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तीन दिन की बंदी के बाद खुले बैंक लगी कतारें
ब्यूरो,अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Tue, 13 Dec 2016 10:40 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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तीन दिन की बंदी के बाद मंगलवार को जब बैंक खुले तो लोगों की लंबी कतारें इन बैंकों में लग गईं। घंटों लाइन में लगने के बाद किसी को कैश मिला तो किसी को निराश होकर खाली हाथ लौटना पड़ा। कमोबेश यही स्थिति एटीएम में भी देखने को मिली। कड़ाके की ठंड की वजह से कई ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में महिलाएं गश खाकर गिर पड़ीं, जिससे कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बना रहा।
जनपद में लगातार तीन दिनों तक बैंक बंद थे। इससे लोग पैसा के लिए परेशान थे। जिन लोगों के पास एटीएम कार्ड की सुविधा थी, वे भी एटीएम के बंद होने से इसका लाभ नहीं ले पा रहे थे। हर किसी के दिमाग में यह बात थी कि तीन दिन बाद बैंक खुलने पर भीड़ अधिक होगी। सभी की इसी सोच की नतीजा था कि शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों के खुलने से पहले ही बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंच गए थे।
लाइन में खड़े होकर धक्का-मुक्की के बीच बैंक कर्मियों के आने का इंतजार करते रहे। बैंक खुलते ही ग्राहकों का जबरदस्त दबाव बन गया। ग्रामीण क्षेत्रों के कई बैंकों में ठंड की वजह से कई महिलाएं गश खाकर गिर पड़ीं, जिससे वहां कुछ देर के लिए अफरातफरी मच गई। कई बैंकों में ऐसा हुआ कि बीच में ही कैश समाप्त हो गया, जिससे अधिकांश लोगों की जेब गर्म नहीं हो सकी। ऐसा लोग नाराजगी व्यक्त करते हुए बैंक की व्यवस्था की दुहाई देते हुए यह कहते रहे कि बैंकों ने हद कर दी। वे लोगों की परेशानियों को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है।
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जनपद में लगातार तीन दिनों तक बैंक बंद थे। इससे लोग पैसा के लिए परेशान थे। जिन लोगों के पास एटीएम कार्ड की सुविधा थी, वे भी एटीएम के बंद होने से इसका लाभ नहीं ले पा रहे थे। हर किसी के दिमाग में यह बात थी कि तीन दिन बाद बैंक खुलने पर भीड़ अधिक होगी। सभी की इसी सोच की नतीजा था कि शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों के खुलने से पहले ही बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंच गए थे।
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लाइन में खड़े होकर धक्का-मुक्की के बीच बैंक कर्मियों के आने का इंतजार करते रहे। बैंक खुलते ही ग्राहकों का जबरदस्त दबाव बन गया। ग्रामीण क्षेत्रों के कई बैंकों में ठंड की वजह से कई महिलाएं गश खाकर गिर पड़ीं, जिससे वहां कुछ देर के लिए अफरातफरी मच गई। कई बैंकों में ऐसा हुआ कि बीच में ही कैश समाप्त हो गया, जिससे अधिकांश लोगों की जेब गर्म नहीं हो सकी। ऐसा लोग नाराजगी व्यक्त करते हुए बैंक की व्यवस्था की दुहाई देते हुए यह कहते रहे कि बैंकों ने हद कर दी। वे लोगों की परेशानियों को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है।
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