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दूसरे दिन भी दर्द से सुबकते रहे परिजन
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गाजीपुर। जंगीपुर थाना क्षेत्र के मेहरल्लीपुर(भवरी) गांव में दूसरे दिन बुधवार को भी मृतकों का परिवार दुख के भंवर में जकड़ा रहा। मातमी सन्नाटे के बीच मरने वालों के घर वालों की सिसकियां सुनाई दे रही थीं। नाते-रिश्तेदारों सहित अन्य लोगों का मृतकों के घर पहुंच कर सांत्वना देने का क्रम जारी रहा। दर्द के बीच ग्रामीण दूसरे दिन भी घटना की आपस में चर्चा करते रहे।
जंगीपुर थाना क्षेत्र के मेहरल्लीपुर (भवरी) गांव में बेसो नदी के किनारे स्थित अंग्रेजों के समय की निर्मित नील गोदाम की ढ़ाई फीट चौड़ी दीवार बीते मंगलवार को दिन में करीब 11 बजे भरभरा कर गिर गई थी। दीवार की जद में आने से मेहरल्लीपुर (भवरी) निवासी चिरकुट बिंद के पुत्र रमेश बिंद (22), केवल बिंद के पुत्र धर्मेंद्र (21), महेंद्र बिंद के पुत्र उमेश (20), बेचन बिंद के पुत्र अच्छेलाल (21) की मलबे में दब कर मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि रामध्यान बिंद का पुत्र गुड्डू (20) गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस हादसे के बाद मृतकों के घर की कौन, पूरे गांव में कोहराम मच गया था। हर कोई घटना के बाद शोकाकु ल हो गया था। घंटों मृतकों की चीख-पुकार गांव की फिजां में गूंजती रही। घटना स्थल से शवों को पोस्टमार्टम के लिए जाने के बाद घर की महिलाएं बिलखते हुए घर पर लौटीं। रात के सन्नाटे में मृतकों के परिजनों की सिसकियां सुनाई दे रही थीं। घटना के दूसरे दिन बुधवार को भी भवरी गांववासी दुखों के भंवर में जकड़े हुए थे। दर्द से सुबकते परिजनों को लोग बार-बार सांत्वना दे रहे थे। नील गोदाम की उस दीवार को कोस रहे थे, जिसकी जद में आने से गांव के चारों युवकों की जान चली गई। सुबह से लेकर शाम तक नात-रिश्तेदारों सहित अन्य लोगों द्वारा मृतकों के घर पहुंच कर रोते-बिलखते परिवार वालों को ढांढ़स बंधाया जा रहा था।
गाजीपुर। मेहरल्लीपुर उर्फ भवरी गांव में बुधवार को पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह पहुंचे। बारी-बारी से मृतकों के घर गए। परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि घटना इतनी बड़ी है कि उसे ताउम्र भूल पाना संभव नहीं है, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है। शायद ऊपर वाले को यही मंजूर रहा हो। रामकेवल बिंद के छोटे जिसका बड़ा भाई इस घटना का शिकार हुआ है, उसको गोद लेने की बात कहते हुए परिजनों से कहा कि आज से उसकी पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा वह उठाएंगे।
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जंगीपुर थाना क्षेत्र के मेहरल्लीपुर (भवरी) गांव में बेसो नदी के किनारे स्थित अंग्रेजों के समय की निर्मित नील गोदाम की ढ़ाई फीट चौड़ी दीवार बीते मंगलवार को दिन में करीब 11 बजे भरभरा कर गिर गई थी। दीवार की जद में आने से मेहरल्लीपुर (भवरी) निवासी चिरकुट बिंद के पुत्र रमेश बिंद (22), केवल बिंद के पुत्र धर्मेंद्र (21), महेंद्र बिंद के पुत्र उमेश (20), बेचन बिंद के पुत्र अच्छेलाल (21) की मलबे में दब कर मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि रामध्यान बिंद का पुत्र गुड्डू (20) गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस हादसे के बाद मृतकों के घर की कौन, पूरे गांव में कोहराम मच गया था। हर कोई घटना के बाद शोकाकु ल हो गया था। घंटों मृतकों की चीख-पुकार गांव की फिजां में गूंजती रही। घटना स्थल से शवों को पोस्टमार्टम के लिए जाने के बाद घर की महिलाएं बिलखते हुए घर पर लौटीं। रात के सन्नाटे में मृतकों के परिजनों की सिसकियां सुनाई दे रही थीं। घटना के दूसरे दिन बुधवार को भी भवरी गांववासी दुखों के भंवर में जकड़े हुए थे। दर्द से सुबकते परिजनों को लोग बार-बार सांत्वना दे रहे थे। नील गोदाम की उस दीवार को कोस रहे थे, जिसकी जद में आने से गांव के चारों युवकों की जान चली गई। सुबह से लेकर शाम तक नात-रिश्तेदारों सहित अन्य लोगों द्वारा मृतकों के घर पहुंच कर रोते-बिलखते परिवार वालों को ढांढ़स बंधाया जा रहा था।
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गाजीपुर। मेहरल्लीपुर उर्फ भवरी गांव में बुधवार को पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह पहुंचे। बारी-बारी से मृतकों के घर गए। परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि घटना इतनी बड़ी है कि उसे ताउम्र भूल पाना संभव नहीं है, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है। शायद ऊपर वाले को यही मंजूर रहा हो। रामकेवल बिंद के छोटे जिसका बड़ा भाई इस घटना का शिकार हुआ है, उसको गोद लेने की बात कहते हुए परिजनों से कहा कि आज से उसकी पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा वह उठाएंगे।
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