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समस्याओं से जूझ रहीं छात्राएं
Ghazipur
Updated Sun, 30 Nov 2014 05:30 AM IST
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जखनिया। क्षेत्र के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। ड्रेस वितरण के नाम पर केवल कुछ कपड़े देकर खानापूर्ति कर दी गई है। रख-रखाव के अभाव में स्टेशनरी रजिस्टर से लेकर रजाई तक खराब हो गए हैं।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में कुल 83 छात्राएं हैं। इन छात्राओं को ड्रेस के रूप में लेगिंग, शर्ट-स्कर्ट, गर्म स्वेटर, जूता-मोजा, स्कार्फ-टोपी देने का प्रावधान है। यह 15 अक्तूबर तक वितरित हो जाना चाहिए। निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी अभी तक केवल शर्ट-स्कर्ट ही आ सका है। यही नहीं छात्राओं के लिए ओढ़ने वाली रजाई पिछले ठंड के बाद से जमीन पर रखी जा रही है। इसके चलते उन्हें चूहों द्वारा नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कार्यालय में आलमारी तक उपलब्ध न होने से स्टेशनरी से संबंधित सामान जमीन पर बिखरा पड़ा है।
चैनल गेट न होने से छात्राओं को असुरक्षा की भावना सताती रहती है। जेनरेटर के अभाव में शाम होते ही बिजली न रहने पर अंधेरा छा जाता है। अप्रैल माह में विद्यालय में सबमर्सिबल जाम हो गया, जिससे पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है, उसे आज तक ठीक नहीं कराया जा सका। दो माह पहले लगा जलनिगम का हैंडपंप गंदा पानी दे रहा है। विद्यालय की छात्राओं के साथ ही शिक्षिकाओं को दैनिक उपयोग के लिए करीब दो सौ मीटर दूर जूनियर हाईस्कूल से पानी लाना पड़ता है। इस संबंध में विद्यालय की वार्डेन पूनम सिंह ने बताया कि रजाई के रख-रखाव की व्यवस्था न होने से आधे से अधिक रजाइयां चूहो ने कुतर दी है। जमीन पर रखने से बिस्तर भी खराब हो रहे है। बताया कि समस्याओं के बाबत उच्चाधिकारियों की जानकारी दी जा चुकी है।
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कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में कुल 83 छात्राएं हैं। इन छात्राओं को ड्रेस के रूप में लेगिंग, शर्ट-स्कर्ट, गर्म स्वेटर, जूता-मोजा, स्कार्फ-टोपी देने का प्रावधान है। यह 15 अक्तूबर तक वितरित हो जाना चाहिए। निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी अभी तक केवल शर्ट-स्कर्ट ही आ सका है। यही नहीं छात्राओं के लिए ओढ़ने वाली रजाई पिछले ठंड के बाद से जमीन पर रखी जा रही है। इसके चलते उन्हें चूहों द्वारा नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कार्यालय में आलमारी तक उपलब्ध न होने से स्टेशनरी से संबंधित सामान जमीन पर बिखरा पड़ा है।
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चैनल गेट न होने से छात्राओं को असुरक्षा की भावना सताती रहती है। जेनरेटर के अभाव में शाम होते ही बिजली न रहने पर अंधेरा छा जाता है। अप्रैल माह में विद्यालय में सबमर्सिबल जाम हो गया, जिससे पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है, उसे आज तक ठीक नहीं कराया जा सका। दो माह पहले लगा जलनिगम का हैंडपंप गंदा पानी दे रहा है। विद्यालय की छात्राओं के साथ ही शिक्षिकाओं को दैनिक उपयोग के लिए करीब दो सौ मीटर दूर जूनियर हाईस्कूल से पानी लाना पड़ता है। इस संबंध में विद्यालय की वार्डेन पूनम सिंह ने बताया कि रजाई के रख-रखाव की व्यवस्था न होने से आधे से अधिक रजाइयां चूहो ने कुतर दी है। जमीन पर रखने से बिस्तर भी खराब हो रहे है। बताया कि समस्याओं के बाबत उच्चाधिकारियों की जानकारी दी जा चुकी है।
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