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श्रद्धालुओं के आस्था और विश्वास का केंद्र है महाहर धाम
Updated Sun, 11 Feb 2018 10:36 PM IST
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मरदह। मरदह क्षेत्र का सिद्धपीठ शिवस्थली महाहर धाम लोगों के आस्था एवं विश्वास का केंद्र है। महाशिवरात्रि और सावन में धाम पर आस्था का सैलाब उमड़ता है। जिले के साथ ही अन्य जिलों के श्रद्धालु देवाधिदेव के चरणों में शीश नवाकर उनसे अपने और परिवार के लिए मंगल की कामना करते हैं। इस धाम की ऐसी मान्यता है कि यहां मत्था टेकने वाले भक्तों की मन्नतें अवश्य पूरी होती हैं। शिव किसी को निराश नहीं करते हैं।
जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित सिद्धपीठ शिवस्थली महाहर धाम की भी एक अगल पहचान है। उत्तरी भाग पर स्थित इस धाम पर जहां महाशिवरात्रि पर भक्तों का रेला उमड़ता है, वहीं पूरे सावन माह में मंदिर परिसर घंट की आवाज से गुंजायमान रहता है। ऐसी मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग का दर्शन करने से मनुष्य के सारे पाप कट जाते हैं। कहा जाता है कि इस धाम का निर्माण राजा दशरथ द्वारा करवाया गया था। यह महल दशरथ की गढ़ी के नाम से विख्यात है। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार श्रवण कुमार की यहीं पर राजा दशरथ द्वारा चलाए गए तीर से मृत्यु हो गई थी। धाम के दक्षिण तरफ श्रवणडीह नाम का गांव भी विद्यमान है, जहां पहले बनाया गया श्रवण कुमार का मंदिर जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच गया है। यहां शिव मंदिर के अलावा भगवान हनुमान, भैरव बाबा, संत रविदास, भगवान ब्रह्मा की चार मुखी प्रतिमा सहित कई देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। तेरह मुखी मुख्य शिवलिंग के साथ ही शिव-पार्वती की युगल मूर्ति भी अद्भुत और पूजनीय है। मंदिर के सामने उत्तर-दक्षिण तरफ दिशा में एक सरोवर है, जहां हजारों वर्ष पहले इस स्थान पर गंगा का प्रवाह था। धाम की ऐसी मान्यता है कि यहां से कोई भक्त निराश नहीं लौटता है। उसकी मन्नतें भोले भंडारी अवश्य पूरी करते हैं।
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जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित सिद्धपीठ शिवस्थली महाहर धाम की भी एक अगल पहचान है। उत्तरी भाग पर स्थित इस धाम पर जहां महाशिवरात्रि पर भक्तों का रेला उमड़ता है, वहीं पूरे सावन माह में मंदिर परिसर घंट की आवाज से गुंजायमान रहता है। ऐसी मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग का दर्शन करने से मनुष्य के सारे पाप कट जाते हैं। कहा जाता है कि इस धाम का निर्माण राजा दशरथ द्वारा करवाया गया था। यह महल दशरथ की गढ़ी के नाम से विख्यात है। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार श्रवण कुमार की यहीं पर राजा दशरथ द्वारा चलाए गए तीर से मृत्यु हो गई थी। धाम के दक्षिण तरफ श्रवणडीह नाम का गांव भी विद्यमान है, जहां पहले बनाया गया श्रवण कुमार का मंदिर जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच गया है। यहां शिव मंदिर के अलावा भगवान हनुमान, भैरव बाबा, संत रविदास, भगवान ब्रह्मा की चार मुखी प्रतिमा सहित कई देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। तेरह मुखी मुख्य शिवलिंग के साथ ही शिव-पार्वती की युगल मूर्ति भी अद्भुत और पूजनीय है। मंदिर के सामने उत्तर-दक्षिण तरफ दिशा में एक सरोवर है, जहां हजारों वर्ष पहले इस स्थान पर गंगा का प्रवाह था। धाम की ऐसी मान्यता है कि यहां से कोई भक्त निराश नहीं लौटता है। उसकी मन्नतें भोले भंडारी अवश्य पूरी करते हैं।
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