गाजीपुर: 141 साल में पहली बार इलेक्ट्रिक इंजन से दौड़ी ट्रेन, दिलदारनगर-ताडीघाट पैसेंजर ट्रेन में लगे दो इंजन
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दो इलेक्ट्रिक इंजन युक्त आठ बोगियों वाली दिलदारनगर-ताडीघाट पैसेंजर ट्रेन सुबह गाजीपुर जिले के ताडीघाट स्टेशन स्टेशन पर पहुंच गई। ट्रेन के पहुंचते ही लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। यह ट्रेन पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर चली थी।
दो इलेक्ट्रिक इंजन के साथ आठ बोगियों वाली दिलदारनगर ताडीघाट पैसेंजर ट्रेन संख्या-03643 डीटी को लेकर लोको पायलट के. शर्मा अपने साथियों के साथ स्टेशन पहुंचे थे। यह ट्रेन गाजीपुर के दिलदारनगर, सरहुलां, नगसर होते हुए ताडीघाट स्टेशन पर पहुंची। लेकिन यह ट्रेन अपने निर्धारित समय 9 बजकर 5 मिनट से दस मिनट लेट 9 बजकर 15 मिनट पर पहुंची थी।
दस माह बाद ट्रेन के पहुंचने पर लोगों ने गगनभेदी जयघोष के नारे भी लगाए। इसके पहले लोगों ने जगह-जगह ट्रेन को रोकर चालक सहित अन्य कर्मियों का भव्य स्वागत किया। वहीं रेलवे को भारी जन दबाव के कारण सोनवल व बेमुआ स्थित हाल्ट पर ट्रेन के ठहराव न होने के निर्णय को रद्द करना पड़ा, जिसके कारण यात्रियों ने सुकून महसूस किया।
पहले दिन उत्साहित सैकडों यात्रियों ने महीनों बाद ट्रेन का सफर कर राहत महसूस की। ट्रेन ताडीघाट से दिलदारनगर के लिए फिर से 9 बजकर 45 मिनट सुरक्षित रवाना हुई। स्पेशल पैसेंजर ट्रेन पहले की तरह तीन बार अप-डाउन करेगी।
कोरोना संक्रमण के चलते ट्रेन का संचालन पिछले वर्ष 23 मार्च से बंद था। इस दौरान विभाग को लाखों का नुकसान भी उठाना पड़ा। अब एक तरफ जहां ट्रेन संचालन शुरू होने से यात्रियों को सहुलियतें होंगी, वहीं रेलवे के आय में भी बढोत्तरी निश्चय है। लोगों ने ट्रेन संचालन शुरू कराने के लिए दानापुर मंडल के रेक प्रबंधक सहित अन्य लोगों का आभार व्यक्त किया।
ब्रिटिश राज में इस ब्रांच लाइन का 1880 में निर्माण हुआ था, जो जहाजों के माध्यम से माल परिवहन के उद्देश्य से किया गया था। जिसके बाद भाप इंजन से ट्रेन का परिचालन शुरू हुआ। वर्ष 1990 में इस ब्रांच लाइन को छोटी लाइन से बड़ी लाइन में परिवर्तित किया गया।