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तर्पण और पिंडदान कर पितरों को िकया विदा
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sat, 01 Oct 2016 12:29 AM IST
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तर्पण और पिंडदान कर पितरों को िकया विदा
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पितृ विसर्जन के अंतिम दिन अमावस्या को जनपद के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने गंगा मैया में डुबकी लगाकर पितरों को तर्पण और पिंड दान कर विदा किया। इसी के साथ श्राद्ध संपन्न हो गए। शुक्रवार को सुबह से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही। गंगा में स्नान करने के उपरांत श्रद्धालु ददरी घाट, महादेवा घाट, शीशनाथ घाट और कलेक्टर घाट पहुंचे।
सुबह से दोपहर तक जगह-जगह पितृ श्राद्ध, तर्पण और पितृ शांति के कर्मकांड किए गए। दोपहर के समय श्रद्धालुओं ने अपने घरों में ब्राह्मण भोजन कराकर पितरों को विदाई दी। गंगा के घाटों पर श्राद्ध करने वालों का तांता सुबह से दोहपर तक चलता रहा। आलम यह रहा कि कई जगह नदी तट पर भीड़ होने से घाट के आस-पास पिंड दान किया गया।
जिला मुख्यालय स्थित गंगा नदी के साथ ही बेसो, गांगी, मगई, टोंस सहित अन्य सहायक नदियों के तटों पर भी श्राद्ध कर्म करने के लिए आने वाले लोगों की काफी भीड़ लगी थी। श्रद्धालु पितृ श्राद्ध करने के लिए पहुंचे और पिंडदान भी किया। जबकि इस दिन कर्मकांड करने वालों के यहां भी दोपहर बाद तक भीड़ जमी हुई थी। लोगों ने गंगा स्नान करने के बाद पितरों को तर्पण कर पिंडदान किया। घाटों पर आचार्यों ने विधिवत कर्मकांड कराया।
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इससे हिंदू रीति-रिवाज के तहत कर्मकांड करने वाले लोगों ने बाल मुड़वाया। पितरों और पूर्वजों को समर्पित पितृ पक्ष के दौरान तर्पण का विशेष महत्व होता है।
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सुबह से दोपहर तक जगह-जगह पितृ श्राद्ध, तर्पण और पितृ शांति के कर्मकांड किए गए। दोपहर के समय श्रद्धालुओं ने अपने घरों में ब्राह्मण भोजन कराकर पितरों को विदाई दी। गंगा के घाटों पर श्राद्ध करने वालों का तांता सुबह से दोहपर तक चलता रहा। आलम यह रहा कि कई जगह नदी तट पर भीड़ होने से घाट के आस-पास पिंड दान किया गया।
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जिला मुख्यालय स्थित गंगा नदी के साथ ही बेसो, गांगी, मगई, टोंस सहित अन्य सहायक नदियों के तटों पर भी श्राद्ध कर्म करने के लिए आने वाले लोगों की काफी भीड़ लगी थी। श्रद्धालु पितृ श्राद्ध करने के लिए पहुंचे और पिंडदान भी किया। जबकि इस दिन कर्मकांड करने वालों के यहां भी दोपहर बाद तक भीड़ जमी हुई थी। लोगों ने गंगा स्नान करने के बाद पितरों को तर्पण कर पिंडदान किया। घाटों पर आचार्यों ने विधिवत कर्मकांड कराया।
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इससे हिंदू रीति-रिवाज के तहत कर्मकांड करने वाले लोगों ने बाल मुड़वाया। पितरों और पूर्वजों को समर्पित पितृ पक्ष के दौरान तर्पण का विशेष महत्व होता है।