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विद्युत निजीकरण के विरोध में दिया धरना
Updated Thu, 22 Mar 2018 11:04 PM IST
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गाजीपुर। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र के आह्वान पर संघर्ष समिति ने निजीकरण के विरोध में गुरुवार को विद्युत वितरण मंडल कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। इस मौके पर संचालन करते हुए समिति के संयोजक निर्भय नरायण सिंह ने कहा कि पांच शहरों के निजीकरण एवं सात अन्य जनपदों के निजीकरण के फैसले से कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सरकार के इस फैसले के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि सरकार के इस जन विरोधी फैसले से किसानों, मजदूरों, व्यापारियों एवं आम जनमानस को महंगी बिजली उपलब्ध होगी। बताया कि वर्ष 2010 में आगरा एवं कानपुर को निजी क्षेत्र में करने का फैसला सरकार ने लिया था, लेकिन तमाम विरोधों के बावजूद आगरा को 01 अप्रैैल 2010 को टोरंट कम्पनी को हस्तगत करा दिया एवं कानपुर निजी क्षेत्र में ही विद्युत वितरण अनवरत करता रहा है। आज स्थिति यह है कि आगरा का थ्रू रेट रु 3.25 एवं कानपुर का थ्रू रेट रु 6.30 है। सीएजी ने अपने रिपोर्ट में स्पष्ट संस्तुति किया है कि आगरा में टोरंट से करार घाटे का सौदा साबित हुआ है, जिसमें पावर कारपोरेशन को 5348 करोड़ का घाटा हुआ है, जिसका सीधा असर किसानों, व्यापारियों एवं आम जनमानस पर पडे़गा। बावजूद इसके, बारह शहरों के निजीकरण का फैसला हास्यास्पद एवं उक्त घाटे को चार चांद लगाने जैसा है। सरकार के निजीकरण फैसले को लेकर समिति आरपार लड़ाई लड़ने के लिए बाध्य होगी, जिसमें अनिश्चितकालीन हड़ताल भी शामिल है। इस मौके पर सह संयोजक आशीष गुप्ता, इं. महेंद्र प्रसाद ने कहा कि उप्र सरकार एवं पावर कारपोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी मुख्यमंत्री को गुमराह कर रहे हैं। जनपद के समस्त विद्युतकर्मियों से अपील की कि प्रतिदिन दिन में 2 से शाम 5 बजे तक मंडल कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन में भाग लेकर इसे जारी रखे। इस मौके पर इं. आरआर प्रसाद, इ. एके सिंह, इं. एसके सिंह, इं. आशीष चौहान, इं. महेंद्र मिश्र, इ. एसएन मौर्य, इ. आशीष गुप्ता, इं. शिवम राय, इ. अभिषेक राय, इ. रत्नेश जायसवाल, इ. चंद्रमा प्रसाद, इं. अमित कुमार, इ. वीके राव, अवर अभियंता संतोष मौर्य, नीरज सोनी, प्रेमचंद, रोहित कुमार, दिलीप कुमार, जितेंद्र गुप्ता, चित्रसेन, संजय श्रीवास्तव, सुरेश सिंह, इंतजार अहमद, विनय तिवारी, विष्णु राय, राकेश चौधरी, अजय विश्वकर्मा, गुप्तेश्वर, मदन, कपिल, अंसर अली आदि आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता इं. महेंद्र प्रसाद ने किया।
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उन्होंने कहा कि सरकार के इस जन विरोधी फैसले से किसानों, मजदूरों, व्यापारियों एवं आम जनमानस को महंगी बिजली उपलब्ध होगी। बताया कि वर्ष 2010 में आगरा एवं कानपुर को निजी क्षेत्र में करने का फैसला सरकार ने लिया था, लेकिन तमाम विरोधों के बावजूद आगरा को 01 अप्रैैल 2010 को टोरंट कम्पनी को हस्तगत करा दिया एवं कानपुर निजी क्षेत्र में ही विद्युत वितरण अनवरत करता रहा है। आज स्थिति यह है कि आगरा का थ्रू रेट रु 3.25 एवं कानपुर का थ्रू रेट रु 6.30 है। सीएजी ने अपने रिपोर्ट में स्पष्ट संस्तुति किया है कि आगरा में टोरंट से करार घाटे का सौदा साबित हुआ है, जिसमें पावर कारपोरेशन को 5348 करोड़ का घाटा हुआ है, जिसका सीधा असर किसानों, व्यापारियों एवं आम जनमानस पर पडे़गा। बावजूद इसके, बारह शहरों के निजीकरण का फैसला हास्यास्पद एवं उक्त घाटे को चार चांद लगाने जैसा है। सरकार के निजीकरण फैसले को लेकर समिति आरपार लड़ाई लड़ने के लिए बाध्य होगी, जिसमें अनिश्चितकालीन हड़ताल भी शामिल है। इस मौके पर सह संयोजक आशीष गुप्ता, इं. महेंद्र प्रसाद ने कहा कि उप्र सरकार एवं पावर कारपोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी मुख्यमंत्री को गुमराह कर रहे हैं। जनपद के समस्त विद्युतकर्मियों से अपील की कि प्रतिदिन दिन में 2 से शाम 5 बजे तक मंडल कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन में भाग लेकर इसे जारी रखे। इस मौके पर इं. आरआर प्रसाद, इ. एके सिंह, इं. एसके सिंह, इं. आशीष चौहान, इं. महेंद्र मिश्र, इ. एसएन मौर्य, इ. आशीष गुप्ता, इं. शिवम राय, इ. अभिषेक राय, इ. रत्नेश जायसवाल, इ. चंद्रमा प्रसाद, इं. अमित कुमार, इ. वीके राव, अवर अभियंता संतोष मौर्य, नीरज सोनी, प्रेमचंद, रोहित कुमार, दिलीप कुमार, जितेंद्र गुप्ता, चित्रसेन, संजय श्रीवास्तव, सुरेश सिंह, इंतजार अहमद, विनय तिवारी, विष्णु राय, राकेश चौधरी, अजय विश्वकर्मा, गुप्तेश्वर, मदन, कपिल, अंसर अली आदि आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता इं. महेंद्र प्रसाद ने किया।
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