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समाज को संदेश दे रही फिरकी वाली
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गाजीपुर। फिरकी वाली उपन्यास एक दलित महिला के संघर्ष की एक ऐसी कहानी है, जो समाज में कई वर्ग के लोगों के लिए संदेश देती है। इस उपन्यास में महिला पात्र सुगिया के जीवन के उतार -चढ़ाव के साथ ही उसका जुझारूपन झलकता है। उपन्यास में गंवई परिवेश के सही चित्रण के साथ ही कथोपकथन भी सराहनीय है। उक्त बातें शहर के चंदन नगर स्थित सतीश राय के आवास पर डा. रामबदन राय के उपन्यास फिरकी वाली पर आयोजित परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शेषनाथ राय ने कही। उन्होंने कहा कि यह उपन्यास हर पहलुओं पर खरी उतर रही है।
डा. गजाधर शर्मा गंगेश ने कथा वस्तु पर विचार डाला। डा. त्रिभुवन नाथ वेणु ने कलापक्ष को बारीकी से प्रस्तुत करते हुए उपन्यासकार की सराहना की। डा. ऋचा राय ने इस उपन्यास के आयामों दलित, आदिवासी तथा स्त्री विमर्श पर प्रकाश डाला। अन्य वक्ताओं ने कहा कि इसमें हास्य व्यंग, लोकोक्तियां, ललित निबंधात्मक एवं काव्यात्मक प्रयोग निश्चय ही अनुपमेय है। इसी क्रम में डा. रामनारायण तिवारी, डा. ओम धीरज, रामावतार, डा. युधिष्ठिर तिवारी, सुहैल खां, डा.गोपाल पांडेय, निराला राय, अमरनाथ तिवारी, सलमान सईद आदि ने विचार व्यक्त किया। संचालन डा. व्यास मुनि राय ने किया। अंत में उपन्यासकार डा. रामबदन राय ने इस उपन्यास के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए दलित विमर्श के पहलुओं को उजागर किया। अंत में आयोजक सतीश राय ने सभी आगंतुकों का आभार जताया।
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डा. गजाधर शर्मा गंगेश ने कथा वस्तु पर विचार डाला। डा. त्रिभुवन नाथ वेणु ने कलापक्ष को बारीकी से प्रस्तुत करते हुए उपन्यासकार की सराहना की। डा. ऋचा राय ने इस उपन्यास के आयामों दलित, आदिवासी तथा स्त्री विमर्श पर प्रकाश डाला। अन्य वक्ताओं ने कहा कि इसमें हास्य व्यंग, लोकोक्तियां, ललित निबंधात्मक एवं काव्यात्मक प्रयोग निश्चय ही अनुपमेय है। इसी क्रम में डा. रामनारायण तिवारी, डा. ओम धीरज, रामावतार, डा. युधिष्ठिर तिवारी, सुहैल खां, डा.गोपाल पांडेय, निराला राय, अमरनाथ तिवारी, सलमान सईद आदि ने विचार व्यक्त किया। संचालन डा. व्यास मुनि राय ने किया। अंत में उपन्यासकार डा. रामबदन राय ने इस उपन्यास के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए दलित विमर्श के पहलुओं को उजागर किया। अंत में आयोजक सतीश राय ने सभी आगंतुकों का आभार जताया।
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