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गांव ही नहीं शहरी इलाके भी बाढ़ से घिरे
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Tue, 23 Aug 2016 11:15 PM IST
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बाढ़
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ग्रामीण क्षेत्रों की कौन कहे, शहर के कई इलाके भी बाढ़ की जद में आ गए हैं। किसी मार्ग पर घुटने भर, तो किसी पर कमर भर बाढ़ का पानी लगा हुआ है। पानी के बीच से एक तरफ पैदल आवागमन करने वाले किसी तरह हिलते-डुलते निकल रहे है। कई बाइक सवार पानी में गिरते देखे गए। 240 गांवों में सैकड़ों मकान बाढ़ से घिरे हुए हैं। ज्यादातर गांवों में अभी तक नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। लोग किसी तरह जान जोखिम में डाल घरों तक पहुंच रहे हैं। लोगों को पानी के बीच से आना-जाना पड़ रहा है। गंगा के जलस्तर में वृद्धि अभी भी थम नहीं है। प्रतिघंटे आधा सेंटीमीटर पानी बढ़ रहा है। लोग बाढ़ की ताजा स्थिति जानने के लिए टीवी चैनलों केसाथ ही समाचार पत्रों से इसकी जानकारी ले रहे हैं। उधर ओडिशा से आई एनडीआरएफ की टीम बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने में जुटी है। केंद्रीय जल आयोग के हरिनाथ ने बताया कि शाम चार बजे तक गंगा का जलस्तर 64.960 मीटर दर्ज किया गया। नदी एक सेंटीमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ रही है।
गंगा का रौद्र रूप देख लोगों की आंखे खुली की खुली रह जा रही हैं। तटवर्ती इलाकों का आलम यह है कि जिधर भी नजर जा रही है, उधर पानी ही पानी के साथ तबाही दिखाई दे रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों मार्ग पर बाढ़ का पानी लगने से आवागमन ठप हो गया है, जिससे एक गांव से दूसरे गांव संपर्क कट गया है। लोगों का आने-जाने के लिए एकमात्र नाव की सहारा रह गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के बाढ़ प्रभावित इलाकों में एक तरफ जहां लोगों की जिंदगी पूरी तरह से ठहर गई है। वहीं गंगा मइया की नाराजगी खामियाजा शहर के कई इलाकों के लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है।
शहर के तुलसियाका पुल, टेढ़ाबाजार, नवाबगंज, लकड़ी का टाल, झुन्नूलाल का चौराहा, स्टीमरघाट, कचहरी मार्ग, जिलाधिकारी आवाज, शासत्रीनगर मार्ग और नखास मार्ग पर बाढ़ का पानी लगा हुआ है। पानी के पास पहुंचते ही एक तरफ जहां पैदल आवागमन करने वालों के पाव थम जा रहे हैं, वहीं बाइक सवारों के ब्रेक लग जा रहे हैं। नवाबगंज में बाढ़ के पानी से गुजरने के दौरान दो बाइक सवार गिर पड़े। साइलेंसर में पानी घुसने से कई लोगों को मोटरसाइकलें बंद हो गईं। किसी तरह से बाइक सवार ढकेलकर पानी से पार हुए। बच्चों को पानी में घुसकर स्कूल आना-जाना पड़ा।
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खानपुर संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में गोमती नदी के किनारे के तेतारपुर, गौरहट, गौरी, गोरखा, नुरुद्दीनपुर, अमेहता, सिधौना, सूर्यभानचक, मल्लाह टोला, खरौना, कुसहीं, हथौड़ा, पटना, गोपालपुर, हथौड़ी आदि गांव बाढ़ की भीषण विभीषिका से जूझ रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है चारे के अभाव में पशुओं का पेट भरने की समस्या खड़ी हो गई है। न ही शासन-प्रशासन ही हम लोगों की सुधि ले रहा है न ही जनप्रतनिधि।
सुहवल संवाददाता के अनुसार बाढ़ से राहत मिलने की संभावना नहीं दिखाई दे रही है। पानी घटने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है। रेवतीपुर थाना भी बाढ के पानी से डूब चूका है जिसके चलते थाना बाल विकास परियोजना केन्द्र में स्थानान्तरित कर दिया गया है। बलुआ टोला स्थित हरिजन बस्ती पूरी तरह बाढ के पानी से डूब चूकी है। लोग अपना आसियाना छोड़ सुरक्षित जगहों पर चले गये है। गंगबरार दियरा इलाके में सैकडों रिहायशी पक्के मकान, सिरहायशी झोपडियां से घिरी हुई है। कई लोग अभी भी दियरा में जानवरों के साथ फंसे हुये है। हमीद सेतु के किनारे राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों तरफ मेदनीपुर एवं कालूपुर, सुजानपुर का पूरा दियारा के साथ ही हसनपुरा, नसीरपुर, बीरऊपुर, रामपुर, टौंगा, गोपालपुर, डेढगावां, उधरनपुर, डोहला, तिलवां, मलसा, भगीरथपुर, डुहियां, कासीमपुर, बहलोलपुर, ताडीघाट, मेदनीपुर, कालूपुर, युवराजपुर, रामपुर, पटकनियां, कल्यानपुर, गोपालपुर तिलवां, बडौरा, डारीडीह, बेमुआ, पटखौलियां, ताडीघाट मल्लाह बस्ती पूरी तरह पानी से घिरे हुए है। दूर-दूर तक केवल पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। इसको लेकर ग्रामीणों में भय समाया हुआ है। सुहवल के रामपुर के प्रधान राकेश राय, हसनपुरा के पूर्व प्रधान दीनबंधु राय, गोपालपुर के धर्मेंद्र यादव, तिलवां के मुन्ना यादव, टौंगा के आकाश खरवार, पकडी के राम सिंह, कल्यानपुर के लालमन यादव आदि ने बताया कि पूरा इलाका जलमग्न हो चुका है। सैकड़ों लोग अभी दियरा में अपने डेरे पर घिरे है। प्रशासन अभी तक राहत के नाम पर केवल कुछ नाव की व्यवस्था ही कर सका है। राहत- सामाग्री तो दूर की बात है। राहत केंद्र एवं शरणालय केवल शो-पीश बन कर रह गये है।
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गंगा का रौद्र रूप देख लोगों की आंखे खुली की खुली रह जा रही हैं। तटवर्ती इलाकों का आलम यह है कि जिधर भी नजर जा रही है, उधर पानी ही पानी के साथ तबाही दिखाई दे रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों मार्ग पर बाढ़ का पानी लगने से आवागमन ठप हो गया है, जिससे एक गांव से दूसरे गांव संपर्क कट गया है। लोगों का आने-जाने के लिए एकमात्र नाव की सहारा रह गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के बाढ़ प्रभावित इलाकों में एक तरफ जहां लोगों की जिंदगी पूरी तरह से ठहर गई है। वहीं गंगा मइया की नाराजगी खामियाजा शहर के कई इलाकों के लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है।
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शहर के तुलसियाका पुल, टेढ़ाबाजार, नवाबगंज, लकड़ी का टाल, झुन्नूलाल का चौराहा, स्टीमरघाट, कचहरी मार्ग, जिलाधिकारी आवाज, शासत्रीनगर मार्ग और नखास मार्ग पर बाढ़ का पानी लगा हुआ है। पानी के पास पहुंचते ही एक तरफ जहां पैदल आवागमन करने वालों के पाव थम जा रहे हैं, वहीं बाइक सवारों के ब्रेक लग जा रहे हैं। नवाबगंज में बाढ़ के पानी से गुजरने के दौरान दो बाइक सवार गिर पड़े। साइलेंसर में पानी घुसने से कई लोगों को मोटरसाइकलें बंद हो गईं। किसी तरह से बाइक सवार ढकेलकर पानी से पार हुए। बच्चों को पानी में घुसकर स्कूल आना-जाना पड़ा।
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खानपुर संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में गोमती नदी के किनारे के तेतारपुर, गौरहट, गौरी, गोरखा, नुरुद्दीनपुर, अमेहता, सिधौना, सूर्यभानचक, मल्लाह टोला, खरौना, कुसहीं, हथौड़ा, पटना, गोपालपुर, हथौड़ी आदि गांव बाढ़ की भीषण विभीषिका से जूझ रहे हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है चारे के अभाव में पशुओं का पेट भरने की समस्या खड़ी हो गई है। न ही शासन-प्रशासन ही हम लोगों की सुधि ले रहा है न ही जनप्रतनिधि।
सुहवल संवाददाता के अनुसार बाढ़ से राहत मिलने की संभावना नहीं दिखाई दे रही है। पानी घटने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है। रेवतीपुर थाना भी बाढ के पानी से डूब चूका है जिसके चलते थाना बाल विकास परियोजना केन्द्र में स्थानान्तरित कर दिया गया है। बलुआ टोला स्थित हरिजन बस्ती पूरी तरह बाढ के पानी से डूब चूकी है। लोग अपना आसियाना छोड़ सुरक्षित जगहों पर चले गये है। गंगबरार दियरा इलाके में सैकडों रिहायशी पक्के मकान, सिरहायशी झोपडियां से घिरी हुई है। कई लोग अभी भी दियरा में जानवरों के साथ फंसे हुये है। हमीद सेतु के किनारे राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों तरफ मेदनीपुर एवं कालूपुर, सुजानपुर का पूरा दियारा के साथ ही हसनपुरा, नसीरपुर, बीरऊपुर, रामपुर, टौंगा, गोपालपुर, डेढगावां, उधरनपुर, डोहला, तिलवां, मलसा, भगीरथपुर, डुहियां, कासीमपुर, बहलोलपुर, ताडीघाट, मेदनीपुर, कालूपुर, युवराजपुर, रामपुर, पटकनियां, कल्यानपुर, गोपालपुर तिलवां, बडौरा, डारीडीह, बेमुआ, पटखौलियां, ताडीघाट मल्लाह बस्ती पूरी तरह पानी से घिरे हुए है। दूर-दूर तक केवल पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। इसको लेकर ग्रामीणों में भय समाया हुआ है। सुहवल के रामपुर के प्रधान राकेश राय, हसनपुरा के पूर्व प्रधान दीनबंधु राय, गोपालपुर के धर्मेंद्र यादव, तिलवां के मुन्ना यादव, टौंगा के आकाश खरवार, पकडी के राम सिंह, कल्यानपुर के लालमन यादव आदि ने बताया कि पूरा इलाका जलमग्न हो चुका है। सैकड़ों लोग अभी दियरा में अपने डेरे पर घिरे है। प्रशासन अभी तक राहत के नाम पर केवल कुछ नाव की व्यवस्था ही कर सका है। राहत- सामाग्री तो दूर की बात है। राहत केंद्र एवं शरणालय केवल शो-पीश बन कर रह गये है।