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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   Ghazipur A surge of devotion at Kalash Yatra two thousand devotees participated

गाजीपुर: कलश यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब, दो हजार श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

Mon, 26 Oct 2026 03:28 PM IST
किशन चौबे अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर Published by: किशन चौबे Updated Mon, 26 Oct 2026 03:28 PM IST
सार

गाजीपुर के रेवतीपुर क्षेत्र स्थित श्री रुद्रांबिका धाम में कलश यात्रा के साथ नौ दिवसीय महायज्ञ और श्रीराम कथा शुरू हुई। यात्रा में दो हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। चार नवंबर को पूर्णाहुति और महाभंडारा होगा।

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Ghazipur A surge of devotion at Kalash Yatra two thousand devotees participated
गाजीपुर समाचार, कलश यात्रा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गाजीपुर के रेवतीपुर क्षेत्र के नौली, उतरौली और त्रिलोकपुर गांवों के पास स्थित श्री रुद्रांबिका धाम परिसर में सोमवार को कलश यात्रा के साथ नौ दिवसीय श्री रुद्रांबिका महायज्ञ एवं श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। सुबह आठ बजे निकली कलश यात्रा में दो हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। पीले वस्त्र धारण कर सिर पर कलश लेकर चल रहीं महिलाएं आकर्षण का केंद्र रहीं। यात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया और कई स्थानों पर घरों की छतों से पुष्पवर्षा की गई।

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कलश यात्रा श्री रुद्रांबिका धाम परिसर स्थित यज्ञ स्थल से शुरू होकर नौली इंटर कॉलेज पहुंची। इसके बाद नौली, त्रिलोकपुर और उतरौली गांवों का भ्रमण करते हुए सिवान के रास्ते वापस धाम परिसर पहुंची। यात्रा में शामिल श्रद्धालु धार्मिक जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। गांवों में जगह-जगह लोगों ने यात्रा का स्वागत किया और पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया।
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कलश पवित्रता और मंगल का प्रतीक
यज्ञाचार्य डॉ. पंडित धनंजय पांडेय ने कहा कि सनातन परंपरा में कलश को पवित्रता, मंगल और देवत्व का प्रतीक माना गया है। यज्ञ जैसे धार्मिक आयोजनों में आस्था और समर्पण के साथ सहभागिता करने से धार्मिक चेतना मजबूत होती है। ऐसे आयोजन लोगों को आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ने के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का संदेश भी देते हैं।

चार नवंबर को पूर्णाहुति और महाभंडारा
श्री रुद्रांबिका धाम परिसर में महायज्ञ और श्रीराम कथा का आयोजन 26 अक्तूबर से चार नवंबर तक किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे और श्रीराम कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया जाएगा। चार नवंबर को यज्ञ की पूर्णाहुति, प्रसाद वितरण और महाभंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।

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