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राम का नाम लेने से मनुष्य का जीवन हो जाता है धन्य
Updated Tue, 05 Jun 2018 11:47 PM IST
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कासिमाबाद (गाजीपुर)। पंडित विनोद मिश्र ने कहा कि रामचरितमानस से सरल और अच्छा कोई ग्रंथ नहीं है। राम नाम से ही पापों का नाश हो जाता है। श्री शतचंडी महायज्ञ के प्रथम दिन सोमवार को श्री दुर्गा मंदिर सलामतपुर में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि राम कोई साधारण शब्द नहीं है। राम का नाम लेने से मनुष्य का जीवन धन्य हो जाता है। सभी पापों का नाश हो जाता है तथा आत्मा शुद्ध हो जाती है।
उन्होंने कहा कि लोगों को भगवान राम के चरित्र और उनके किए सत्कर्मों का अध्ययन करना चाहिए। अपने जीवन को उसी तरह से ढालने का प्रयास करना चाहिए। अगर हर मनुष्य ऐसा करने लगे तो निश्चित रूप से जीवन धन्य हो जाएगा। उन्होंने कहा कि समाज में फैली बुराइयों को समाप्त करने के लिए भगवान राम के आदर्शों पर चलना होगा। आज समाज में छोटे बड़ों का सम्मान करने वाले बहुत कम लोग दिख रहे हैं। इसके पीछे लोग अपना संस्कार भूलते जा रहे हैं। अपने पूर्वजों के सत्कर्मों को लोग त्यागकर आधुनिकतम जमाने में प्रवेश कर गलत कार्यों को करने में बल दे रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। भगवान राम ने हमेशा बड़ों का सम्मान किया और माता-पिता के आदेशों का पालन किया। यही कारण रहा कि उन्हें दर-दर की ठोकरें भी खानी पड़ी लेकिन वह अपने सिद्धांतों से झुके नहीं। इस सत्संग कार्यक्रम में प्रमुख रूप से यज्ञाचार्य अखिलानंद पांडेय, मंदिर के पुजारी रामानुज उपाध्याय, अखंड प्रताप सिंह, लालबहादुर राम, डॉ. उमेश गिरी, हरेंद्र यादव, हीरामणि चौहान आदि उपस्थित थे।
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उन्होंने कहा कि लोगों को भगवान राम के चरित्र और उनके किए सत्कर्मों का अध्ययन करना चाहिए। अपने जीवन को उसी तरह से ढालने का प्रयास करना चाहिए। अगर हर मनुष्य ऐसा करने लगे तो निश्चित रूप से जीवन धन्य हो जाएगा। उन्होंने कहा कि समाज में फैली बुराइयों को समाप्त करने के लिए भगवान राम के आदर्शों पर चलना होगा। आज समाज में छोटे बड़ों का सम्मान करने वाले बहुत कम लोग दिख रहे हैं। इसके पीछे लोग अपना संस्कार भूलते जा रहे हैं। अपने पूर्वजों के सत्कर्मों को लोग त्यागकर आधुनिकतम जमाने में प्रवेश कर गलत कार्यों को करने में बल दे रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। भगवान राम ने हमेशा बड़ों का सम्मान किया और माता-पिता के आदेशों का पालन किया। यही कारण रहा कि उन्हें दर-दर की ठोकरें भी खानी पड़ी लेकिन वह अपने सिद्धांतों से झुके नहीं। इस सत्संग कार्यक्रम में प्रमुख रूप से यज्ञाचार्य अखिलानंद पांडेय, मंदिर के पुजारी रामानुज उपाध्याय, अखंड प्रताप सिंह, लालबहादुर राम, डॉ. उमेश गिरी, हरेंद्र यादव, हीरामणि चौहान आदि उपस्थित थे।
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