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गुरु तेग बहादुर का शहीदी पर्व मनाया गया
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sun, 04 Dec 2016 10:58 PM IST
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गुुरु तेग बहादुर
- फोटो : social media
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गुरु तेग बहादुरजी का शहीदी पर्व रविवार को शहर के महाजनटोली स्थित गुरुद्वारा में मनाया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने गुरु के चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित किया।
इस मौके पर सरदार दर्शन सिंह ने कहा कि गुरुतेग बहादुरजी आनंदपुर साहब में विराजमान थे। उस समय औरंगजेब ने यह फतवा जारी किया कि किसी के माथे पर तिलक और शरीर में जनेऊ नहीं रहना चाहिए जो जनेऊ और तिलक का परित्याग कर इस्लाम धर्म कबूल न करे, उसे कत्ल कर दिया जाए। इससे कश्मीर के ब्राह्मणों पर अत्याचार होने लगा तो गुरुतेग बहादुर जी के पास आए और अपनी रक्षा के लिए उनसे पुकार की। इस पर गुरुतेग बहादुर जी ने कहा कि जाकर औरंगजेब से कह दो कि हमारे गुरु गुरुतेग बहादुर जी हैं। यदि वह इस्लाम धर्म अपना लेंगे तो हम लोग भी उनके साथ हो लेंगे। उसी समय औरंगजेब ने अपने सिपहसलारों को भेजकर गुरुतेग बहादुर को गिरफ्तार करवा लिया और तरह-तरह का प्रलोभन एवं कष्ट देने लगा, लेकिन गुरुतेग बहादुर ने एक भी बात नहीं मानी और औरंगजेब से कहा कि हिंदू धर्म की रक्षा और जनेऊ की रक्षा करने के लिए अगर कुर्बानी देनी पड़े तो वह सहर्ष तैयार हैं। इस प्रकार उन्हें 11 नवंबर 1675 को चांदनी चौक में शहीद कर दिया गया। कहा कि आज गुरुतेग बहादुर जी का शहीदी पर्व हमें यह याद दिलाता है कि हिंदू धर्म की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार का बलिदान देना हो तो सभी को तैयार रहा चाहिए। इस अवसर पर सभी सत्संग द्वारा गुरु का पाठ किया गया। इसके बाद प्रसाद का वितरण किया गया। इस मौके पर मनजीत सिंह, चरनजीत सिंह, डाबी सरदार, लालबहादुर सिंह, त्रिलोचन सिंह, कामता प्रसाद आदि उपस्थित थे।
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इस मौके पर सरदार दर्शन सिंह ने कहा कि गुरुतेग बहादुरजी आनंदपुर साहब में विराजमान थे। उस समय औरंगजेब ने यह फतवा जारी किया कि किसी के माथे पर तिलक और शरीर में जनेऊ नहीं रहना चाहिए जो जनेऊ और तिलक का परित्याग कर इस्लाम धर्म कबूल न करे, उसे कत्ल कर दिया जाए। इससे कश्मीर के ब्राह्मणों पर अत्याचार होने लगा तो गुरुतेग बहादुर जी के पास आए और अपनी रक्षा के लिए उनसे पुकार की। इस पर गुरुतेग बहादुर जी ने कहा कि जाकर औरंगजेब से कह दो कि हमारे गुरु गुरुतेग बहादुर जी हैं। यदि वह इस्लाम धर्म अपना लेंगे तो हम लोग भी उनके साथ हो लेंगे। उसी समय औरंगजेब ने अपने सिपहसलारों को भेजकर गुरुतेग बहादुर को गिरफ्तार करवा लिया और तरह-तरह का प्रलोभन एवं कष्ट देने लगा, लेकिन गुरुतेग बहादुर ने एक भी बात नहीं मानी और औरंगजेब से कहा कि हिंदू धर्म की रक्षा और जनेऊ की रक्षा करने के लिए अगर कुर्बानी देनी पड़े तो वह सहर्ष तैयार हैं। इस प्रकार उन्हें 11 नवंबर 1675 को चांदनी चौक में शहीद कर दिया गया। कहा कि आज गुरुतेग बहादुर जी का शहीदी पर्व हमें यह याद दिलाता है कि हिंदू धर्म की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार का बलिदान देना हो तो सभी को तैयार रहा चाहिए। इस अवसर पर सभी सत्संग द्वारा गुरु का पाठ किया गया। इसके बाद प्रसाद का वितरण किया गया। इस मौके पर मनजीत सिंह, चरनजीत सिंह, डाबी सरदार, लालबहादुर सिंह, त्रिलोचन सिंह, कामता प्रसाद आदि उपस्थित थे।
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