फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   जिले में बेमतलब साबित हो रहे पशु चिकित्सा केंद्र

जिले में बेमतलब साबित हो रहे पशु चिकित्सा केंद्र

Mon, 09 Oct 2017 11:23 PM IST
Updated Mon, 09 Oct 2017 11:23 PM IST
विज्ञापन
जिले में बेमतलब साबित हो रहे पशु चिकित्सा केंद्र
गाजीपुर। जिले में पशुओं के उपचार के लिए खोले गए पशु चिकित्सा केंद्र तथा पशु सेवा केंद्र बेमतलब साबित हो रहे हैं। इनमें से कई केंद्रों पर चिकित्सक नहीं हैं, तो कई पर दवाओं का टोटा है। देखा जाए तो वर्तमान में सात पशु चिकित्सा केंद्र कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। जबकि दो दर्जन पशु सेवा केंद्रों पर पशुधन प्रसार अधिकारियों की तैनात तक नहीं की गई है। ऐसे में क्षेत्रीय पशुपालकों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैैं। पशुओं में फैलने वाली मौसमी बीमारी से लेकर अन्य रोगों में उपचार के लिए उन्हें दूरदराज स्थित अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती है। इतना ही नहीं मजबूरी में झोलाछाप अथवा प्राइवेट चिकित्सक के हाथों शोषण का शिकार भी होना पड़ता है। चिकित्सक के न मिलने और दवाओं के अभाव में कई बार पशुओं की मौत भी हो जाती है।
विज्ञापन

प्रदेश में ही नहीं गंगातीरी इलाके में खासकर पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जबकि पशुओं को निरोगी बनाए रखने तथा उन्हें उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जगह-जगह पशु अस्पतालों की स्थापना भी की गई है। देखा जाए तो शहर के साथ ही जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान समय में 52 पशु चिकित्सालय स्थापित हैं। इन चिकित्सालयों में से सात अस्पताल ऐसे हैं, जहां करीब एक साल से चिकित्सक का अभाव बना हुआ है।
विज्ञापन

विभाग की माने तो फुल्ली, धुस्का, मैनपुर, करंडा, भांवरकोल, मरदह एवं सम्मनपुर पशु अस्पताल पर चिकित्सक की तैनाती नहीं हैं। इसके साथ ही मवेशियों को सही समय से उपचार की सुविधा मिले, इसके लिए जनपद में 59 पशु सेवा केंद्र भी स्थापित किए गए हैैं। इनमें से 35 केंद्रों पर पशुधन प्रसार अधिकारी नियुक्त हैं। जबकि 24 पशु सेवा केंद्रों पर तो यह पद वर्षों से रिक्त है। चिकित्सकों एवं पशुधन प्रसार अधिकारियों के न होने से क्षेत्रीय पशुपालकों की परेेशानी बढ़ती जा रही है। पशुओं के उपचार के लिए उन्हें दूरदराज स्थित अस्पताल का चक्कर काटना पड़ रहा है। समस्या की वजह से कई गांवों में पशुओं की जान आफत में पड़ जा रही हैै। पिछले दिनों लगातार पशु चिकित्साधिकारियों की हड़ताल की वजह से सभी पशु चिकित्सा केंद्रों पर ताले लटके रहे। इस कारण पशुपालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, जिन पशु चिकित्सालय पर चिकित्सक तैनात थे, वहां भी पशुओं का उपचार नहीं हो पा रहा था। इस संबंध में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विद्याशंकर ने बताया कि विभागीय उच्चाधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराया गया है। पशु सेवा केंद्रों तथा पशु अस्पतालों पर चिकित्सकों की तैनाती के लिए कई बार पत्र लिखे गए हैं। फिलहाल चिकित्सकों की कमी के कारण कुछ केंद्रों पर चिकित्सक तैनात नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इनसेट...
टीकाकरण के लिए 48 टीमें गठित
गाजीपुर। पशुओं को खुरपका एवं मुंहपका रोग से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जाता है। इस वर्ष इस अभियान की शुरूआत सोमवार से की गई है। टीकाकरण के लिए जिले को पांच लाख 14 हजार वैक्सीन उपलब्ध कराई गई है। 45 दिन तक चलने वाले अभियान के लिए प्रत्येक ब्लॉक में टीकाकरण के लिए तीन सहित 48 टीम गठित की गई है। टीम गांव-गांव जाकर पशुओं का टीकाकरण करेगी।

इनसेट...
अस्पताल का भवन जर्जर
गाजीपुर। सैदपुर स्थित पशु अस्पताल की हालत दयनीय है। इसका भवन काफी जर्जर हो गया है। इसके कभी भी गिरने की आशंका बनी हुई है। इसके चलते कर्मचारी भयभीत रहते हैं। जबकि तहसील क्षेत्र के दूसरे अस्पताल पर पेयजल की समस्या बनी हुई है। हैंडपंप के अभाव में अस्पताल कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed