फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   दूसरे दिन भी दर्द से सुबकते रहे परिजन

दूसरे दिन भी दर्द से सुबकते रहे परिजन

Wed, 19 Dec 2018 11:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 19 Dec 2018 11:30 PM IST
विज्ञापन
दूसरे दिन भी दर्द से सुबकते रहे परिजन
गाजीपुर। जंगीपुर थाना क्षेत्र के मेहरल्लीपुर(भवरी) गांव में दूसरे दिन बुधवार को भी मृतकों का परिवार दुख के भंवर में जकड़ा रहा। मातमी सन्नाटे के बीच मरने वालों के घर वालों की सिसकियां सुनाई दे रही थीं। नाते-रिश्तेदारों सहित अन्य लोगों का मृतकों के घर पहुंच कर सांत्वना देने का क्रम जारी रहा। दर्द के बीच ग्रामीण दूसरे दिन भी घटना की आपस में चर्चा करते रहे।
विज्ञापन

जंगीपुर थाना क्षेत्र के मेहरल्लीपुर (भवरी) गांव में बेसो नदी के किनारे स्थित अंग्रेजों के समय की निर्मित नील गोदाम की ढ़ाई फीट चौड़ी दीवार बीते मंगलवार को दिन में करीब 11 बजे भरभरा कर गिर गई थी। दीवार की जद में आने से मेहरल्लीपुर (भवरी) निवासी चिरकुट बिंद के पुत्र रमेश बिंद (22), केवल बिंद के पुत्र धर्मेंद्र (21), महेंद्र बिंद के पुत्र उमेश (20), बेचन बिंद के पुत्र अच्छेलाल (21) की मलबे में दब कर मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि रामध्यान बिंद का पुत्र गुड्डू (20) गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस हादसे के बाद मृतकों के घर की कौन, पूरे गांव में कोहराम मच गया था। हर कोई घटना के बाद शोकाकु ल हो गया था। घंटों मृतकों की चीख-पुकार गांव की फिजां में गूंजती रही। घटना स्थल से शवों को पोस्टमार्टम के लिए जाने के बाद घर की महिलाएं बिलखते हुए घर पर लौटीं। रात के सन्नाटे में मृतकों के परिजनों की सिसकियां सुनाई दे रही थीं। घटना के दूसरे दिन बुधवार को भी भवरी गांववासी दुखों के भंवर में जकड़े हुए थे। दर्द से सुबकते परिजनों को लोग बार-बार सांत्वना दे रहे थे। नील गोदाम की उस दीवार को कोस रहे थे, जिसकी जद में आने से गांव के चारों युवकों की जान चली गई। सुबह से लेकर शाम तक नात-रिश्तेदारों सहित अन्य लोगों द्वारा मृतकों के घर पहुंच कर रोते-बिलखते परिवार वालों को ढांढ़स बंधाया जा रहा था।
विज्ञापन




गाजीपुर। मेहरल्लीपुर उर्फ भवरी गांव में बुधवार को पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह पहुंचे। बारी-बारी से मृतकों के घर गए। परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि घटना इतनी बड़ी है कि उसे ताउम्र भूल पाना संभव नहीं है, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है। शायद ऊपर वाले को यही मंजूर रहा हो। रामकेवल बिंद के छोटे जिसका बड़ा भाई इस घटना का शिकार हुआ है, उसको गोद लेने की बात कहते हुए परिजनों से कहा कि आज से उसकी पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा वह उठाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed