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शव पहुंचते ही मचा कोहराम
Updated Wed, 22 Aug 2018 12:28 AM IST
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सैदपुर (गाजीपुर)। गंगा में डूबने से हुई मौत के बाद जैसे ही नितेश और प्रवीण का शव घर पहुंचा, कोहराम मच गया। परिवार के लोग चीख-पुकार करने लगे। गांव के शांत फिजां में उनके रोने की आवाज गूंजने लगी। मौके पर मौजूद लोग बिलख रहे परिजनों को सांत्वना देने में जुट गए।
सोमवार की दोपहर बाद जैसे ही कोतवाली क्षेत्र के कटघरा गांव निवासी दिनेश और प्रवीण के परिवार वालों को यह पता चला कि दोनों पक्का घाट पर गंगा में डूब गए हैं, चीख-पुकार मच गई थी। परिवार के महिलाओं सहित पुरुष गंगा घाट पर पहुंच गए थे। गोताखोरों द्वारा खोजबीन के दौरान उनकी निगाहें लहरों पर टिकी थी। जब देर शाम तक किशोरों का पता नहीं चला तो परिवार के लोगों ने महिलाओं को घर भेज दिया, जबकि पुरुष गोताखोरों के साथ खोजबीन में लगे रहे। घर पर मौजूद किशोरों की मां ऊपर वाले से यह प्रार्थना करती रही कि उनके बेटे सकुशल हो। इसी बीच जैसे ही उन्हें यह जानकारी हुई कि दोनों की मौत हो चुकी है, उनकी आस टूट गई और वह चीख-पुकार करने लगी। परिवार के लोग कोतवाली से शवों को लेकर जैसे ही ही घर पहुंचे, कोहराम मच गया। किशोरों की मां बिलखते हुए बार-बार यह कह रही थी कि उनके लाल यदि गंगा में नहाने के लिए नहीं गए होते तो शायद आज वह उनके बीच रहते। उनकी यह व्यथा सुन वहां मौजूद लोगों की आंखे भी छलछला जा रही थी।
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सोमवार की दोपहर बाद जैसे ही कोतवाली क्षेत्र के कटघरा गांव निवासी दिनेश और प्रवीण के परिवार वालों को यह पता चला कि दोनों पक्का घाट पर गंगा में डूब गए हैं, चीख-पुकार मच गई थी। परिवार के महिलाओं सहित पुरुष गंगा घाट पर पहुंच गए थे। गोताखोरों द्वारा खोजबीन के दौरान उनकी निगाहें लहरों पर टिकी थी। जब देर शाम तक किशोरों का पता नहीं चला तो परिवार के लोगों ने महिलाओं को घर भेज दिया, जबकि पुरुष गोताखोरों के साथ खोजबीन में लगे रहे। घर पर मौजूद किशोरों की मां ऊपर वाले से यह प्रार्थना करती रही कि उनके बेटे सकुशल हो। इसी बीच जैसे ही उन्हें यह जानकारी हुई कि दोनों की मौत हो चुकी है, उनकी आस टूट गई और वह चीख-पुकार करने लगी। परिवार के लोग कोतवाली से शवों को लेकर जैसे ही ही घर पहुंचे, कोहराम मच गया। किशोरों की मां बिलखते हुए बार-बार यह कह रही थी कि उनके लाल यदि गंगा में नहाने के लिए नहीं गए होते तो शायद आज वह उनके बीच रहते। उनकी यह व्यथा सुन वहां मौजूद लोगों की आंखे भी छलछला जा रही थी।
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