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महान कवि और चिंतक थे केदारनाथ सिंह
Updated Thu, 22 Mar 2018 12:12 AM IST
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गाजीपुर।
विभिन्न स्थानों पर शोकसभा का बुधवार को आयोजन किया गया। इस मौके पर ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित महान कवि केदारनाथ सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि केदारनाथ सिंह महान कवि और चिंतक थे।
सामुदायिक रेडियो परिसर में आयोजित शोक सभा में सामुदायिक रेडियो के अमितेश सिंह ने केदारनाथ सिंह के साथ अपने व्यक्तिगत तजुर्बे को साझा किया। उन्होंने कहा कि प्रो. केदारनाथ सिंह से उनकी जितनी बार मुलाकात हुई, उनकी सहजता और उदारता ने उनके व्यक्तित्व के नए आयामों से परिचित कराया। उनका निधन साहित्य के जगत में एक युग का अंत है। पीजी कालेज के प्राचार्य अशोक कुमार सिंह ने कहा कि ऐसे कई अवसर आए हैं, जब गाजीपुर में कई कार्यक्रमों में शिरकत करने के सिलसिले में प्रो. सिंह ने एक-दो दिन का प्रवास भी किया। इस दौरान उन्होंने देश-विदेश के तमाम तजुर्बों को साझा किया और मैं उन चंद खुशनसीबों में हूं, जिन्हें उनके साथ वक्त बिताने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। शोक व्यक्त करने वालों में कृषि विज्ञान केंद्र के अशोक, आशीष बाजपेई, डा. संजय चतुर्वेदी, डा. समर बहादुर सिंह, डा. बद्रीनाथ सिंह, डा. बालेश्वर सिंह, डा. प्रमोद मिश्रा, डा. मनोज मिश्रा, प्रदीप सिंह, मयंक श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे हैं। समकालीन सोच के तत्वावधान में गौतम बुद्ध कालोनी में आयोजित शोकसभा में समाजवादी चिंतक डा. पीएन सिंह ने कहा कि वह संबंध बताते ही नहीं, उसे निभाते भी थे। कवि पुन्नू सिंह यादव और समरबहादुर सिंह ने कहा कि उनके व्यक्तित्व में जो सहजता और सादगी थी, वही उनके काव्य में भी थी। अध्यक्षता करते हुए दीनानाथ शास्त्री ने कहा कि केदारनाथ सिंह पर अज्ञेय की कविताओं की स्पष्ट छाप है। वह अज्ञेय को बहुत मानते थे और उनकी आलोचना सुनना नहीं चाहते थे। शोक व्यक्त करने वालों में कमलाशंकर यादव, डा. श्रीकांत पांडेय, बद्री सिंह, रामनगीना कुशवाहा, धर्मनारायण मिश्र, जितेंद्रनाथ घोष, बालेश्वर विक्रम, गजाधर शर्मा गंगेश आदि शामिल थे। संचालन कथाकार रामावतार ने किया।
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विभिन्न स्थानों पर शोकसभा का बुधवार को आयोजन किया गया। इस मौके पर ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित महान कवि केदारनाथ सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि केदारनाथ सिंह महान कवि और चिंतक थे।
सामुदायिक रेडियो परिसर में आयोजित शोक सभा में सामुदायिक रेडियो के अमितेश सिंह ने केदारनाथ सिंह के साथ अपने व्यक्तिगत तजुर्बे को साझा किया। उन्होंने कहा कि प्रो. केदारनाथ सिंह से उनकी जितनी बार मुलाकात हुई, उनकी सहजता और उदारता ने उनके व्यक्तित्व के नए आयामों से परिचित कराया। उनका निधन साहित्य के जगत में एक युग का अंत है। पीजी कालेज के प्राचार्य अशोक कुमार सिंह ने कहा कि ऐसे कई अवसर आए हैं, जब गाजीपुर में कई कार्यक्रमों में शिरकत करने के सिलसिले में प्रो. सिंह ने एक-दो दिन का प्रवास भी किया। इस दौरान उन्होंने देश-विदेश के तमाम तजुर्बों को साझा किया और मैं उन चंद खुशनसीबों में हूं, जिन्हें उनके साथ वक्त बिताने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। शोक व्यक्त करने वालों में कृषि विज्ञान केंद्र के अशोक, आशीष बाजपेई, डा. संजय चतुर्वेदी, डा. समर बहादुर सिंह, डा. बद्रीनाथ सिंह, डा. बालेश्वर सिंह, डा. प्रमोद मिश्रा, डा. मनोज मिश्रा, प्रदीप सिंह, मयंक श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे हैं। समकालीन सोच के तत्वावधान में गौतम बुद्ध कालोनी में आयोजित शोकसभा में समाजवादी चिंतक डा. पीएन सिंह ने कहा कि वह संबंध बताते ही नहीं, उसे निभाते भी थे। कवि पुन्नू सिंह यादव और समरबहादुर सिंह ने कहा कि उनके व्यक्तित्व में जो सहजता और सादगी थी, वही उनके काव्य में भी थी। अध्यक्षता करते हुए दीनानाथ शास्त्री ने कहा कि केदारनाथ सिंह पर अज्ञेय की कविताओं की स्पष्ट छाप है। वह अज्ञेय को बहुत मानते थे और उनकी आलोचना सुनना नहीं चाहते थे। शोक व्यक्त करने वालों में कमलाशंकर यादव, डा. श्रीकांत पांडेय, बद्री सिंह, रामनगीना कुशवाहा, धर्मनारायण मिश्र, जितेंद्रनाथ घोष, बालेश्वर विक्रम, गजाधर शर्मा गंगेश आदि शामिल थे। संचालन कथाकार रामावतार ने किया।
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