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धर्म नदी के समान : राजेंद्र दास
Updated Fri, 01 Dec 2017 11:02 PM IST
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मानव धर्म प्रसार समाजसेवी संस्था श्री गंगा आश्रम बयेपुर देवकली का 55वां त्रिदिवसीय वार्षिक सम्मेलन के तीसरे दिन का शुभारंभ ईश प्रार्थना के साथ हुआ। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष महात्मा राजेंद्र दास ने कहा कि धर्म नदी के समान है। धर्म है सत्य, अहिंसा, परोपकार। धर्म नदी के समान है और संप्रदाय नदी पर बने घाट के समान हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी संप्रदाय रूपी घाट से धर्म रूपी नदी के शीतल जल का लाभ प्राप्त किया जा सकता है। रेल राज्यमंत्री के प्रतिनिधि सुनील सिंह ने कहा मानव धर्म के लिए संत गंगाराम दास ने सूत्र दिया है कि कुछ भी बनने से पहले हम मानव बनें। यह समाज और राष्ट्र के विकास के लिए मूल मंत्र है। अयोध्या से आए रामलीला के कलाकारों ने परशुराम-लक्ष्मण संवाद एवं सीता-राम विवाह की लीला का मंचन कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर रामानंद, दीनानाथ, नंदलाल, दलसिंगार, ध्रुव आदि ने विचार व्यक्त किया। सदर प्रभारी रामअवध, जमानिया के प्रभारी सदानंद, रामानंद, रामजी, मोहन, रामसूरत, अच्छेलाल, अजय, विरेंद्र, इंद्रदेव सिंह, राजेंद्र मास्टर का कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन तेजबहादुर ने किया।
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उन्होंने कहा कि किसी भी संप्रदाय रूपी घाट से धर्म रूपी नदी के शीतल जल का लाभ प्राप्त किया जा सकता है। रेल राज्यमंत्री के प्रतिनिधि सुनील सिंह ने कहा मानव धर्म के लिए संत गंगाराम दास ने सूत्र दिया है कि कुछ भी बनने से पहले हम मानव बनें। यह समाज और राष्ट्र के विकास के लिए मूल मंत्र है। अयोध्या से आए रामलीला के कलाकारों ने परशुराम-लक्ष्मण संवाद एवं सीता-राम विवाह की लीला का मंचन कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर रामानंद, दीनानाथ, नंदलाल, दलसिंगार, ध्रुव आदि ने विचार व्यक्त किया। सदर प्रभारी रामअवध, जमानिया के प्रभारी सदानंद, रामानंद, रामजी, मोहन, रामसूरत, अच्छेलाल, अजय, विरेंद्र, इंद्रदेव सिंह, राजेंद्र मास्टर का कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन तेजबहादुर ने किया।
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