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Ghazipur News: जनपद में 428 स्थानों पर विराजेंगी मां दुर्गा, शहर में बनेंगे सबसे अधिक पंडाल

Sun, 24 Sep 2023 11:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 24 Sep 2023 11:57 PM IST
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Maa Durga will sit at 428 places in the district, maximum number of pandals will be built in the city.
फोटो-
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-शक्ति आराधना के महापर्व नवरात्र की अब दिखने लगी तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। शक्ति आराधना के महापर्व नवरात्र की तैयारी अब दिखने लगी है। इस बार जनपद में 428 स्थानों पर मां दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित होंगी। हालांकि इनमें नौ ऐसे स्थान हैं, जहां पहले से ही स्थाई रूप से मां की मूर्ति स्थापित है। आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक पूजन पंडाल शहर कोतवाली क्षेत्र में होंगे। जबकि इस मामले में सैदपुर 36, करीमुद्दीनपुर में 27,करंडा, मरदह थाना क्षेत्र में 23-23 स्थानों पर पूजन पंडाल बनाए जाएंगे। वहीं, त्योहार के मद्दनेजर पुलिस प्रशासन भी तैयारी में जुट गए हैं।
नवरात्र के नौ दिनों में भक्तजन, देवी की अराधना और पूजा करते है। मान्यता है कि देवी की पूजा से सभी बिगड़े काम बन जाते है। इस बार नवरात्र 15 अक्तूबर से शुरू हो रहा है, जिसके मद्देनजर तैयारी तेज हो गई है। रौजा, महराजगंज समेत कई स्थानों पर दूसरे प्रांतों के कारीगर आ गए हैं, जो देवी-देवताओं की मूर्तियां तैयार करने में लगे हैं।
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वहीं, पूजन समितियां भी पंडाल सजाने की तैयारी में जुट गई हैं। पुलिस प्रशासन भी अपने स्तर से इसे देखते हुए यह सुनिश्चित कराने में लगा है कि कहीं कोई नई परंपरा नहीं शुरू हो पाए। साथ ही कहां-कहां कितने स्थानों पर पूजन पंडाल स्थापित होंगे। पुलिस विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक इस बार जनपद में 428 स्थानों पर पूजन समितियां पंडाल बनाएंगी। इनमें नौ स्थान ऐसे हैं, जहां पहले से ही मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित है। सबसे अधिक भीड़ मां कामाख्या धाम गहमर में होने की संभावना है। वहीं, पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने भी सभी पूजन समितियों से अपील किया गया है कि वे सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की कोशिश करें। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में आठ हजार से अधिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
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40 वर्षों से बंगाल से आकर दुर्गा प्रतिमा बना रहे हैं सजल
गाजीपुर। जनपद में इस बार भी दुर्गा प्रतिमा बनाने के लिए बंगाल से कारीगर आए हुए हैं। इनमें हुगली निवासी सजल कोलेल भी शामिल हैं, जो 40 वर्ष की से मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने के लिए जनपद में आते हैं। वह दावा करते है कि उनके परिवार के लोगों ने ही जनपद में आकर मूर्ति बनाने का काम शुरू किया।
अपने फूफा मुनींद्रनाथ पाल से मूर्ति बनाने की कला सीखने वाल सजल के मुताबिक वह 17 वर्ष की उम्र से ही मूर्ति बनाने के लिए गाजीपुर रौजा गौशाला आने लगे थे। पहले साल 10-15 मूर्तियां बनती थी, लेकिन, धीरे-धीरे मूर्तियां बनने की संख्या बढ़ती गई। इस समय लगभग 50 मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं। इस समय 8 मूर्ति कलाकारों बनाने वालों के साथ खुद को भी लगना पड़ता है, तब जाकर मूर्ति का काम पूरा होता है।

सजल कोलेल बताया कि कुछ लोग अपनी मूर्ति का आर्डर देते हैंऔर कुछ मूर्तियां बिना आर्डर किया अपने मन से बनाते हैं मूर्तियों के ऊंचाई और सजावट में अंतर होता है जो जैसी मूर्ति होती है, जितना जिसमें खर्च होता है उसी के अनुसार यह लोग मूर्ति का दाम तय करते हैं।
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