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पचास वर्ष बाद घर लौटे अर्जुन, परिजन खुश
Updated Sat, 17 Jun 2017 11:55 PM IST
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मतसा (गाजीपुर)। मेदिनीपुर निवासी मंगरू राम का पुत्र अर्जुन राम 50 वर्ष बाद घर लौटा। उसे देख परिवार के लोगों के खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गांव के जिन लोगों को भी अर्जुन के घर लौटने की जानकारी हुई, वह उसे देखने के लिए उसके घर पहुंचते रहे। जवानी के दिनों से निकलने और बुढ़ापा में लौटने वाले अर्जुन की लोगों में चर्चा होती रही।
मेदिनीपुर निवासी मंगरू राम का पुत्र अर्जुन राम चार भाइयों में तीसरे नंबर पर हैं। गरीबी को दूर करने के लिए रोजी-रोटी की तलाश में अर्जुन 17 वर्ष की उम्र में परिवार वालों को बताए बिना 1960 घर से निकल गया और आसाम तक पहुंच गया। यहां पर प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगा। परिवार के लोगों ने अर्जुन की महीनों इधर-उधर तलाश की। कुछ पता न चलने पर भगवान पर भरोसा करते हुए यह आस लगाए रखा था कि अर्जुन जहां भी होगा देर-सबेर घर लौट आएगा। आसाम में कुछ वर्ष बाद यही पर शादी कर घर बसा लिया। कुछ माह बाद ही पत्नी की मौत हो गई। इस सदमें में अर्जुन की दीमागी हालत खराब हो गई और वह अपना घर-बार भूल गया। आसाम सहित आसपास के जिलों में घूमता रहा। घूमते हुए जौनपुर पहुंच गया। यहां एक व्यक्ति से अर्जुन ने अपने गांव का नाम बताया। उक्त व्यक्ति ने अर्जुन को उसके गांव के बाहर स्थित हनुमान मंदिर पर लेकर पहुंचा। इसके बाद गांव में रह रहे अर्जुन के छोटे भाई शिवमूरत राम को बुलाया। शिवमूरत अर्जुन को तुरंत पहचान लिया और उसे लेकर घर पहुंचा। अर्जुन को देखते परिवार के लोग खुशी से चहक उठे। आसपास के लोग भी अर्जुन को देखने के लिए उसके घर पहुंच गए। 50 वर्ष बाद अर्जुन के घर लौटने की लोगों में चर्चा होती रही।
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मेदिनीपुर निवासी मंगरू राम का पुत्र अर्जुन राम चार भाइयों में तीसरे नंबर पर हैं। गरीबी को दूर करने के लिए रोजी-रोटी की तलाश में अर्जुन 17 वर्ष की उम्र में परिवार वालों को बताए बिना 1960 घर से निकल गया और आसाम तक पहुंच गया। यहां पर प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगा। परिवार के लोगों ने अर्जुन की महीनों इधर-उधर तलाश की। कुछ पता न चलने पर भगवान पर भरोसा करते हुए यह आस लगाए रखा था कि अर्जुन जहां भी होगा देर-सबेर घर लौट आएगा। आसाम में कुछ वर्ष बाद यही पर शादी कर घर बसा लिया। कुछ माह बाद ही पत्नी की मौत हो गई। इस सदमें में अर्जुन की दीमागी हालत खराब हो गई और वह अपना घर-बार भूल गया। आसाम सहित आसपास के जिलों में घूमता रहा। घूमते हुए जौनपुर पहुंच गया। यहां एक व्यक्ति से अर्जुन ने अपने गांव का नाम बताया। उक्त व्यक्ति ने अर्जुन को उसके गांव के बाहर स्थित हनुमान मंदिर पर लेकर पहुंचा। इसके बाद गांव में रह रहे अर्जुन के छोटे भाई शिवमूरत राम को बुलाया। शिवमूरत अर्जुन को तुरंत पहचान लिया और उसे लेकर घर पहुंचा। अर्जुन को देखते परिवार के लोग खुशी से चहक उठे। आसपास के लोग भी अर्जुन को देखने के लिए उसके घर पहुंच गए। 50 वर्ष बाद अर्जुन के घर लौटने की लोगों में चर्चा होती रही।
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