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पूजा पंडालों में उमड़ा आस्था का सैलाब
Updated Wed, 17 Oct 2018 11:30 PM IST
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गाजीपुर। नवरात्र की अष्टमी पर बुधवार को शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित पूजा पंडालों में शक्ति के आराधना की दिनभर धूम मची रही। शाम होते ही पंडालों में स्थापित देवी के दर्शन-पूजन का जो सिलसिला शुरू हुआ वह देर रात तक चलता रहा। दर्शन-पूजन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ा। जगतजननी के दर्शन कर लोग निहाल हो गए। शाम को होने वाली आरती भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। पंडालों के आसपास से सजे रंग-बिरंगी झालरें अलग छंटा बिखेर रही थीं।
सप्तमी के दिन पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजन-अर्चन का कार्य प्रारंभ हो गया। जैसे-जैसे शाम ढलती गई, वैसे-वैसे मां का दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या में भी वृद्धि होती गई। नौ बजते-बजते शहर की प्राय: सभी सड़कें श्रद्धालुओं से पट गई। जिधर भी नजर जा रही थी, उधर मां के दर्शन के अभिलाषी ही दिखाई दे रहे थे। कोई बच्ची अपनी बूढ़ी दादी को अपने कंधे का सहारा देकर दर्शन कराने के लिए पदयात्रा करती नजर आई तो कोई मां अपने मासूम बच्चों को मां के प्रतिमा के सामने हाथ जुड़वाते हुए दिखाई दी। शहर के उर्दूबाजार, नवाबगंज, टेढ़ीबाजार, चीतनाथ, स्टीमरघाट, रायगंज, लालदरवाजा, मिश्रबाजार, महुआबाग, ददरीघाट, झुन्नूलाल का चौराहा, महाजनटोली, रेलवे स्टेशन, लंका, नवापुरा, सकलेनाबाद, गोराबाबाजार, स्टेशन आदि मुहल्लों में बनाए गए पूजा पंडालों में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही। एक तरफ जहां शाम को पूजा पंडालों में होने वाली आरती भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी रही, वहीं पंडालों तथा आसपास जगमा रही रंग-बिरंगी झालरे अनुपम छंटा बिखेर रही थी। दुल्लहपुर, मरदह, बिरनो, जंगीपुर, मुहम्मदाबाद, कासिमाबाद, भांवरकोल, करीमुद्दीनपुर, ताजपुर डेहमा, सिधागरघाट, सेवराई, गहमर, दिलदारनगर, नोनहरा, सैदपुर, खानपुर, औड़िहार, नंदगंज, करंडा, शादियाबाद, बहरियाबाद, मटेहूं, मतसा, जमानिया, देवकली आदि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित पूजा पंडालों की रही। शाम से ही जगत जननी के दर्शन-पूजन का जो सिलसिला शुरु हुआ वह आधी तक जारी रहा। पूजा पंडालों में बज रहे ढोल-नगाड़े और साउंडों पर बज रहे देवी गीत से आसपास का वातावरण पूरी तरह देवीमय बना रहा।
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सप्तमी के दिन पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजन-अर्चन का कार्य प्रारंभ हो गया। जैसे-जैसे शाम ढलती गई, वैसे-वैसे मां का दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या में भी वृद्धि होती गई। नौ बजते-बजते शहर की प्राय: सभी सड़कें श्रद्धालुओं से पट गई। जिधर भी नजर जा रही थी, उधर मां के दर्शन के अभिलाषी ही दिखाई दे रहे थे। कोई बच्ची अपनी बूढ़ी दादी को अपने कंधे का सहारा देकर दर्शन कराने के लिए पदयात्रा करती नजर आई तो कोई मां अपने मासूम बच्चों को मां के प्रतिमा के सामने हाथ जुड़वाते हुए दिखाई दी। शहर के उर्दूबाजार, नवाबगंज, टेढ़ीबाजार, चीतनाथ, स्टीमरघाट, रायगंज, लालदरवाजा, मिश्रबाजार, महुआबाग, ददरीघाट, झुन्नूलाल का चौराहा, महाजनटोली, रेलवे स्टेशन, लंका, नवापुरा, सकलेनाबाद, गोराबाबाजार, स्टेशन आदि मुहल्लों में बनाए गए पूजा पंडालों में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही। एक तरफ जहां शाम को पूजा पंडालों में होने वाली आरती भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी रही, वहीं पंडालों तथा आसपास जगमा रही रंग-बिरंगी झालरे अनुपम छंटा बिखेर रही थी। दुल्लहपुर, मरदह, बिरनो, जंगीपुर, मुहम्मदाबाद, कासिमाबाद, भांवरकोल, करीमुद्दीनपुर, ताजपुर डेहमा, सिधागरघाट, सेवराई, गहमर, दिलदारनगर, नोनहरा, सैदपुर, खानपुर, औड़िहार, नंदगंज, करंडा, शादियाबाद, बहरियाबाद, मटेहूं, मतसा, जमानिया, देवकली आदि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित पूजा पंडालों की रही। शाम से ही जगत जननी के दर्शन-पूजन का जो सिलसिला शुरु हुआ वह आधी तक जारी रहा। पूजा पंडालों में बज रहे ढोल-नगाड़े और साउंडों पर बज रहे देवी गीत से आसपास का वातावरण पूरी तरह देवीमय बना रहा।
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