चों को वहन करने की इच्छा जताई। इसी क्रम में वे मंगलवार को माहपुर गांव पहुंची और फूला को नया नाम मानसी दिया।
भोजपुरी लोकगीत की प्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने कहा कि शिक्षा विकास की मूल धुरी है। ऐसे में तमाम सरकारी प्रयास के बाद भी कई वर्गों का अशिक्षित रहना सामाजिक व्यवस्था में कोढ़ के समान है। रंग, जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव मानव संस्कृति को चिढ़ाती है।
ऐसे में सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में एक व्यक्ति के प्रयासों से ऐसी सामाजिक संस्था का गठन और सामाजिक हितों का बेहतर प्रयास अनुकरणीय है। मंगलवार को माहपुर में स्वयंसेवी की ओर से उपेक्षित बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए चलाई जा रही शिक्षण संस्था ‘उदयन’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम को
संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए ‘उदयन’ के बारे में जानकारी पाकर वह इसके संरचना और प्रयासों को देखने का लोभ रोक नहीं पाई। संस्था द्वारा समाज के उपेक्षित
वर्ग के बच्चों की शिक्षा और अन्य दी जा रही सुविधाएं समाज को प्रेरणा देगी। संस्था के प्रमुख अजीत सिंह ने उदयन के बारे में बताया। कार्यक्रम का संचालन यशवीर सिंह ने किया।
ऐसे में ‘उदयन’ के संस्थापक अजीत सिंह के प्रयासों से ईंट-भट्ठे से वापस लाई गई फूला को मंगलवार को प्रख्यात लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने नया नाम देते हुए गोद लिया।
इसे वक्त की करवट या सामाजिक सोच और सरोकार का बेहतर नमूना कह लें कि मुसहर वर्ग में पैदा होने और मां-बाप को खोने के बाद भी फूला पहले अजीत के अजेय विचारों सा धर्मपिता और अब मालिनी की मानसी बनकर ‘उदयन’ में खिलखिला रही है।
लगभग दो माह पहले ईंट-भट्ठे पर नन्हें-नन्हें हाथों से ईंट ढोती, दुबली सी फूला (मुसहर बच्ची) ने अपने हाथों की लकीरों को नहीं देखा था। न ही उसे जानने वाले ही समझ पाए होंगे कि महज कुछ ही दिनों बाद उसकी तकदीर बदलने वाली है। मूलत: जौनपुर जिले के कुकड़हा गांव की रहने वाली
फूला की मां की उसके पैदा होने के कुछ दिनों बाद मौत हो गई। लगभग छह माह बाद पिता भी लापता हो गया। फूला को दूर के रिश्तेदारों ने पाला-पोसा। गरीबी और अभावों की वजह से फूला के पालकों ने उसे एक ईंट-भट्ठे पर बेच दिया। ऐसे में मुसहर बच्चों के
उत्थान के लिए चलने वाले ‘उदयन’ के संस्थापक अजीत सिंह को फूला के बारे में जानकारी मिली। उसके पालकों और भट्ठा मालिक से अनुरोध कर लगभग एक पखवाड़े पहले वे फूला
को माहपुर स्थित ‘उदयन’ ले आए। ऐसे में सोशल साइट के जरिए जब मालिनी अवस्थी को इसका पता चला तो उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का फैसला लिया और
अजीत सिंह से फूला के सभी खर्चों को वहन करने की इच्छा जताई। इसी क्रम में वे मंगलवार को माहपुर गांव पहुंची और फूला को नया नाम मानसी दिया।
भोजपुरी लोकगीत की प्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने कहा कि शिक्षा विकास की मूल धुरी है। ऐसे में तमाम सरकारी प्रयास के बाद भी कई वर्गों का अशिक्षित रहना सामाजिक व्यवस्था में कोढ़ के समान है। रंग, जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव मानव संस्कृति को चिढ़ाती है।
ऐसे में सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में एक व्यक्ति के प्रयासों से ऐसी सामाजिक संस्था का गठन और सामाजिक हितों का बेहतर प्रयास अनुकरणीय है। मंगलवार को माहपुर में स्वयंसेवी की ओर से उपेक्षित बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए चलाई जा रही शिक्षण संस्था ‘उदयन’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम को
संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए ‘उदयन’ के बारे में जानकारी पाकर वह इसके संरचना और प्रयासों को देखने का लोभ रोक नहीं पाई। संस्था द्वारा समाज के उपेक्षित
वर्ग के बच्चों की शिक्षा और अन्य दी जा रही सुविधाएं समाज को प्रेरणा देगी। संस्था के प्रमुख अजीत सिंह ने उदयन के बारे में बताया। कार्यक्रम का संचालन यशवीर सिंह ने किया।