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Ghazipur News: जरीब, फीता भूल जाइये, आज से सेटेलाइट से होगी खेतों की पैमाइश
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गाजीपुर। भूमि विवादों के त्वरित और सटीक निस्तारण के लिए गाजीपुर में एक जुलाई से खेतों की पैमाइश अत्याधुनिक जीएनएसएस (ग्लोबल नेवीगेश सेटेलाइट सिस्टम) रोवर तकनीक से शुरू होगी।
परंपरागत जरीब और फीते की जगह अब सैटेलाइट आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे सीमांकन अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध हो सकेगा।
जानकारी मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय कक्ष में आयोजित प्रेसवार्ता में जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर एक जुलाई से सभी जिलों में जीएनएसएस रोवर तकनीक से भूमि का सीमांकन शुरू किया जा रहा है।
गाजीपुर की सभी तहसीलों को एक-एक रोवर उपलब्ध करा दिया गया है और राजस्व अधिकारियों को इसका प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। पहले दिन प्रत्येक तहसील में एक-एक खेत की पैमाइश रोवर तकनीक से कराई जाएगी। इसके साथ ही उसी भूमि की पारंपरिक तरीके से भी पैमाइश कर दोनों के परिणामों का मिलान किया जाएगा।
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इससे नई तकनीक की सटीकता और उपयोगिता का मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भूमि का सीमांकन जरीब, फीता, चुंबकीय सुई, मापक छड़ और अन्य पारंपरिक उपकरणों से किया जाता है।
इस प्रक्रिया में समय अधिक लगता है और कई बार माप की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। नई तकनीक से इन कमियों को दूर किया जा सकेगा।
जिलाधिकारी के अनुसार जीएनएसएस रोवर एक आधुनिक उपकरण है, जो भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस के ग्लोबल नेवीगेशन सैटेलाइट सिस्टम की सहायता से भूमि का सटीक मापन करता है।
इससे सीमांकन की प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय होगी और भूमि संबंधी विवादों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण संभव हो सकेगा।
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परंपरागत जरीब और फीते की जगह अब सैटेलाइट आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे सीमांकन अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध हो सकेगा।
जानकारी मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय कक्ष में आयोजित प्रेसवार्ता में जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर एक जुलाई से सभी जिलों में जीएनएसएस रोवर तकनीक से भूमि का सीमांकन शुरू किया जा रहा है।
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गाजीपुर की सभी तहसीलों को एक-एक रोवर उपलब्ध करा दिया गया है और राजस्व अधिकारियों को इसका प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। पहले दिन प्रत्येक तहसील में एक-एक खेत की पैमाइश रोवर तकनीक से कराई जाएगी। इसके साथ ही उसी भूमि की पारंपरिक तरीके से भी पैमाइश कर दोनों के परिणामों का मिलान किया जाएगा।
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इससे नई तकनीक की सटीकता और उपयोगिता का मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भूमि का सीमांकन जरीब, फीता, चुंबकीय सुई, मापक छड़ और अन्य पारंपरिक उपकरणों से किया जाता है।
इस प्रक्रिया में समय अधिक लगता है और कई बार माप की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। नई तकनीक से इन कमियों को दूर किया जा सकेगा।
जिलाधिकारी के अनुसार जीएनएसएस रोवर एक आधुनिक उपकरण है, जो भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस के ग्लोबल नेवीगेशन सैटेलाइट सिस्टम की सहायता से भूमि का सटीक मापन करता है।
इससे सीमांकन की प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय होगी और भूमि संबंधी विवादों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण संभव हो सकेगा।